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Karnataka MLC Chunav Results: कांग्रेस के ल‍िए कर्नाटक से आई खुशखबरी, बीजेपी चारों खाने च‍ित्‍त, डीके श‍िवकुमार पहली परीक्षा में पास

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कांग्रेस के ल‍िए कर्नाटक से आई खुशखबरी, बीजेपी चारों खाने च‍ित्‍त

Last Updated:June 18, 2026, 22:42 IST

कर्नाटक विधान परिषद चुनाव में कांग्रेस ने सात में से पांच सीटें जीतकर न सिर्फ अपना परचम लहराया, बल्कि क्रॉस वोटिंग का ऐसा खेला किया कि बीजेपी और जेडीएस के कई विधायक अपनी ही पार्टी से बगावत कर कांग्रेस के पाले में आ गए. यह जीत डीके शिवकुमार के राजनीतिक मैनेजमेंट और कांग्रेस की पांच गारंटी योजनाओं पर जनता की सबसे बड़ी मुहर है.कांग्रेस के ल‍िए कर्नाटक से आई खुशखबरी, बीजेपी चारों खाने च‍ित्‍तZoomकर्नाटक में कांग्रेस ने बड़ी जीत दर्ज की है.

झारखंड राज्‍यसभा चुनाव में करारी हार से मातम मना रही कांग्रेस के ल‍िए कर्नाटक से खुशखबरी आई है. सिद्धारमैया के इस्तीफे के बाद राज्य के मुख्यमंत्री की कुर्सी पर काबिज हुए डीके शिवकुमार ने अपनी पहली ही चुनावी परीक्षा में ऐसा परचम लहराया है कि बीजेपी भी चारों खाने च‍ित्‍त हो गई. एमएलसी चुनाव में कांग्रेस 7 में से पांच सीटें जीतने में कामयाब रही है. साफ है क‍ि कांग्रेस ने सिर्फ जीत ही दर्ज नहीं की है, बल्कि बीजेपी और जेडीएस के खेमे में ऐसी सेंधमारी की है जिसकी गूंज आने वाले कई चुनावों तक सुनाई देगी.

224 सदस्यों वाली कर्नाटक विधानसभा में बहुमत के आंकड़े को देखें तो कांग्रेस और तीन निर्दलीय विधायकों का समर्थन मिलाकर कुल 138 वोट बैठता है. सीधे-सीधे गणित के हिसाब से कांग्रेस के उम्मीदवारों को इतने ही वोट मिलने चाहिए थे. लेकिन जब चुनाव के बाद मतपेटियां खुलीं और वोटों की गिनती शुरू हुई, तो नतीजे चौंकाने वाले थे. कांग्रेस के प्रत्याशियों की झोली में कुल 151 वोट जा गिरे. सबसे बड़ा सवाल कि एक्‍स्‍ट्रा 13 वोट आखिर कहां से आए? जवाब है- क्रॉस वोटिंग. बीजेपी और जेडीएस के विधायकों ने अपनी पार्टी लाइन और व्हिप से बगावत करते हुए कांग्रेस के पक्ष में जमकर वोटिंग की. सात में से पांच सीटें जीतकर कांग्रेस ने विपक्ष का लगभग सूपड़ा ही साफ कर दिया है. एनडीए गठबंधन ने सभी सातों सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन उन्हें सिर्फ दो सीटों से संतोष करना पड़ा, जबकि जेडीएस के इकलौते उम्मीदवार गोविंदराजू को तो करारी और शर्मनाक हार का मुंह देखना पड़ा.

सुरजेवाला का तंज-बीजेपी अपने सात वोट गंवा बैठी

विपक्ष में शानदार सर्जिकल स्ट्राइक के बाद कांग्रेस नेताओं के हौसले सातवें आसमान पर हैं. कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला ने इस जीत को सीधा कांग्रेस की जन-कल्याणकारी नीतियों और सरकार की योजनाओं की जीत बताया है. सुरजेवाला ने पूरे आत्मविश्वास के साथ कहा कि पहले ही राउंड के इस चुनाव में कांग्रेस के पांचों उम्मीदवारों ने बंपर जीत दर्ज की है. हमारे पास 135 वोट थे, लेकिन हमने 151 हासिल किए.

उन्होंने विपक्ष की दुखती रग पर हाथ रखते हुए कहा कि बीजेपी अपने सात वोट गंवा बैठी, जबकि जेडीएस को 18 के बजाय सिर्फ 14 वोट ही नसीब हुए. सुरजेवाला ने दावा किया कि ये नतीजे इस बात का पुख्ता प्रमाण हैं कि दलगत राजनीति से ऊपर उठकर विधायकों ने कांग्रेस सरकार की पांच ‘गारंटी’ योजनाओं का दिल से समर्थन किया है, जिसके तहत सालाना लगभग 56,000 करोड़ रुपये सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजे जा रहे हैं. उनका तंज था कि बीजेपी और जेडीएस तो इन गारंटियों को खत्म करने का सपना देख रहे थे, लेकिन खुद उन्हीं के विधायकों ने कांग्रेस की नीतियों पर अपनी मुहर लगा दी है.

डीके शिवकुमार का बढ़ा कद

इस पूरी सियासी बाजीगरी के असली ‘बॉस’ और सूबे के नए नवेले मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार का रुतबा अब इस जीत के बाद पार्टी और राज्य में और भी ज्यादा विशाल हो गया है. शिवकुमार ने इस शानदार जीत के बाद बड़ा ही सधा हुआ लेकिन विरोधियों को चुभने वाला बयान दिया. उन्होंने कहा कि उन्हें तो पहले से ही यह उम्मीद थी कि ये सीटें निर्विरोध भर ली जाएंगी, लेकिन बीजेपी और जेडीएस ने जबरन चुनाव लड़ने का विकल्प चुना. शिवकुमार ने कहा कि मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस आलाकमान ने ऐसे मजबूत उम्मीदवारों पर दांव खेला था, जिन्होंने पूरे देश में पार्टी के लिए अपना खून-पसीना एक किया है.

श‍िवकुमार के ल‍िए फ्लोरटेस्‍ट जैसा था यह चुनाव

मुख्यमंत्री ने दलगत राजनीति से ऊपर उठकर कांग्रेस सरकार और उसकी नीतियों के पक्ष में वोट करने वाले सभी विपक्षी विधायकों का खुलकर धन्यवाद किया. डीके शिवकुमार ने इस शानदार नतीजे को कांग्रेस पार्टी की चट्टानी एकजुटता का सीधा और स्पष्ट प्रमाण बताया. राजनीतिक नजरिए से देखा जाए तो यह चुनाव नतीजे डीके शिवकुमार के लिए किसी ब्रह्मास्त्र से कम नहीं हैं. इसी महीने सिद्धारमैया के इस्तीफे के बाद जब शिवकुमार ने मुख्यमंत्री पद की कमान संभाली थी, तो कुछ दबी जुबान में सवाल उठ रहे थे. लेकिन अपने पहले ही ‘फ्लोर टेस्ट’ नुमा इस चुनाव में उन्होंने साबित कर दिया है कि कर्नाटक में फिलहाल उनके कद और प्रबंधन क्षमता का कोई दूसरा रणनीतिकार नहीं है.

About the AuthorGyanendra Mishra

Mr. Gyanendra Kumar Mishra is associated with hindi..com. working on home page. He has 20 yrs of rich experience in journalism. He Started his career with Amar Ujala then worked for ‘Hindustan Times Group…और पढ़ें

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