पाली की बेटी मोनिका सिंह चौहान ने रचा इतिहास! VDO की नौकरी के साथ की तैयारी, हासिल की RAS में 39वीं रैंक

Last Updated:April 21, 2026, 12:01 IST
Pali Hindi News: पाली जिले के बीसलपुर गांव की मोनिका सिंह चौहान ने RAS परीक्षा में 39वीं रैंक हासिल कर बड़ी सफलता प्राप्त की है. वे वर्तमान में लूणी में ग्राम विकास अधिकारी (VDO) के पद पर कार्यरत हैं. इससे पहले 2023 में उनका चयन 651वीं रैंक पर हुआ था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और लक्ष्य को ऊंचा रखा. दिनभर नौकरी और रात में पढ़ाई करते हुए उन्होंने इस बार टॉप-50 में जगह बनाई. खास बात यह है कि उनके दो बड़े भाई पहले ही प्रशासनिक सेवाओं में चयनित हो चुके हैं, जिससे परिवार में सफलता की हैट्रिक पूरी हुई है.
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पाली. कहते हैं कि अगर परिवार एक साथ मिलकर लक्ष्य की ओर बढ़े, तो सफलता कदम चूमती है. पाली जिले के बीसलपुर गांव के रहने वाले चंदन सिंह चौहान के घर में आज जो खुशिया है वह इस बात की गवाह भी है. उनकी बेटी मोनिका सिंह चौहान ने RAS परीक्षा में 39वीं रैंक हासिल कर न केवल अपना सपना पूरा किया, बल्कि अपने परिवार में सफलता की ‘हैट्रिक’ भी पूरी कर ली है. मोनिका के दो बड़े भाई पहले ही प्रशासनिक सेवाओं में चयनित हो चुके हैं. जोधपुर के लाचू कॉलेज से बीएससी करने वाली मोनिका वर्तमान में लूणी में VDO (ग्राम विकास अधिकारी) के पद पर तैनात हैं.
साल 2023 में मोनिका का चयन 651वीं रैंक पर हुआ था, लेकिन लक्ष्य बड़ा था. दिनभर सरकारी सेवा की जिम्मेदारी और रात भर जागकर पढ़ाई करने का नतीजा यह रहा कि इस बार उन्होंने प्रदेश की टॉप-50 की सूची में अपनी जगह बनाई.
पिता बने ‘कोच’ और मां ने संभाला ‘घर का मोर्चा’मोनिका की सफलता के पीछे उनके माता-पिता की कठिन तपस्या है. राज्य बीमा सेवा से अतिरिक्त निदेशक पद से रिटायर्ड पिता चंदन सिंह चौहान ने अपने घर को ही क्लासरूम बना दिया. उन्होंने तीनों बच्चों के लिए खुद अपने हाथों से नोट्स तैयार किए और घर पर ही ‘मॉक इंटरव्यू’ लेकर उनकी झिझक दूर की.
मां का त्याग बनी सफलता की सीढी मां संतोष कंवर ने मोनिका को रसोई और घर के कामों से पूरी तरह दूर रखा. मोनिका जब रात 2 बजे तक पढ़ाई करतीं, तो मां भी साथ जागतीं और उन्हें चाय-मैगी बनाकर खिलातीं ताकि बेटी की एकाग्रता बनी रहे.
एक घर, तीन आरएएस अधिकारीचंदन सिंह चौहान के तीनों बच्चे आज गौरव का प्रतीक हैं:बड़ा बेटा (महेंद्र सिंह): RAS 2021 में चयन, वर्तमान में जोधपुर में श्रम निरीक्षक.छोटा बेटा (ईश्वर सिंह): वर्तमान में देचू (फलोदी) में BDO.बेटी (मोनिका सिंह): अब 39वीं रैंक के साथ बनीं RAS.
सिर्फ लक्ष्य भेदना था उद्देश्य बच्चों की पढ़ाई के लिए पिता ने करीब 4 साल तक जोधपुर के कुड़ी क्षेत्र में एक फ्लैट लेकर ‘अज्ञातवास’ जैसा माहौल बनाया, ताकि शहर के शोर और सामाजिक कार्यक्रमों से दूर रहकर बच्चे सिर्फ लक्ष्य पर ध्यान दे सकें.
इंटरव्यू में पूछे गए सवाल इंटरव्यू के दौरान मोनिका से पूछा गया कि “यदि महिला सरपंच का पति ऑफिस में काम लेकर आए, तो आप क्या करेंगी?” इस पर मोनिका ने बेहद व्यवहारिक जवाब दिया कि उनकी पंचायत में महिला सरपंच खुद जागरूक हैं और बैठकों में हिस्सा लेती हैं. उनके इस स्पष्ट दृष्टिकोण ने बोर्ड को खासा प्रभावित किया.सफलता के लिए शॉर्टकट नहीं, बल्कि अनुशासन और परिवार का विश्वास जरूरी है. अगर अपनों का साथ मिले, तो कोई भी मुकाम नामुमकिन नहीं है.”
मां की ममता और पिता का अनुशासनमोनिका ने बताया कि वह रातभर पढ़ाई करती थीं. उनकी मां संतोष कंवर उनके साथ जागती रहती थीं. कभी रात 1 बजे तो कभी 2 बजे मां उन्हें चाय या मैगी बनाकर खिलाती थीं, ताकि पढ़ाई में मन लगा रहे. मां का एक ही लक्ष्य था, तू बस RAS बन जा, रसोई का काम मैं संभाल लूंगी.पिता चंदन सिंह ने खुद नोट्स तैयार किए. वे बच्चों का इंटरव्यू तक की तैयारी कराते थे. उन्हें संभावित सवालों के लिए तैयार करते थे.
About the AuthorJagriti Dubey
With more than 6 years above of experience in Digital Media Journalism. Currently I am working as a Content Editor at News 18 in Rajasthan Team. Here, I am covering lifestyle, health, beauty, fashion, religion…और पढ़ें
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First Published :
April 21, 2026, 12:01 IST



