सिरोही का कमाल! सूरज की रोशनी से रोज बन रही 17 हजार यूनिट बिजली, हर महीने बच रहे लाखों रुपये

Last Updated:July 09, 2026, 16:47 IST
Sirohi Solar Plant: सिरोही के उमानी गांव में ब्रह्माकुमारी संस्थान द्वारा 80 करोड़ की लागत से 35 एकड़ में स्थापित ‘इंडिया वन सोलर थर्मल पावर प्लांट’ देश का पहला ऐसा रिसर्च प्रोजेक्ट है जो सौर ऊर्जा से स्टीम बनाकर रोजाना 17 हजार यूनिट बिजली पैदा कर रहा है. इसमें 16 घंटे का थर्मल स्टोरेज है जो रात में भी बिजली देता है. इस प्लांट से संस्थान को हर महीने 25 से 30 लाख रुपए की बचत हो रही है. साथ ही स्थानीय आदिवासी युवाओं को ट्रेनिंग देकर रोजगार से जोड़ा गया है, जिससे यह मेक इन इंडिया और पर्यावरण संरक्षण का बेहतरीन उदाहरण बना है.
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Sirohi: राजस्थान का सिरोही जिला इस समय नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में एक बड़े केंद्र के रूप में उभर रहा है. जिले के उमानी गांव में करीब 35 एकड़ भूमि पर एक विशाल सोलर थर्मल पावर प्लांट स्थापित किया गया है. यह प्लांट न केवल जिले का सबसे बड़ा सोलर थर्मल पावर प्लांट है, बल्कि सौर ऊर्जा के सही उपयोग और पर्यावरण संरक्षण के मामले में पूरे देश के लिए एक बेहतरीन उदाहरण पेश कर रहा है. इस प्लांट की मदद से रोजाना 17 हजार यूनिट से भी अधिक बिजली का उत्पादन किया जा रहा है, जिससे बिजली संकट से निपटने में बड़ी मदद मिल रही है.
इस ऐतिहासिक सौर ऊर्जा परियोजना की शुरुआत ब्रह्माकुमारी संस्थान द्वारा की गई है. संस्थान का अंतरराष्ट्रीय मुख्यालय ‘शांतिवन’ सिरोही जिले के आबूरोड में स्थित है. इसके अलावा संस्थान के आसपास तीन अन्य बड़े परिसर भी बने हुए हैं, जहां हर दिन भारी मात्रा में बिजली की आवश्यकता होती है. संस्थान के पीआरओ बीके कोमल ने जानकारी दी कि इस भारी बिजली की खपत को पर्यावरण अनुकूल तरीके से पूरा करने के लिए संस्थान ने सौर ऊर्जा का उपयोग करने का बड़ा फैसला लिया था.
इसी सोच के साथ वर्ष 2017 में ‘इंडिया वन सोलर थर्मल पॉवर प्लांट’ की स्थापना की गई थी. इस प्लांट से पैदा होने वाली बिजली के कारण संस्थान को हर महीने करीब 25 से 30 लाख रुपए तक के बिजली बिल की सीधी बचत हो रही है. यह पावर प्लांट इतना सक्षम है कि यह अकेले ही लगभग 25 हजार लोगों की आबादी की बिजली आवश्यकताओं को पूरा कर सकता है. संस्थान के मुख्यालय ‘शांतिवन’ के साथ-साथ मनमोहनी परिसर और आनंद सरोवर में भी बिजली की आपूर्ति इसी प्लांट के माध्यम से की जा रही है.
16 घंटे का थर्मल एनर्जी स्टोरेज और स्थानीय आदिवासियों को मिला रोजगारइस सोलर थर्मल पावर प्लांट की सबसे बड़ी तकनीकी खासियत इसका 16 घंटे का थर्मल एनर्जी स्टोरेज सिस्टम है. इस एडवांस स्टोरेज क्षमता के कारण रात के समय या बादलों के छाए रहने पर भी प्लांट से चौबीसों घंटे बिना किसी रुकावट के बिजली की आपूर्ति सुनिश्चित की जाती है. तकनीक के साथ-साथ यह प्रोजेक्ट सामाजिक विकास का भी एक बड़ा माध्यम बना है. इस प्लांट की सबसे खास बात यह है कि यहां काम करने वाले अधिकांश लोग स्थानीय आदिवासी क्षेत्रों से ताल्लुक रखते हैं. संस्थान ने इन स्थानीय युवाओं को विशेष प्रशिक्षण देकर इस आधुनिक सोलर प्लांट तकनीक से जोड़ा है. इस वजह से यह प्रोजेक्ट पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ पिछड़े आदिवासी क्षेत्रों में रोजगार और कौशल विकास को बढ़ावा देने का एक बेहतरीन जरिया साबित हो रहा है.
देश का पहला रिसर्च प्रोजेक्ट, जो सौर ऊर्जा से बनाता है स्टीमयह संभवतः देश का ऐसा पहला अनोखा रिसर्च प्रोजेक्ट है, जिसमें सौर ऊर्जा से सीधे स्टीम (भाप) बनाकर बिजली पैदा की जा रही है. इस पूरी प्रक्रिया की एक और खासियत यह है कि इसमें पानी की बहुत ही कम आवश्यकता होती है. इस अनूठे प्रोजेक्ट को जर्मनी के पर्यावरण और प्रकृति संरक्षण मंत्रालय की ओर से ‘कॉमसोलर’ पहल के तहत आंशिक वित्तीय सहायता भी प्रदान की गई थी. तकनीकी संरचना की बात करें तो इस प्लांट में 60 वर्गमीटर आकार के कुल 770 पैराबोलिक रिफ्लेक्टर लगाए गए हैं. ये रिफ्लेक्टर सूर्य की किरणों को ट्रैक करते हैं और उन्हें स्वदेशी तकनीक से निर्मित ‘कास्ट आयरन कैविटी रिसीवर’ पर केंद्रित करते हैं. यह रिसीवर अत्यधिक गर्मी से पानी को तुरंत भाप में बदल देता है, जिससे टरबाइन तेजी से घूमती है और बिजली का उत्पादन होता है. यह पूरी एडवांस तकनीक 450 डिग्री तापमान और 42 बार के भारी दबाव पर काम करती है.
80 करोड़ की लागत से तैयार हुआ ‘मेक इन इंडिया’ का यह बेहतरीन मॉडलपूर्ण रूप से घरेलू स्तर पर विकसित इस तकनीक के कारण यह पूरी परियोजना भारत सरकार के ‘मेक इन इंडिया’ अभियान का एक अत्यंत शानदार और जीवंत उदाहरण है. इस पूरे प्रोजेक्ट को तैयार करने में करीब 80 करोड़ रुपए की लागत आई थी. इस थर्मल प्लांट की सफलता को देखते हुए वर्ष 2018 में संस्थान ने इसके साथ ही 1 मेगावाट क्षमता का एक और सोलर फोटोवोल्टिक प्लांट भी शुरू किया था. आज के समय में ये दोनों प्लांट मिलकर संयुक्त रूप से रोजाना 17 हजार यूनिट से अधिक स्वच्छ और हरित बिजली का उत्पादन कर रहे हैं, जो राजस्थान को सौर ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है.
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Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…और पढ़ें
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