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Last Updated:December 17, 2025, 22:28 IST
Success Story : गुनसारा गांव के विजय सिंह ने दाहिना हाथ खोने के बावजूद 6वीं बी नेशनल पैरा शूटिंग चैंपियनशिप 2025 में नई दिल्ली में गोल्ड और ब्रॉन्ज मेडल जीतकर भरतपुर का नाम रोशन किया. यह प्रतियोगिता नई दिल्ली स्थित डॉ. करनी सिंह शूटिंग रेंज में आयोजित की गई थी, जहां देशभर से आए शीर्ष पैरा निशानेबाजों ने हिस्सा लिया.
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भरतपुर. भरतपुर जिले के गुनसारा गांव के रहने वाले पैरा शूटर विजय सिंह ने कठिन परिस्थितियों को पीछे छोड़ते हुए एक ऐसी मिसाल कायम की है, जो न केवल युवाओं बल्कि पूरे समाज के लिए प्रेरणास्रोत बन गई है. एक दर्दनाक सरकारी वाहन दुर्घटना में दाहिना हाथ गंवाने के बावजूद विजय सिंह ने हालात के आगे घुटने नहीं टेके, बल्कि अपनी कमजोरी को ही अपनी ताकत बना लिया. लगातार संघर्ष, अनुशासन और अटूट हौसले के दम पर उन्होंने 6वीं बी नेशनल पैरा शूटिंग चैंपियनशिप 2025 में शानदार प्रदर्शन करते हुए गोल्ड और ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किए.
यह प्रतियोगिता नई दिल्ली स्थित डॉ. करनी सिंह शूटिंग रेंज में आयोजित की गई थी, जहां देशभर से आए शीर्ष पैरा निशानेबाजों ने हिस्सा लिया. विजय सिंह की यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि उन्होंने दोनों पदक केवल अपने बाएं हाथ के सहारे जीते. दाहिना हाथ न होने के बावजूद उन्होंने निशानेबाजी जैसे कठिन खेल में सटीकता और धैर्य का बेहतरीन प्रदर्शन किया. उनका यह कारनामा इस बात का प्रमाण है कि सच्ची लगन, कड़ी मेहनत और मजबूत इच्छाशक्ति के सामने कोई भी बाधा बड़ी नहीं होती.
दुर्घटना के बाद नहीं मानी हारदुर्घटना के बाद जीवन में आए बड़े बदलावों के बावजूद विजय सिंह ने खुद को कभी कमजोर नहीं माना. शुरुआती दौर में शारीरिक और मानसिक चुनौतियां जरूर आईं, लेकिन उन्होंने हार मानने के बजाय खेल को ही अपना सहारा बनाया. नियमित अभ्यास, कोचिंग और परिवार के सहयोग से उन्होंने खुद को राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं के लिए तैयार किया. उनका आत्मविश्वास और निरंतर प्रयास ही उनकी सफलता की सबसे बड़ी वजह बने.
गांव और जिले में खुशी का माहौलविजय सिंह की इस ऐतिहासिक सफलता से गुनसारा गांव ही नहीं बल्कि पूरा भरतपुर जिला गौरवान्वित महसूस कर रहा है. गांव में जैसे ही उनकी जीत की खबर पहुंची, खुशी का माहौल बन गया और लोगों ने उन्हें बधाइयां दीं. विजय सिंह ने यह साबित कर दिया है कि सीमित संसाधन और शारीरिक कमी भी सफलता की राह में रुकावट नहीं बन सकती. उनकी यह उपलब्धि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मजबूत संदेश है कि हालात चाहे कितने भी मुश्किल क्यों न हों, अगर हौसला बुलंद हो तो हर सपना पूरा किया जा सकता है. विजय सिंह की सफलता जिले के युवाओं और दिव्यांग खिलाड़ियों को आगे बढ़ने की नई प्रेरणा दे रही है.
About the AuthorAnand Pandey
नाम है आनंद पाण्डेय. सिद्धार्थनगर की मिट्टी में पले-बढ़े. पढ़ाई-लिखाई की नींव जवाहर नवोदय विद्यालय में रखी, फिर लखनऊ में आकर हिंदी और पॉलीटिकल साइंस में ग्रेजुएशन किया. लेकिन ज्ञान की भूख यहीं शांत नहीं हुई. कल…और पढ़ें
Location :
Bharatpur,Rajasthan
First Published :
December 17, 2025, 22:28 IST
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हादसे के बाद भी नहीं मानी हार, एक हाथ से निशाना साधकर विजय बने नेशनल चैंपियन



