कोई योद्धा तो नहीं, पर हुनर है ऐतिहासिक! पाली की इन बेटियों ने दोनों हाथों में तलवारें घुमाकर याद दिलाई झांसी की रानी

Last Updated:June 20, 2026, 16:08 IST
Aryaveer Shivir:पाली के आर्य वीर दल शिविर में 3 से 16 वर्ष तक के बच्चे योग, लाठी संचालन और तलवारबाजी का प्रशिक्षण ले रहे हैं. जहां बेटियां झांसी की रानी की तरह तलवारबाजी के गुर सीखकर आत्मरक्षा में निपुण बन रही हैं, वहीं 8 वर्षीय सिद्धार्थ की दोहरी तलवारबाजी और 3 साल की बच्ची का योगाभ्यास सभी को हैरान कर रहा है. उदयपुर से आए विशेषज्ञ प्रशिक्षकों की देखरेख में चल रहा यह शिविर बच्चों में आत्मविश्वास, अनुशासन और चरित्र निर्माण की नई मिसाल पेश कर रहा है.
पाली. खूब लड़ी मर्दानी वह तो झांसी वाली रानी थी, इतिहास की किताबों में पढ़ी ये लाइनें आज मारवाड़ की धरती पर साक्षात हकीकत बनती नजर आ रही हैं. दोनों हाथों में एक साथ झांसी की रानी लक्ष्मीबाई की तरह हवा में बिजली की रफ्तार से तलवारें घुमाती ये बेटियां, कोई योद्धा तो नहीं हैं, लेकिन इनका हुनर और हौसला किसी महान योद्धा से कम भी नहीं है. सुबह की शांत वेला में जब चारों तरफ लाठियों के टकराने और तलवारों की खनक गूंजती है, तो रोंगटे खड़े हो जाते हैं. कुछ ऐसा ही हैरतअंगेज नजारा इन दिनों पाली शहर में देखने को मिल रहा है. पाली के लाखोटिया गार्डन रोड स्थित आर्य वीर दल में चल रहे है इस विशेष शिविर में जहां जांबाज बेटे सेल्फ-डिफेंस के लिए 5 फीट ऊपर हवा में लाठियां भांज रहे हैं, वहीं नन्हीं बेटियां आंखों में गजब का आत्मविश्वास लिए तलवारबाजी के पैंतरे सीख रही हैं.
तीन साल से बेटिया भी सीख रही तलवारबाजी पाली शहर के लाखोटिया गार्डन रोड स्थित आर्य वीर दल में 6 साल से लेकर 16 साल तक के बच्चे लाठी चलाना सीख रहे है, तो कुछ लड़कियां एक्सपर्ट की तरह तलवारबाजी करते नजर आई. यहां हुनर सीखने के लिए तीन साल की लड़की भी नजर आई जो योगाभ्यास कर रही थी, उनकी एनर्जी देखने लायक थी. तो वहीं दूसरी ओर कई बेटियां किसी युद्ध विशेषज्ञ की तरह हवा में तलवारें भांजती नजर आ रही हैं.
3 साल की मासूम का योग और 8 साल के सिद्धार्थ की दोहरी तलवारबाजीशिविर में केवल बड़े बच्चे ही नहीं, बल्कि नन्हे-मुन्ने बच्चों की ऊर्जा भी देखने लायक है. यहां महज 3 साल की एक नन्हीं बच्ची भी हुनर सीखने पहुंची है, जो पूरे समर्पण के साथ योगाभ्यास कर रही है. वहीं, 8 साल का होनहार सिद्धार्थ दोनों हाथों से एक साथ तलवार चलाकर सबको हैरत में डाल रहा है. सिद्धार्थ जमीन से करीब पांच फीट ऊपर लाठियों पर खड़े होकर भी लाठी चलाने का हैरतअंगेज प्रदर्शन करता है. उसका कहना है कि इस शिविर में आने के बाद अब उसके मन से हर तरह का डर गायब हो चुका है.
चरित्र निर्माण और सेल्फ डिफेंस सिखा रहे उदयपुर के एक्सपर्टआर्यवीर दल के अध्यक्ष दिलीप परिहार ने बताया कि बच्चों में आत्मरक्षा की भावना जगाने और उनके बेहतर चरित्र निर्माण के उद्देश्य से इस विशेष शिविर का आयोजन किया जा रहा है. गत 12 जून से शुरू हुआ यह प्रशिक्षण शिविर आगामी 27 जून तक निरंतर जारी रहेगा. शिविर का समय सुबह 5:30 बजे से 8:00 बजे तक और शाम 5:00 बजे से 8:00 बजे तक रखा गया है, जिसमें वर्तमान में 105 से अधिक छात्र-छात्राएं कड़ा अभ्यास कर रहे हैं. उदयपुर से आए मुख्य प्रशिक्षक और एक्सपर्ट जीवनलाल आर्य बच्चों को योगाभ्यास, लाठी संचालन, जूडो और योग के विभिन्न कठिन आसन सिखा रहे हैं. इसके साथ ही बच्चों को रोज महापुरुषों के प्रेरक प्रसंग सुनाकर संस्कारित भी किया जा रहा है.
बेटे के हुनर के लिए रोज ‘उतवण गांव’ से बाइक पर आ रहे श्यामलालयह शिविर न केवल बच्चों को निपुण बना रहा है, बल्कि अभिभावकों के त्याग और फिटनेस की कहानी भी बयां कर रहा है. उतवण गांव के रहने वाले श्यामलाल अपने बेटे सचिन को यह हुनर सिखाने के लिए रोज सुबह 4 बजे उठते हैं और गांव से बाइक पर बैठाकर पाली लाते हैं. श्यामलाल का कहना है कि उनके गांव में इस तरह की सुविधाएं और शिविर नहीं होते, इसलिए वे बेटे के उज्जवल भविष्य के लिए रोज सफर करते हैं. जब तक बेटा मैदान में प्रशिक्षण लेता है, तब तक श्यामलाल खुद भी लाखोटिया गार्डन में जाकर वॉकिंग और व्यायाम कर लेते हैं, जिससे बच्चों के साथ-साथ पेरेंट्स भी पूरी तरह फिट हो रहे हैं.
About the AuthorMonali Paul
नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें
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