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कभी हैदराबाद की गलियों तक था सीमित, आज दुनिया में मशहूर! जानिए 106 साल पुराने ज़िंदा तिलिस्मात की सफलता का राज

Last Updated:June 30, 2026, 13:25 IST

Health Tips: करीब 106 साल पहले शुरू हुआ ज़िंदा तिलिस्मात आज भी देश-विदेश में अपनी खास पहचान बनाए हुए है. हैदराबाद से शुरू हुआ यह पारंपरिक यूनानी हर्बल फॉर्मूला समय के साथ एक भरोसेमंद नाम बन गया. सर्दी-जुकाम, सिरदर्द, बदन दर्द, हल्की पेट संबंधी समस्याओं और सामान्य असुविधाओं में लोग वर्षों से इसका उपयोग करते आ रहे हैं. पीढ़ी दर पीढ़ी चला आ रहा यह उत्पाद अपने पारंपरिक निर्माण और बहुउपयोगी पहचान के कारण आज भी लोकप्रिय है. स्थानीय स्तर पर शुरू हुआ यह ब्रांड अब वैश्विक बाजार तक अपनी पहुंच बना चुका है. हालांकि किसी भी हर्बल या पारंपरिक औषधि का उपयोग करने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेना उचित रहता है, विशेष रूप से यदि आपको कोई गंभीर बीमारी है.

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हैदराबाद: बदलते दौर में जहां फार्मास्यूटिकल कंपनियाँ हर दिन नई दवाएँ बाजार में उतार रही हैं. वहीं देश में एक ऐसा यूनानी नुस्खा भी है, जो पिछले 106 सालों से बिना अपना फॉर्मूला बदले करोड़ो लोगों का भरोसा बना हुआ है. हम बात कर रहे हैं हैदराबाद की ऐतिहासिक धरोहर ज़िंदा तिलिस्मात की. साल 1920 में हैदराबाद के अंबरपेट में शुरू हुआ यह ब्रांड आज भी यूनानी चिकित्सा पद्धति की सबसे बड़ी मिसाल है.

साद फारुकी बताते हैं कि इस अनोखी और बहुपयोगी दवा की बुनियाद प्रसिद्ध हकीम मोहम्मद मोइज़ुद्दीन फारूकी ने रखी थी. अरबी भाषा में ज़िंदा तिलिस्मात का अर्थ होता है जीवित जादू. दिलचस्प बात यह है कि जब 1920 में हैदराबाद में इन्फ्लूएंजा की महामारी फैली थी. तब इस दवा ने हज़ारों लोगों की जान बचाने में अहम भूमिका निभाई थी. तब से लेकर आज तक, यह ब्रांड हैदराबाद की सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा बन चुका है और 2016 में इसे INTACH हैदराबाद ने हेरिटेज अवार्ड भी दिया है.जानकारी अनुसार ज़िंदा तिलिस्मात पूरी तरह से प्राकृतिक जड़ी-बूटियों पर आधारित एक ओवर-द-काउंटर दवा है. इसके अचूक फॉर्मूले में मुख्य रूप से पाँच तत्व शामिल हैं.नीलगिरी का तेलपुदीने का सत्वकपूरथाइमोलअलसी का तेल

दवा की प्रामाणिकता और पैकेजिंग में कोई बदलाव नहींयह दवा सर्दी, जुकाम, पुरानी खाँसी, सिरदर्द, बदन दर्द और पाचन संबंधी समस्याओं में रामबाण की तरह काम करती है. इसे पानी या चाय में मिलाकर पिया भी जा सकता है और दर्द वाले हिस्से पर मला भी जा सकता है. एक सदी से अधिक का समय बीत जाने के बाद भी इस दवा की प्रामाणिकता और पैकेजिंग में कोई बदलाव नहीं किया गया है. आज भी इसके शीशे पर बना निज़ाम कालीन सिपाही का लोगो इसकी शुद्धता की गारंटी माना जाता है.

लोकल से ग्लोबल बनने का सफर तय करते हुए, ज़िंदा तिलिस्मात आज सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि सऊदी अरब, यूएई सहित पूरे खाड़ी देशों, अमेरिका और अफ्रीका में बड़े पैमाने पर निर्यात की जाती है. बदलते वक्त के साथ कंपनी ने ज़िंदा बाम, टूथ पाउडर और कफ सिरप जैसे नए उत्पाद भी बाजार में उतारे हैं लेकिन मूल लिक्विड दवा का दबदबा आज भी कायम है.

About the AuthorJagriti Dubey

Hi, I am Jagriti Dubey, a media professional with 6 years of experience in social media and content creation. I started my career with an internship at Gbn 24 news channel in 2019 and have worked with many repu…और पढ़ें

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