Rajasthan

NEET UG 2026 Paper Leak: सामने आया ‘गेस पेपर’ का असली गेम, हूबहू मैच कर रहे थे 90 में 90 सवाल

Last Updated:May 12, 2026, 20:59 IST

नीट यूजी 2026 पेपर लीक मामले की जांच नासिक से अब राजस्‍थान के सीकर तक पहुंच गई है. पेपर लीक के लिए जिम्‍मेदारी आरोपियों को उनके अंजाम तक पहुंचाने के लिए मामले की जांच सीआईबी को सौंप दी गई है. इस मामले में एक बीएएमएस की पढ़ाई कर रहे छात्र को भी हिरासत में लिया गया है.NEET Paper Leak: सामने आया गेस पेपर का गेम, हूबहू मैच कर रहे थे 90 में 90 सवालZoomनीट पेपर लीक मामले में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं.

NEET UG 2026 Paper Leak: नीट यूजी 2026 के पेपर लीक ने एक बार फिर करोड़ों छात्रों की तैयारियों पर पानी फेर दिया है. गनीमत रही कि पेपर से पहले राजस्‍थान पुलिस के स्‍पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) को पेपर माफिया के मंसूबों के बारे में पता लगा, जिसके बाद नीट यूजी 2026 की परीक्षा को रद्द कर दिया गया. पेपर रद्द होने से परीक्षा की तैयारी कर रहे करोड़ों छात्रों को निराशा जरूर हुई, पर राजस्‍थान एसओजी के इस क्विक एक्‍शन से पेपर माफिया के मंसूबों पर पानी भी फिर गया.

अब राजस्‍थान पुलिस की एसओजी ने इस मामले में कई चौंकाने वाले खुलासे किए है. राजस्‍थान पुलिस की एसओजी का दावा है कि पेपर लीक का पूरे गेम को ‘गेस पेपर’ की आड़ में खेला जा रहा था. जांच में पता चला कि नीट के पेपर से जुड़ा एक गेस पेपर सोशल मीडिया और कुछ कोचिंग सर्किल में वायरल हो रहा था. जब इस गेस पेपर की जांच की गई तो चौकाने वाले तथ्‍य सामने आए. एसओजी को पता चला कि गेस पेपर में बायोलॉजी के 90 में 90 सवाल आपस में मैच कर रहे थे.

वहीं, केमेस्ट्रिी के 46 में से 35 सवाल हूबहू असली पेपर से मेल खा रहे थे. कई सवालों में लाइन, कॉमा और शब्द तक नहीं बदले गए थे. इस खुलासे के बाद राजस्थान एसओजी ने पूरे मामले की जांच शुरू की. इस मामले में एसओजी ने करीब डेढ़ दर्जन लोग हिरासत में लिया है. जांच में मनीष यादव और राकेश मंडावरिया को मास्‍टरमाइंड माना जा रहा है. सूत्रों के अनुसार, मनीष यादव को जयपुर से हिरासत में लिया गया है, जबकि राकेश मंडावरिया का संबंध सीकर के एक कंसल्टेंसी सेंटर से बताया जा रहा है.

असली सवालों के साथ तैयार किया था क्वेश्चन बैंक

जांच एजेंसियों का आरोप है कि मनीष यादव ने लीक हुए सवालों में दूसरे सवाल मिलाकर एक तैयार किया था, ताकि शक कम हो और छात्रों को वही पढ़ाया जा सके.
पेपर लीक की चेन नासिक से शुरू हुई थी. यह चेन महाराष्ट्र से हरियाणा होते हुए राजस्थान पहुंची. इसके बाद, इन गेस पेपर को दूसरे राज्यों तक पहुंचा गया.
सूत्रों के मुताबिक जांच में सामने आया है कि पेपर की पहली डिजिटल कॉपी महाराष्ट्र के नासिक में ही बनाई गई थी.
बताया जा रहा है कि नासिक की एक प्रिंटिंग प्रेस में प्रश्नपत्र कॉपी किया गया. वहां से यह पेपर हरियाणा पहुंचा, जहां गुरुग्राम के एक डॉक्टर तक इसे पहुंचाया गया.
इसके बाद पेपर जयपुर लाया गया और फिर जमवारामगढ़ होते हुए सीकर तक पहुंचा. जांच एजेंसियों का दावा है कि सीकर से यही पेपर जम्मू-कश्मीर, बिहार और केरल तक फैलाया गया.

