Rajasthan

जब एसी की जरूरत ही न पड़े, धुएं, गर्मी के बीच कोटा की श्रद्धा ठाकुर ने 200 से ज्यादा पौधों से घर को बनाया सुकून का ठिकाना!

कोटा. शहर के आसमान में कारखानों से निकलता धुआं, सड़कों पर वाहनों की बढ़ती रेलमपेल, विकास की दौड़ में सिमटते जंगल और वायुमंडल की ओजोन परत पर बढ़ता खतर, ये सभी मिलकर शुद्ध हवा को दुर्लभ बनाते जा रहे हैं. पेड़ लगाने के लिए जमीन लगातार कम होती जा रही है और ऐसे में सुकूनभरी सांस लेना भी एक चुनौती बनता जा रहा है. आने वाले समय में हालात और भी विकट होने की आशंका जताई जा रही है. इन्हीं परिस्थितियों के बीच टैरिस गार्डन, यानी छतों पर हरियाली का कल्चर, तेजी से उभर रहा है.

महानगरों की तर्ज पर अब कोटा में भी लोग अपने घरों की छतों और आंगनों में गार्डन विकसित कर रहे हैं. पर्यावरण प्रेमियों का मानना है कि इससे न केवल घर की शोभा बढ़ती है, बल्कि गर्मी से भी काफी हद तक राहत मिलती है. हरियाली से घिरे घरों में तापमान अपेक्षाकृत कम महसूस होता है और किचन गार्डन से ताज़ी सब्जियां भी मिल जाती हैं. कई लोग तो यह भी कहते हैं कि उन्हें घर में एसी की जरूरत ही महसूस नहीं होती.

घर को पूरी तरह हरियाली से ढक दिया

इसी हरित सोच की एक प्रेरक मिसाल हैं कोटा के देवाशीष सिटी में रहने वाली श्रद्धा ठाकुर. उन्होंने अपने घर को पूरी तरह हरियाली से ढक दिया है. श्रद्धा के घर में मनी प्लांट, स्पाइडर प्लांट, जेड प्लांट, पैडिनियम, मोगरा, नीम, क्रिसमस ट्री, पाम, गुलदाउदी, चंपा सहित कई मौसमी और खुशबूदार पौधे लगे हैं. कुल मिलाकर उनके घर में 200 से 300 से अधिक पौधे हैं, जिससे घर का हर कोना हरा-भरा नजर आता है. श्रद्धा बताती हैं कि वे रोजाना सुबह और शाम करीब दो-दो घंटे अपने बगीचे की देखभाल करती हैं. किस पौधे में कौन-सी खाद देनी है, इसकी उन्हें पूरी जानकारी है. घर में इतनी हरियाली होने के कारण उन्होंने एसी का इस्तेमाल लगभग बंद कर दिया है. इतना ही नहीं, वे जन्मदिन या किसी समारोह में गिफ्ट के तौर पर पौधे भेंट करना पसंद करती हैं, ताकि हरियाली का संदेश और आगे बढ़ सके.

श्रद्धा तुलसी की विशेष देखभाल के लिए हल्दी का उपयोग करती हैं, जिससे तुलसी सर्दी से सुरक्षित रहती है और हमेशा हरी-भरी बनी रहती है. उनका मानना है कि पौधों को बनावटी आकार देने या ज्यादा कटाई-छंटाई की जरूरत नहीं होती. वे कहती हैं, “पौधा अपना रूप खुद लेता है, उसे जबरन ढालने की जरूरत नहीं होती.” श्रद्धा पौधों से बातचीत भी करती हैं और उन्हें परिवार के सदस्य की तरह मानती हैं, घरेलू मसालों के उपयोग से वे पौधों को कीटों और बीमारियों से बचाती हैं.

मसालों को पानी में मिलाकर पौधों को देने से न सिर्फ सुरक्षा मिलती है, बल्कि उनकी ग्रोथ भी बेहतर होती है. यदि कभी कोई पौधा टूट जाए, तो वे टूटे हुए हिस्से पर हल्दी लगाकर टेप या पट्टी से बांध देती हैं. उनके अनुभव में वहीं से पौधा दोबारा बढ़ने लगता है और आगे चलकर फूल भी देने लगता है. श्रद्धा ठाकुर की यह पहल सिर्फ एक घर तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे शहर के लिए ग्रीन लिविंग का संदेश है. उनका घर आज न केवल देवाशीष सिटी, बल्कि पूरे कोटा में पर्यावरण संरक्षण और हरित जीवनशैली की एक प्रेरक मिसाल बन चुका है.

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