कीटनाशक का खर्चा जेब पर पड़ रहा है भारी, तो सिर्फ 10 पत्तियों से तैयार करें दशपर्णी अर्क और फिर देखें इसका कमाल

रामपुर: खेती में हर साल सबसे ज्यादा खर्च अगर किसी चीज पर बढ़ रहा है तो वह है कीटनाशक. ऊपर से कई बार दवा छिड़कने के बाद भी कीट खत्म नहीं होते. ऐसे में दवा पर बढ़ते खर्च से परेशान होकर कई किसान अब फिर से पुराने देसी तरीके अपना रहे हैं. इन्हीं में से एक है दशपर्णी अर्क. यह 10 तरह की पत्तियों, गोबर और गौमूत्र से तैयार होने वाला जैविक घोल है. इसे किसान घर पर ही कम खर्च में बना सकते हैं. सही तरीके से तैयार किया जाए तो यह फसल पर लगने वाले कई तरह के रस चूसने वाले और पत्तियां खाने वाले कीटों को नियंत्रित करने में मदद करता है. साथ ही, बार-बार महंगी दवाइयों पर निर्भरता भी कम हो सकती है.
दशपर्णी अर्क बनाने का तरीका
दशपर्णी अर्क बनाने के लिए सबसे पहले 200 लीटर क्षमता वाला प्लास्टिक का ड्रम लें. उसमें 200 लीटर पानी भरें. अब इसमें 10 लीटर गौमूत्र और 2 किलो देशी गाय का ताजा गोबर अच्छी तरह मिला दें.
इसके बाद इसमें 5 किलो नीम की पत्तियां डालें. फिर 2-2 किलो सीताफल, बेल, अमरूद, बेर, पपीता, कनेर, आम और देशी करेला की पत्तियां मिलाएं. कुल मिलाकर 10 तरह की पत्तियों का उपयोग किया जाता है. आखिर में आधा से एक किलो तंबाकू और करीब आधा किलो चटनी, लहसुन और मिर्च का पेस्ट मिलाकर ड्रम को अच्छी तरह चला दें.
रख-रखाव का तरीका
जिस ड्रम में यह घोल रखा है, उसे हमेशा छायादार जगह पर रखें. उस पर सीधी धूप या बारिश का पानी नहीं पड़ना चाहिए. हर दिन या एक दिन छोड़कर लकड़ी से घोल को हिलाते रहें. करीब 40 दिन बाद यह अच्छी तरह तैयार हो जाता है. इसके बाद इसे कपड़े से छान लें और साफ बर्तन में भर लें. अब खेत के हिसाब से छिड़काव के लिए 200 लीटर पानी में 5 से 6 लीटर दशपर्णी अर्क मिलाएं. आमतौर पर एक एकड़ खेत में 180 से 200 लीटर घोल का छिड़काव पर्याप्त माना जाता है. यदि फसल घनी हो या बड़े पेड़ हों तो पानी की मात्रा बढ़ाई जा सकती है.
कैसे करें इस्तेमाल
अब तैयार दशपर्णी अर्क का इस्तेमाल लगभग सभी फसलों में किया जा सकता है. जैसे धान, गेहूं, मक्का, गन्ना, सरसों, सोयाबीन, मूंग, उड़द, चना, अरहर, सब्जियां, मिर्च, टमाटर, बैंगन, भिंडी, लौकी, खीरा, करेला, फूलों की खेती और फलदार पेड़ों में भी इसका छिड़काव किया जाता है.
छिड़काव करने का सबसे अच्छा समय सुबह 7 से 10 बजे या शाम 4 से 6 बजे का होता है. तेज धूप में छिड़काव नहीं करना चाहिए. बारिश होने की संभावना हो तो स्प्रे टाल दें. फसल में कीट दिखाई देने पर या रोकथाम के लिए 10 से 15 दिन के अंतराल पर इसका छिड़काव किया जा सकता है.
छाना हुआ दशपर्णी अर्क ढक्कन बंद प्लास्टिक के ड्रम या कैन में, ठंडी और छायादार जगह पर रखा जाए तो सामान्य तौर पर 3 से 6 महीने तक उपयोग योग्य रह सकता है. बीच-बीच में बर्तन को हल्का हिलाते रहें और उसमें पानी न जाने दें.
सस्ता और असरदार
उप कृषि निदेशक राम किशन सिंह के मुताबिक, दशपर्णी अर्क बनाने की लागत बाजार की दवाइयों के मुकाबले काफी कम होती है. इससे खेत में मित्र कीटों पर कम असर पड़ता है, मिट्टी की सेहत बेहतर बनी रहती है और रासायनिक कीटनाशकों पर निर्भरता घटाने में मदद मिलती है. नियमित और सही समय पर उपयोग करने से फसल पर कीटों का दबाव कम किया जा सकता है. हालांकि, यदि कीटों का प्रकोप बहुत ज्यादा हो जाए तो कृषि विशेषज्ञ की सलाह लेकर समेकित कीट प्रबंधन (IPM) अपनाना बेहतर रहता है.



