भारत-पाक सीमा से सटे जैसलमेर में बम गिरने की खबर से दहशत… फिर सामने आया ऐसा सच जिसने सबको चौंका दिया!

Last Updated:April 24, 2026, 21:24 IST
Blackout And Mock Drill In Rajasthan: भारत पाकिस्तान बार्डर पर अलग ही नजारे दिखे. राजस्थान के जैसलमेर से एक साथ सामने आई तस्वीरों ने लोगों को डरा दिया अलग-अलग जिलों में अचानक सायरन, एयर स्ट्राइक की खबरें, ब्लैकआउट और रेस्क्यू ऑपरेशन जैसे हालात बने. आम लोगों को लगा जैसे कुछ बड़ा हो गया हो, लेकिन असल में ये कुछ और था. कहीं बम गिरने की सूचना दी गई, कहीं होटल में फंसे लोगों को निकाला गया, तो कहीं पूरे शहर को अंधेरे में डुबो दिया गया.

राजस्थान के कई जिलों में अचानक ब्लैकआउट, सायरन से मॉक ड्रिल
जैसलमेर. सरहद के पास बसे जैसलमेर में शाम का माहौल अचानक बदल गया. आम दिनों की तरह चल रही जिंदगी के बीच एकाएक सायरन, भागदौड़ और हलचल ने लोगों को चौंका दिया. कुछ देर के लिए ऐसा लगा जैसे सच में कोई बड़ा खतरा आ गया हो. अलग-अलग जिलों में अचानक सायरन, एयर स्ट्राइक की खबरें, ब्लैकआउट और रेस्क्यू ऑपरेशन जैसे हालात बने. आम लोगों को लगा जैसे कुछ बड़ा हो गया हो, कहीं बम गिरने की सूचना दी गई, कहीं होटल में फंसे लोगों को निकाला गया, तो कहीं पूरे शहर को अंधेरे में डुबो दिया गया.
इंदिरा कॉलोनी में बम गिरने जैसी स्थिति बनाई गई, सिविल डिफेंस के जवान तुरंत एक्टिव हुए और राहत-बचाव शुरू किया. स्काउट के छात्रों को भी मौके पर सिखाया गया कि आपात स्थिति में कैसे काम करना है. वहीं दौसा में पीजी कॉलेज में एयर स्ट्राइक की सूचना पर पूरा प्रशासन दौड़ पड़ा. कलेक्टर सौम्या झा और एसपी सागर राणा तक को सूचना दी गई, हालांकि बाद में साफ हुआ कि ये भी एक अभ्यास का हिस्सा था.
अचानक सायरन, ब्लैकआउट और रेस्क्यू से बना युद्ध जैसा माहौलअजमेर कलेक्ट्रेट में जैसे ही सायरन बजा, आपदा प्रबंधन की टीमें तुरंत हरकत में आ गईं. अलग-अलग एजेंसियां मौके पर पहुंचीं और घायल लोगों को निकालने, अस्पताल पहुंचाने जैसी कार्रवाई की गई. यह पूरा सीन ऐसा था जैसे सच में कोई हमला हुआ हो. इसी तरह जैसलमेर में भी रात 8 बजे के बाद ब्लैकआउट की घोषणा की गई, ताकि यह देखा जा सके कि अंधेरे में प्रशासन और लोग कैसे रिएक्ट करते हैं.
हनुमानगढ़ में भी 8 से 8:30 बजे तक ब्लैकआउट का प्लान था, लेकिन यहां थोड़ी गड़बड़ी दिखी. नगर परिषद की स्ट्रीट लाइटें 8 बजे के बाद भी जलती रहीं और करीब 8:10 बजे जाकर बंद की गईं. इससे साफ हुआ कि सिस्टम में अभी भी सुधार की जरूरत है. वहीं धौलपुर में ब्लैकआउट का असर मिला-जुला रहा. पहले कुछ मिनट अंधेरा रहा, फिर लाइटें दिखीं, फिर दोबारा ब्लैकआउट हुआ. कई लोगों ने कहा कि उन्हें पहले से जानकारी ही नहीं थी, जिससे तैयारी अधूरी लगी.
तैयारी की जांच या चेतावनी? लोगों के मन में सवालइस पूरे मॉक ड्रिल के दौरान एक बात साफ दिखी कि प्रशासन अपनी तैयारी को लेकर गंभीर है, लेकिन हर जगह एक जैसी स्थिति नहीं रही. कहीं व्यवस्था मजबूत दिखी तो कहीं लापरवाही भी नजर आई. लोगों के बीच चर्चा यही रही कि अगर ये असली हमला होता तो क्या हालात संभल पाते? खासकर जहां जानकारी की कमी या देरी दिखी, वहां सवाल और गहरे हो गए.
फिलहाल प्रशासन का कहना है कि इस तरह की मॉक ड्रिल का मकसद ही यही होता है कि कमियां सामने आएं और उन्हें सुधारा जाए. अलग-अलग जिलों में एक साथ इस तरह का अभ्यास यह दिखाता है कि किसी भी आपात स्थिति के लिए सिस्टम तैयार रहने की कोशिश कर रहा है. लेकिन ये भी सच है कि जमीन पर तैयारी जितनी मजबूत होगी, उतना ही भरोसा लोगों में बढ़ेगा.
About the AuthorAnand Pandey
आनंद पाण्डेय वर्तमान में हिंदी (राजस्थान डिजिटल) में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले 5 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाते हुए उन्होंने राजनीति, अपराध और लाइफ…और पढ़ें
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Location :
Jaisalmer,Jaisalmer,Rajasthan
First Published :
April 24, 2026, 21:24 IST



