अब नहीं छूटेगा कोई मासूम बेसहारा! मेड़ता अस्पताल में शुरू पालना गृह सुविधा, बच्चों की सुरक्षा की अनोखी व्यवस्था

Last Updated:June 21, 2026, 11:02 IST
Child Care Home Nagaur: नागौर जिले के मेड़ता अस्पताल में जल्द ही पालना गृह की स्थापना की जाएगी, जिससे परित्यक्त और असहाय नवजात शिशुओं को सुरक्षित आश्रय मिल सकेगा. इस पहल का उद्देश्य उन नवजातों की जान बचाना है, जिन्हें विभिन्न कारणों से सार्वजनिक स्थानों या सुनसान इलाकों में छोड़ दिया जाता है. पालना गृह में कोई भी व्यक्ति नवजात को सुरक्षित रूप से छोड़ सकेगा, जिसके बाद अस्पताल प्रशासन और बाल कल्याण विभाग उसकी देखभाल, स्वास्थ्य जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया सुनिश्चित करेंगे. यह व्यवस्था नवजात मृत्यु दर को कम करने और बच्चों को नया जीवन देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है. स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि इस सुविधा से समाज में जागरूकता बढ़ेगी और असहाय बच्चों को बेहतर भविष्य मिल सकेगा.
परित्यक्त, अनचाहे अथवा माता-पिता द्वारा त्यागे गए नवजात शिशुओं की सुरक्षा और उनके जीवन को सुरक्षित भविष्य देने के लिए प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है. मेड़ता सिटी के उप जिला राजकीय स्वास्थ्य केंद्र (डीसीएच) में पालना गृह स्थापित किया जाएगा, जहां ऐसे नवजातों को सुरक्षित रूप से रखा जा सकेगा. यह पहल उन बच्चों के लिए जीवनदान साबित हो सकती है, जिन्हें अक्सर असुरक्षित स्थानों पर छोड़ दिया जाता है.
इस योजना को मूर्त रूप देने के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव एवं अपर जिला एवं सेशन न्यायाधीश संजय कुमार मालवीया तथा बाल कल्याण समिति नागौर के अध्यक्ष मनोज सोनी ने अस्पताल का निरीक्षण किया. निरीक्षण के दौरान उन्होंने अस्पताल परिसर का गहन अवलोकन कर पालना गृह के लिए उपयुक्त स्थान का चयन किया. अधिकारियों ने इस व्यवस्था को जल्द शुरू करने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए.
निरीक्षण के दौरान दोनों अधिकारियों ने अस्पताल प्रभारी डॉ. रामेश्वर बेनीवाल के साथ विस्तृत चर्चा की. इस दौरान उन्होंने पालना गृह की स्थापना, सुरक्षा व्यवस्था, नवजातों की देखभाल और चिकित्सा सुविधाओं से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श किया गया. अधिकारियों ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि पालना गृह ऐसी जगह बनाया जाए, जहां नवजात को तुरंत चिकित्सा सहायता और आवश्यक संरक्षण उपलब्ध कराया जा सके.
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बाल कल्याण समिति नागौर के अध्यक्ष मनोज सोनी ने बताया कि पालना गृह में मिलने वाले नवजातों को समिति अपने संरक्षण में लेती है. उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में बच्चे को छोड़ने वाले व्यक्ति की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाती है. इसके अलावा उस व्यक्ति के खिलाफ किसी प्रकार की जांच या कानूनी कार्रवाई नहीं की जाती, ताकि जरूरतमंद लोग बिना किसी डर के नवजात को सुरक्षित स्थान पर छोड़ सकें.
उन्होंने बताया कि नवजात को संरक्षण में लेने के बाद उसकी स्वास्थ्य जांच, चिकित्सा उपचार, देखभाल और पुनर्वास की प्रक्रिया तत्काल शुरू कर दी जाती है. बाल कल्याण समिति बच्चे के सर्वांगीण विकास और सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाती है. इसके साथ ही निर्धारित कानूनी प्रक्रिया पूरी कर बच्चे को भविष्य में दत्तक ग्रहण के लिए तैयार किया जाता है, जिससे उसे एक सुरक्षित और अच्छा परिवार मिल सके.
उन्होंने बताया कि समिति द्वारा सभी आवश्यक कानूनी औपचारिकताएं पूरी किए जाने के बाद बच्चे को विधिक रूप से दत्तक ग्रहण के लिए मुक्त घोषित किया जाता है. इसके बाद केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (कारा) तथा राज्य स्तरीय एजेंसियों के माध्यम से उसे दत्तक ग्रहण प्रक्रिया में शामिल किया जाता है. यह व्यवस्था सुनिश्चित करती है कि परित्यक्त नवजातों को नया परिवार और बेहतर जीवन का अवसर मिल सके.
प्राधिकरण सचिव संजय कुमार मालवीया ने बताया कि कई बार सामाजिक, आर्थिक या पारिवारिक परिस्थितियों के कारण कुछ महिलाएं नवजात की देखभाल करने में असमर्थ हो जाती हैं. ऐसे मामलों में नवजात को कचरा स्थलों, सुनसान जगहों या अन्य असुरक्षित स्थानों पर छोड़ने की बजाय पालना गृह में सुरक्षित रूप से छोड़ा जा सकता है. पालना गृह शुरू होने से ऐसी घटनाओं में कमी आएगी और अनेक नवजातों का जीवन सुरक्षित तथा संरक्षित बन सकेगा.
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