MSJ College Library Bharatpur | Meet Kesariyaram The Human Catalog

Last Updated:May 08, 2026, 10:07 IST
Bharatpur News: भरतपुर के एमएसजे कॉलेज की लाइब्रेरी में 82 वर्षीय केसरियाराम पिछले 45 सालों से किताबों के ‘जीते-जागते कैटलॉग’ बने हुए हैं. उन्हें लाइब्रेरी की 1.5 लाख किताबों की सटीक जानकारी और लोकेशन बिना किसी कंप्यूटर के याद है. साल 2000 में रिटायर होने के बाद भी वे छात्रों की मदद के लिए लाइब्रेरी आते हैं. उनकी याददाश्त इतनी तेज है कि वे फोन पर भी छात्रों को किताबों का शेल्फ नंबर बता देते हैं. केसरियाराम का किताबों के प्रति यह समर्पण तकनीक के इस युग में एक अनूठी मिसाल पेश करता है.
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भरतपुर. आधुनिक तकनीक और डिजिटल दौर में जहां इंसान हर छोटी जानकारी के लिए कंप्यूटर पर निर्भर है, वहीं राजस्थान के भरतपुर जिले से एक ऐसी खबर सामने आई है जो सबको हैरान कर देती है. महारानी श्री जया (MSJ) कॉलेज की लाइब्रेरी में 82 वर्षीय केसरियाराम ज्ञान के एक ऐसे जीवित भंडार हैं, जिनकी याददाश्त के आगे बड़े-बड़े कंप्यूटर भी ठहर जाते हैं. पिछले 45 वर्षों से किताबों की दुनिया में रचे-बसे केसरियाराम को लाइब्रेरी की करीब डेढ़ लाख किताबों का ब्यौरा बिना किसी सूची या डिजिटल डेटाबेस के कंठस्थ याद है.
केसरियाराम ने वर्ष 1980 में इस लाइब्रेरी में एक बुक लिफ्टर के रूप में अपनी सेवाएं शुरू की थीं. किताबों के बीच काम करते-करते उन्होंने इनके साथ ऐसा अटूट रिश्ता बना लिया कि हर पुस्तक का विषय, लेखक और उसकी सटीक लोकेशन उनके दिमाग में छप गई. वर्ष 2000 में वे सरकारी सेवा से सेवानिवृत्त भी हो गए, लेकिन किताबों के प्रति उनका प्रेम उन्हें लाइब्रेरी से दूर नहीं कर सका. आज भी वे छात्रों और स्टाफ के लिए उतने ही महत्वपूर्ण हैं जितने अपनी नौकरी के समय थे.
डेढ़ लाख किताबों का ‘लिविंग कैटलॉग’लाइब्रेरी में मौजूद करीब डेढ़ लाख किताबों की जानकारी केसरियाराम को बिना किसी रिकॉर्ड रजिस्टर के याद है. जब भी कोई छात्र उनसे किसी विशेष विषय की किताब के बारे में पूछता है, तो वे बिना एक पल गंवाए उसे अलमारी और शेल्फ नंबर तक बता देते हैं. उनकी खास बात यह है कि उन्हें न केवल वर्तमान में मौजूद किताबों की जानकारी है, बल्कि जो किताबें अब लाइब्रेरी में नहीं हैं या फट चुकी हैं, उनका रिकॉर्ड भी उन्हें जुबानी याद है. छात्र और शिक्षक किसी भी दुर्लभ जानकारी के लिए उन पर आँख मूंदकर भरोसा करते हैं.
फोन पर भी बता देते हैं किताबों की लोकेशनकेसरियाराम की सेवा भावना की मिसाल पूरे कॉलेज में दी जाती है. यदि वे कभी लाइब्रेरी नहीं आ पाते, तो छात्र उन्हें फोन करते हैं और वे घर बैठे ही छात्र को किताब की सही लोकेशन बता देते हैं. लोकल 18 से बातचीत में उन्होंने भावुक होते हुए बताया कि ये किताबें ही उनका परिवार हैं और उन्होंने अपना पूरा जीवन इन्हीं के बीच बिताया है. आज के डिजिटल युग में केसरियाराम एक मिसाल हैं कि समर्पण और लगन के सामने बड़ी से बड़ी तकनीक भी फीकी पड़ सकती है.
About the Authorvicky Rathore
Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…और पढ़ें
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Bharatpur,Bharatpur,Rajasthan



