पाली के हिंगोला-पावा में लेपर्ड मचा रहा अपना आतंक! रातभर ट्रैक्टर-पटाखों से होता है पहरा, गांव में दहशत का माहौल

Last Updated:April 17, 2026, 18:29 IST
Pali News Hindi : पाली के तखतगढ़ क्षेत्र के हिंगोला और पावा गांव में लेपर्ड के मूवमेंट से दहशत फैल गई है. एक गधे के शिकार के बाद ग्रामीण रातभर जागकर पहरा दे रहे हैं. वन विभाग की चेतावनी के बावजूद लोग खुद ट्रैक्टर और पटाखों के सहारे सुरक्षा कर रहे हैं, जिससे पूरे इलाके में डर का माहौल है.
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पाली : सोचिए, अगर आपको अपने ही घर और खेत में रात गुजारने के लिए बम-पटाखों और ट्रैक्टरों के शोर का सहारा लेना पड़े, तो दहशत का आलम क्या होगा? कुछ ऐसे ही खौफनाक मंजर से गुजर रहे हैं पाली जिले के तखतगढ़ क्षेत्र के हिंगोला और पावा गांव के लोग. यहां एक लेपर्ड के मूवमेंट ने पूरे इलाके की नींद उड़ा दी है. एक पालतू गधे के शिकार के बाद ग्रामीणों का डर हकीकत में बदल गया है. हालांकि वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर पदचिह्नों की पुष्टि की और लोगों को सतर्क रहने को कहा, लेकिन वन विभाग की ‘हिदायत’ से ग्रामीण संतुष्ट नहीं हैं. अपनी और अपने मवेशियों की जान बचाने के लिए अब ग्रामीणों ने खुद कमान संभाल ली है. ट्रैक्टर-ट्रॉली में सवार होकर टोलियां रातभर पहरा दे रही हैं.
पाली जिले के तखतगढ़ क्षेत्र में इन दिनों दहशत का आलम यह है कि सूरज ढलते ही सन्नाटा पसर जाता है, लेकिन ग्रामीणों की आंखों से नींद गायब है. हिंगोला और पावा गांव में एक खूंखार लेपर्ड ने न सिर्फ मवेशियों का शिकार किया है, बल्कि इंसानों की सुरक्षा पर भी सवालिया निशान खड़ा कर दिया है. वन विभाग ने ‘सतर्क’ रहने की हिदायत देकर अपना पल्ला झाड़ लिया है, लेकिन लेपर्ड के लगातार मूवमेंट ने ग्रामीणों को अपनी सुरक्षा खुद करने पर मजबूर कर दिया है. ग्रामीण अब टोलियां बनाकर, ट्रैक्टर-ट्रॉली पर सवार होकर और पटाखे फोड़कर रातभर पहरेदारी कर रहे हैं. देखिए, कैसे लेपर्ड के डर ने पूरे इलाके की रफ्तार थाम दी है.”
पशुपालक के गधे का शिकार, क्षेत्र में भारी दहशततखतगढ़ के निकट हिंगोला-पावा गांव क्षेत्र में शुक्रवार देर शाम उस समय हड़कंप मच गया, जब एक लेपर्ड ने घीसाराम मीणा के खेत पर रह रहे पशुपालक रूपाराम देवासी के पालतू गधे पर हमला कर उसे मौत के घाट उतार दिया. सूचना मिलने पर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची, पदचिह्नों (Pugmarks) की जांच की और ग्रामीणों को सावधान रहने की सलाह देकर लौट गई. लेकिन विभाग की यह खानापूर्ति ग्रामीणों का डर कम नहीं कर सकी.
शिकार के बाद दोबारा लौटा लेपर्ड, बढ़ी बेचैनीग्रामीणों का डर उस समय हकीकत में बदल गया जब शनिवार रात को लेपर्ड उसी स्थान पर दोबारा पहुंचा. ग्रामीण दलपतसिंह राठौड़ ने बताया कि लेपर्ड ने शनिवार रात को आकर मरे हुए गधे के अवशेषों को खाया, जिससे यह साफ हो गया है कि वह अभी भी इसी इलाके में सक्रिय है. लेपर्ड की इस बेखौफ मौजूदगी ने मीणा समाज और अन्य ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है.
ट्रैक्टर-ट्रॉली और पटाखे: ग्रामीणों की ‘सेल्फ-डिफेंस’ गश्तप्रशासन की ओर से कोई ठोस सुरक्षा न मिलने पर ग्रामीणों ने अब खुद मोर्चा संभाल लिया है. हिंगोला गांव के 15 उत्साही युवाओं और ग्रामीणों की एक विशेष टीम बनाई गई है. यह टीम रातभर ट्रैक्टर-ट्रॉली में सवार होकर पूरे इलाके में गश्त करती है. लेपर्ड को रिहायशी इलाकों और खेतों से दूर रखने के लिए ग्रामीण लगातार पटाखे फोड़ रहे हैं और शोर मचा रहे हैं, ताकि आवाज सुनकर शिकारी जानवर भाग जाए.
घरों में कैद हुए ग्रामीण, मवेशियों पर खतराइलाके में बड़ी संख्या में लोग खेती और पशुपालन पर निर्भर हैं, लेकिन लेपर्ड के खौफ ने उन्हें घरों में कैद होने को मजबूर कर दिया है. लोग शाम होते ही अपने बाड़ों को सुरक्षित करने में जुट जाते हैं. किसानों को डर है कि अगर लेपर्ड इसी तरह मूवमेंट करता रहा, तो वह उनके अन्य पालतू पशुओं या बच्चों पर भी हमला कर सकता है.
वन विभाग से पिंजरा लगाने की मांगग्रामीणों का कहना है कि सिर्फ हिदायत देने से काम नहीं चलेगा. लेपर्ड के दोबारा उसी जगह लौटने से स्पष्ट है कि वह हमलावर हो चुका है. क्षेत्रवासियों ने मांग की है कि वन विभाग तुरंत मौके पर पिंजरा लगाए और इस लेपर्ड को रेस्क्यू कर सुरक्षित स्थान पर छोड़े, ताकि हिंगोला-पावा के लोग चैन की सांस ले सकें.
About the AuthorRupesh Kumar Jaiswal
A Delhi University graduate with a postgraduate Diploma in Journalism and Mass Communication, I work as a Content Editor with the Rajasthan team at India Digital. I’m driven by the idea of turning raw in…और पढ़ें
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First Published :
April 17, 2026, 18:29 IST