हुलिया बदलकर घूम रहा था संदिग्ध

सूत्रों के अनुसार, महाराष्ट्र के नासिक के इंदिरानगर इलाके से एक संदिग्ध को नासिक क्राइम ब्रांच ने हिरासत में लिया है. आरोपी करीब 30 साल का है और बीएएमएस की पढ़ाई कर रहा है. बताया जा रहा है कि वह मंदिर दर्शन के लिए जा रहा था, तभी पुलिस ने उसे हिरासत में लिया है. जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी ने अपना हुलिया बदल लिया था और बाल भी कटवा लिए थे. पुलिस ने पुराने फोटो के आधार पर हिरासत में लिया है. पूछताछ में आरोपी ने पुणे कनेक्शन की बात भी कही है, जिसके बाद पुणे से भी एक संदिग्‍ध को हिरासत में लिया गया है.

हाई-टेक तरीके से लीक हुआ पेपर: जांच एजेंसियों के मुताबिक, इस बार पेपर लीक को पारंपरिक तरीके से नहीं, बल्कि हाई-टेक सिस्टम के जरिए लीक किया गया था. प्रश्नपत्र को मोबाइल कैमरे से नहीं, बल्कि हाई-डेफिनिशन पोर्टेबल स्कैनर से स्कैन किया गया था. इसके बाद स्कैन कॉपी टेलीग्राम और व्हाट्सऐप ग्रुप्स के जरिए सर्कुलेट किया गया था. जांच में ‘प्राइवेट माफिया’ नाम का एक नेटवर्क भी सामने आया है, जिसमें करीब 400 मेंबर बताए जा रहे हैं. ग्रुप में केवल लीक पेपर अपलोड करने की चेतावनी लिखी गई थी.
पेपर लीक के लिए शैडो सर्वर का हुआ इस्‍तेमाल: एजेंसियां अब इस बात की भी जांच कर रही हैं कि नासिक के बाहरी इलाके में एक ‘शैडो सर्वर’ इस्तेमाल किया गया था. शुरुआती जानकारी के मुताबिक एक छोटे आईटी स्टार्टअप की लीज लाइन का उपयोग डेटा ट्रांसफर छुपाने के लिए किया गया था. इसके अलावा एक निजी कुरियर कंपनी के कर्मचारी पर भी शक है, जिसने कथित तौर पर सिक्‍योर ट्रंक तक करीब 30 मिनट का एक्सेस दिलाने में मदद की.
चुनिंदा छात्रों को परीक्षा से पहले से पढ़ाया गया गेस पेपर: जांच में यह भी सामने आया है कि सीकर के कुछ कोचिंग संस्थानों का इस नेटवर्क से संबंध हो सकता है. जांच में यह भी पता चला है कि चुनिंदा छात्रों को परीक्षा से पहले से गेस पेपर पढ़ाया गया था. सवालों की पीडीएफ सीकर से अलग-अलग राज्यों में भेजी गई और कई छात्रों को प्रिंटेड कॉपियां भी उपलब्ध कराई गईं. अब राजस्‍थान पुलिस की एसओजी चैट्स, कॉल लॉग्स और पैसों के लेनदेन की जांच कर रही है.
सीबीआई को सौंपी गई नीट पेपर लीक की जांच: मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार ने अब पूरे केस की जांच सीबीआई को सौंप दी है. वहीं, पेपर लीक को लेकर सीबीआई ने इस मामले में केस दर्ज कर लिया है. जांच के लिए एक विशेष जांच टीम गठित करने की तैयारी शुरू कर दी है. इस टीम में ऐसे मामलों के एक्सपर्ट भी शामिल किए जा रहे हैं. राजस्थान एसओजी से इस केस से जुड़े दस्‍तावेजों और केस फाइल को अपने कब्जे में लेने की प्रक्रिया सीबीआई ने शुरू कर दी है. साथ ही, एनटीए अधिकारियों से पूछताछ की भी तैयारी की जा रही है.

परीक्षा से पहले कई इनपुट्स पर कार्रवाई की गई थी. करीब 20 टेलीग्राम चैनल बंद करवाए गए थे. साथ ही यह भी कहा कि दोबारा परीक्षा जल्द करवाई जाएगी. साथ ही, छात्रों से नई फीस नहीं ली जाएगी. – अभिषेक सिंह, डायरेक्टर जनरल, एनटीए

About the AuthorAnoop Kumar MishraAssistant Editor

Anoop Kumar Mishra is currently serving as Assistant Editor at Hindi Digital, where he leads coverage of strategic domains including aviation, defence, paramilitary forces, international security affairs…और पढ़ें

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