हैदराबाद: कृषि केंद्र में वर्मीकम्पोस्ट से टिकाऊ खेती व रोजगार

Last Updated:October 21, 2025, 16:22 IST
हैदराबाद के कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) में शुरू की गई वर्मीकम्पोस्ट इकाई और सरकार के स्पेशल अभियान 5.0 के तहत चल रही यह पहल ग्रामीण भारत में टिकाऊ खेती, स्वच्छता और ग्रामीण युवाओं के लिए स्वरोजगार के नए अवसरों को बढ़ावा दे रही है. यह इकाई न सिर्फ जैविक खाद उत्पादन का केंद्र बनेगी, बल्कि किसानों और युवाओं को प्रशिक्षण देकर उन्हें रासायनिक खादों के विकल्प और मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने के वैज्ञानिक तरीकों से भी जोड़ेगी.
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हैदराबाद. कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) ने ग्रामीण क्षेत्र में कृषि को और अधिक टिकाऊ एवं लाभप्रद बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है. केंद्र में एक नई और आधुनिक वर्मीकम्पोस्ट निर्माण इकाई की शुरुआत की गई है. इस इकाई का उद्घाटन डॉ. विनोद कुमार सिंह द्वारा किया गया. यह पहल सरकार द्वारा चलाए जा रहे स्पेशल अभियान 5.0 के अंतर्गत एक ठोस प्रयास के रूप में देखी जा रही है. यह अभियान, जो 31 अक्टूबर 2025 तक चलेगा, मुख्य रूप से स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने पर केंद्रित है.
इस नई इकाई का उद्देश्य सिर्फ खाद का उत्पादन करना नहीं है, बल्कि यहां के किसानों, ग्रामीण युवाओं और कृषि कार्यकर्ताओं को जैविक खेती के गुर सिखाना भी है. इस नई इकाई को एक लर्निंग हब के रूप में विकसित किया गया है. अब यहां किसानों को वैज्ञानिक तरीकों से वर्मीकम्पोस्ट तैयार करने का प्रशिक्षण दिया जाएगा, केवीके के वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों द्वारा किसानों को केंचुओं की उपयुक्त प्रजातियों का चयन, उनका रख-रखाव, खाद बनाने की संपूर्ण प्रक्रिया, और उसे खेतों में प्रयोग करने के तरीके व्यावहारिक रूप से सिखाए जाएंगे.
इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य किसानों को मिट्टी की सेहत सुधारने के तरीकों से अवगत कराना है. रासायनिक खादों के निरंतर उपयोग से मिट्टी की उर्वरता में गिरावट आ रही है, जिसका प्रतिकूल प्रभाव फसलों की पैदावार और गुणवत्ता पर पड़ता है. वर्मीकम्पोस्ट एक प्राकृतिक और किफायती विकल्प है, जो न केवल मिट्टी को पोषण प्रदान करता है, बल्कि उसकी संरचना को भी बेहतर बनाता है. इस इकाई के माध्यम से किसानों को रासायनिक खादों के उपयोग में कमी लाने और जैविक खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा.
युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर
यह इकाई केवल किसानों के लिए ही नहीं, बल्कि गांव के युवाओं के लिए भी एक बेहतरीन अवसर लेकर आई है. युवा वर्मीकम्पोस्ट निर्माण का प्रशिक्षण प्राप्त कर न केवल अपने परिवार की भूमि पर इसका उपयोग कर सकते हैं, बल्कि इसे एक छोटे व्यवसाय के रूप में भी आरंभ कर सकते हैं. गांव में ही खाद तैयार कर उसे बेचने से उन्हें आय का एक नया स्रोत प्राप्त होगा, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी.
कृषि विज्ञान केंद्र की यह नई वर्मीकम्पोस्ट इकाई और स्पेशल अभियान 5.0 का संयुक्त प्रयास गाँव में एक नई कृषि क्रांति लाने का वादा करता है. यह पहल स्वच्छता को केवल सफाई तक सीमित न रखते हुए उसे पर्यावरणीय जागरूकता और टिकाऊ कृषि से जोड़ती है. इससे न केवल किसानों की आय में वृद्धि होगी, बल्कि हमारी भूमि भी अधिक स्वस्थ बनेगी और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक बेहतर पर्यावरण सुनिश्चित किया जा सकेगा.
Hello I am Monali, born and brought up in Jaipur. Working in media industry from last 9 years as an News presenter cum news editor. Came so far worked with media houses like First India News, Etv Bharat and NEW…और पढ़ें
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Location :
Hyderabad,Telangana
First Published :
October 21, 2025, 16:22 IST
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केवीके ने ग्रामीण क्षेत्र में कृषि को अधिक टिकाऊ बनाने की दिशा में उठाया कदम



