बाड़मेर के रामसर में सरहद पर चला पीला पंजा, सरकारी जमीन से हटाए अतिक्रमण, नेताओं ने किया विरोध

Last Updated:June 21, 2026, 11:49 IST
Barmer Encroachment News: बाड़मेर के रामसर उपखंड में भारत-पाक सीमा से सटे सियाई और केलन का पार गांवों में प्रशासन ने भारी पुलिस बल के साथ मिलकर सरकारी जमीन से अवैध अतिक्रमण हटाए हैं. इस कार्रवाई के तहत अवैध निर्माणों और मस्जिदों को बुलडोजर से ढहाया गया. प्रशासन का कहना है कि इसके लिए पहले ही नोटिस दिए जा चुके थे. इस कार्रवाई का विरोध करने के लिए बाड़मेर सांसद उम्मेदाराम बेनीवाल, विधायक हरीश चौधरी और अन्य कांग्रेस नेता बॉर्डर पर पहुंचे हैं, जिससे राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है.
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बाड़मेर बॉर्डर पर चला बुलडोजर, नेताओं का विरोध
बाड़मेर: राजस्थान के सरहदी जिले बाड़मेर के रामसर इलाके से एक बड़ी खबर सामने आ रही है. भारत-पाकिस्तान सीमा के निकट प्रशासनिक अमले ने भारी पुलिस जाब्ते के साथ मिलकर सरकारी जमीनों पर किए गए अवैध निर्माणों और अतिक्रमणों के खिलाफ एक बड़ी और सख्त कार्रवाई को अंजाम दिया है. उपखंड प्रशासन के इस ‘पीले पंजे’ यानी बुलडोजर ने सीमावर्ती क्षेत्रों में पहुंचकर सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया है. हालांकि, इस पूरी प्रशासनिक कार्रवाई के बाद सीमावर्ती गांवों में स्थानीय लोगों के विरोध और भारी राजनीतिक हलचल के चलते माहौल बेहद गर्मा गया है.
मिली जानकारी के अनुसार, बाड़मेर जिले के रामसर उपखंड क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सीमावर्ती गांव सियाई और केलन का पार में प्रशासन ने इस बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है. इस अभियान के तहत सरकारी चारागाह और अन्य सरकारी भूमियों पर अवैध रूप से बनाई गई मस्जिदों और धार्मिक ढांचों सहित अन्य कच्चे-पक्के निर्माणों को बुलडोजर की मदद से ढहा दिया गया है. कानून-व्यवस्था को बनाए रखने के लिए कार्रवाई के दौरान बड़ी संख्या में पुलिस बल और आरएसी के जवानों को तैनात किया गया था, जिससे बिना किसी बड़े गतिरोध के निर्माणों को हटाया जा सका.
प्रशासन ने पहले ही जारी किए थे नोटिस, स्थानीय लोगों ने उठाए सवालअतिक्रमण हटाने की इस त्वरित कार्रवाई पर स्थानीय ग्रामीणों और निर्माण से जुड़े लोगों ने गंभीर सवाल उठाए हैं. ग्रामीणों का आरोप है कि उन्हें अपने पक्ष को रखने का पर्याप्त समय नहीं दिया गया. वहीं, दूसरी ओर प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि यह पूरी कार्रवाई पूरी तरह से नियमानुसार और वैध है. प्रशासन ने सरकारी जमीन पर अवैध रूप से किए गए इन अतिक्रमणों को स्वतः हटाने के लिए पूर्व में ही संबंधित लोगों को कानूनी नोटिस जारी कर दिए थे. नोटिस की मियाद पूरी होने और अतिक्रमण न हटाए जाने के बाद ही यह अंतिम कदम उठाया गया है.
बॉर्डर पर पहुंचे सांसद उम्मेदाराम और हरीश चौधरी, शुरू हुआ विरोधइस बड़ी ध्वस्तीकरण कार्रवाई की भनक लगते ही बाड़मेर के राजनीतिक गलियारों में उबाल आ गया है. बाड़मेर-जैसलमेर के स्थानीय सांसद उम्मेदाराम बेनीवाल, बायतु से कांग्रेस विधायक हरीश चौधरी, कांग्रेस जिला अध्यक्ष और कई अन्य वरिष्ठ कांग्रेसी नेता तुरंत स्थिति का जायजा लेने के लिए खुद बॉर्डर के इन प्रभावित गांवों में पहुंच गए.
कांग्रेस नेताओं और जनप्रतिनिधियों ने मौके पर पहुंचकर प्रशासन की इस त्वरित कार्रवाई का कड़ा विरोध किया है. नेताओं का कहना है कि सीमावर्ती संवेदनशील इलाकों में इस तरह की कार्रवाई से सामाजिक सौहार्द पर असर पड़ता है और इसके लिए पहले वैकल्पिक रास्तों पर विचार किया जाना चाहिए था. जनप्रतिनिधियों के बॉर्डर पर पहुंचने के बाद से वहां प्रशासनिक अधिकारियों और नेताओं के बीच वार्ता और विरोध का दौर लगातार जारी है.
About the Authorvicky Rathore
Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…और पढ़ें
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