Solar energy series: सौर ऊर्जा-5: क्या सोलर और खंभे वाली बिजली में अंतर होता है, सौर ऊर्जा से ज्यादा लंबे चलते हैं कूलर-पंखे?

Solar energy Series 5th story:भारत में बिजली की मांग इतनी बढ़ गई है कि गांव और शहरों में 24 घंटे इसकी सप्लाई कर पाना मुश्किल है. यही वजह है कि लोग बिजली कटौती की समस्याएं आए दिन झेलते हैं. हालांकि बिजली के नए विकल्पों को अपनाने के लिए सरकार भी काफी जोर दे रही है और लोगों को अपने घरों की छत पर सोलर पैनल लगवाने की सलाह दे रही है. इसके लिए मोटी सब्सिडी भी दी जा रही है.
लेकिन देखा जा रहा है कि जब भी सोलर पैनल लगवाने की सलाह दी जाती है तो लोगों का यही सवाल होता है कि इससे क्या फायदा होगा? क्या सोलर पैनल से बिजली लगवाना सस्ता है? क्या इससे आने वाली बिजली ज्यादा अच्छी होती है? क्या सोलर पैनल से पैदा बिजली से घर के फ्रिज, कूलर, पंखे, टीवी ज्यादा लंबे समय तक चलते हैं?
तो आइए hindi की ‘सौर ऊर्जा, सोलर पैनल’… सीरीज की पांचवी स्टोरी में आज जानते हैं इन सभी सवालों के जवाब काउंसिल ऑन एनर्जी एनवायरनमेंट एंड वॉटर की प्रोग्राम लीड भावना त्यागी से…
क्या रूफटॉप सोलर सिस्टम और डिस्कॉम (DISCOM) की बिजली की गुणवत्ता में अंतर होता है?
भावना त्यागी कहती हैं, ‘नहीं, सोलर से उत्पन्न बिजली और डिस्कॉम (विद्युत वितरण कंपनी) से मिलने वाली बिजली की गुणवत्ता में कोई अंतर नहीं होता है. रूफटॉप सोलर सिस्टम के मामले में, इसमें लगा इनवर्टर ग्रिड के वोल्टेज और फ्रीक्वेंसी मानक से मिलान करके सोलर डीसी (DC) आउटपुट को एसी (AC) बिजली में बदल देता है, ताकि इसे एसी बिजली से चलने वाले सभी उपकरणों के लिए इस्तेमाल किया जा सके.’
क्या सोलर एनर्जी से बनने वाली बिजली को स्टोर किया जा सकता है?
भावना त्यागी कहती हैं, ‘हां, सोलर एनर्जी से बनने वाली बिजली को स्टोर किया जा सकता है. इसका सबसे आम तरीका है बैटरी सिस्टम का इस्तेमाल करना. ये बैटरियां दिन के समय बनने वाली अतिरिक्त बिजली को स्टोर कर लेती हैं और तब सप्लाई करती हैं जब धूप नहीं होती, जैसे कि रात के समय या बादलों वाले मौसम में.
यह एक तरह से उसी तरह काम करता है जैसे आप ग्रिड से आने वाली बिजली के स्टोरेज के लिए इन्वर्टर का इस्तेमाल करते हैं. सोलर एनर्जी का इस्तेमाल भी आप बैटरी और इन्वर्टर के माध्यम से कर सकते हैं.
कुछ समस्याएं आती हैं?
सोलर और ग्रिड दोनों की बिजली की गुणवत्ता समान हो सकती है लेकिन डिस्कॉम से होने वाली बिजली सप्लाई में अक्सर बिजली कटौती, वोल्टेज कम या ज्यादा होना, बिजली बिल को लेकर अनियमितताएं और फ्लक्चुएशन ज्यादा आम समस्या है. जबकि सोलर पैनल से पैदा होने वाली बिजली में ये चीजें देखने को नहीं मिलतीं. हालांकि ऐसा भी नहीं है कि सोलर पैनल लगवाने के बाद कोई समस्या नहीं होती. कुछ परेशानियां सामने आती भी हैं..
अगर आपके इन्वर्टर या बैटरी की क्वालिटी अच्छी है तो आपको बेहतर और साफ बिजली मिलती है. देखा गया है कि कई मामलों में सोलर से आने वाली बिजली की गुणवत्ता ग्रिड से बेहतर पाई गई है. खासकर वोल्टेज स्थिरता और हार्मोनिक्स के मामले में.
हालांकि घटिया या पुराने इन्वर्टर से हार्मोनिक्स बढ़ सकते हैं, जो आपके घर के उपकरणों (फ्रिज, AC, कंप्यूटर) को नुकसान पहुंचा सकते हैं. घर की बिजली जरूरतों से बहुत ज्यादा सोलर लगाने पर भी ग्रिड में वोल्टेज बढ़ना (Voltage Rise), रिवर्स पावर फ्लो और असंतुलन की समस्या हो सकती है.
घरेलू उपयोग में अच्छे इन्वर्टर वाला रूफटॉप सोलर अक्सर ग्रिड से बेहतर या बराबर गुणवत्ता देता है, खासकर दिन के समय लेकिन पूरी तरह ग्रिड-फ्री (ऑफ-ग्रिड) होने पर बैटरी और इन्वर्टर की क्वालिटी का बेहतर होना जरूरी है. इसके लिए कुछ उपाय करें..
BIS/IS प्रमाणित और अच्छे ब्रांड का इन्वर्टर ही लगवाएं.
इंस्टॉलेशन के बाद पावर क्वालिटी मीटर से जांच करवा लें.
नेट मीटरिंग वाले ऑन-ग्रिड सिस्टम सबसे आम और सुरक्षित विकल्प हैं.
इसी सीरीज की अगली स्टोरी में जानेंगे..
‘हमें गर्मियों में तो भरपूर धूप मिलती है, लेकिन सर्दियों में सोलर पैनल कैसे काम करते हैं? अगर कोई घर पूरी तरह से सोलर पावर (सौर ऊर्जा) पर निर्भर है, तो क्या उसे सर्दियों में भी पर्याप्त बिजली मिल पाएगी?’
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