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आधा रह सकता है उत्पादन, हजारों रोजगार खतरे में! जोधपुर के गाजर बीज किसानों पर टूटा संकट का पहाड़

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किसानों की बढ़ी चिंता: मौसम की मार से जोधपुर में गाजर बीज उद्योग पर खतरा

Last Updated:April 22, 2026, 08:25 IST

Agriculture News: जोधपुर में गाजर बीज उत्पादन गंभीर संकट से गुजर रहा है, जहां झोला रोग और हालिया ओलावृष्टि ने फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया है. करीब 25 हजार हेक्टेयर में फैली खेती पर इसका सीधा असर पड़ा है, जिससे उत्पादन आधा होने की आशंका जताई जा रही है. इस संकट से न केवल किसानों की आय प्रभावित होगी, बल्कि हजारों लोगों के रोजगार पर भी खतरा मंडरा रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया तो यह स्थिति क्षेत्र की कृषि अर्थव्यवस्था को गहरा झटका दे सकती है.

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जोधपुर: जोधपुर जिले में गाजर की खेती, जो खरीफ और रबी सीजन में मिर्ची, कपास और अरण्डी के विकल्प के रूप में तेजी से बढ़ रही है, इस बार गंभीर बीज संकट से जूझ रही है. झोला रोग के प्रकोप और हाल ही में हुई ओलावृष्टि ने बीज उत्पादन को बुरी तरह प्रभावित किया है. हालात ऐसे बन गए हैं कि इस बार बीज उत्पादन में करीब 50 प्रतिशत तक गिरावट की आशंका जताई जा रही है.

जिससे लगभग 5 हजार लोगों के रोजगार पर भी असर पड़ सकता है.मंडोर, तिंवरी और ओसियां समेत जिले के कई इलाकों में करीब 25 हजार हेक्टेयर में गाजर की बुवाई होती है.

25 हजार हेक्टेयर खेती पर संकट: हर साल 450 मीट्रिक टन बीज की जरूरतजोधपुर जिले के मंडोर, तिंवरी और ओसियां सहित कई क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर गाजर की खेती होती है. करीब 25 हजार हेक्टेयर में फैली इस खेती के लिए हर वर्ष लगभग 450 मीट्रिक टन बीज की आवश्यकता रहती है. खास बात यह है कि यहां के अधिकांश किसान अपना बीज खुद तैयार करते हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर ही बीज की आपूर्ति बनी रहती है. लेकिन इस बार झोला रोग के प्रकोप और मौसम की मार ने इस व्यवस्था को हिला दिया है. बीज उत्पादन प्रभावित होने से आने वाले सीजन की बुवाई पर संकट मंडराने लगा है. किसान अब वैकल्पिक व्यवस्था को लेकर चिंतित हैं, क्योंकि बाहरी बाजार से बीज खरीदना महंगा साबित हो सकता है.

बढ़ सकती है लागत: बीज की कमी से बाजार में दाम बढ़ने के आसारबीज उत्पादन में कमी का असर अब बाजार पर भी दिखने की आशंका है.स्थानीय स्तर पर बीज की उपलब्धता घटने से इसकी कीमतों में उछाल आ सकता है, जिससे किसानों की लागत बढ़ेगी. पहले जहां किसान खुद बीज तैयार कर लागत को नियंत्रित रखते थे, वहीं अब उन्हें महंगे दामों पर बीज खरीदना पड़ सकता है. इससे खेती का खर्च बढ़ने के साथ मुनाफा भी प्रभावित होगा. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते बीज की उपलब्धता सुनिश्चित नहीं की गई तो अगली फसल का रकबा भी कम हो सकता है. ऐसे में यह संकट केवल एक सीजन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका असर आने वाले समय में भी देखने को मिल सकता है.

About the AuthorJagriti Dubey

With more than 6 years above of experience in Digital Media Journalism. Currently I am working as a Content Editor at News 18 in Rajasthan Team. Here, I am covering lifestyle, health, beauty, fashion, religion…और पढ़ें

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Location :

Jodhpur,Rajasthan

First Published :

April 22, 2026, 08:25 IST

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