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100 रुपये की बचत से बदली 2000 महिलाओं की किस्मत, 35 साल से मेवात में जल रही उम्मीद की लौ

Last Updated:June 17, 2026, 12:44 IST

Alwar Sakhi Samiti: खैरथल-तिजारा के किशनगढ़ बास में ‘सखी समिति’ पिछले 35 वर्षों से करीब 2,000 गरीब और मेवात क्षेत्र की महिलाओं को आत्मनिर्भर बना रही है. 200 स्वयं सहायता समूहों के जरिए महिलाओं को 100 से 500 रुपये की मासिक बचत सिखाई जा रही है. संस्था महिलाओं को बैंक से आसान ऋण दिलाकर सिलाई, ब्यूटी पार्लर, किराना दुकान जैसे स्वरोजगार और बेटियों की शादी के लिए आर्थिक मदद उपलब्ध करा रही है, जिससे ग्रामीण परिवारों का सामाजिक उत्थान हो रहा है.

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खैरथल-तिजारा/अलवर. राजस्थान के नवगठित खैरथल-तिजारा जिले के किशनगढ़ बास इलाके से महिला सशक्तिकरण की एक बेहद खूबसूरत और प्रेरणादायक तस्वीर सामने आई है. यहाँ पिछले साढ़े तीन दशकों से संचालित ‘सखी समिति’ गरीब, बेसहारा और जरूरतमंद महिलाओं के लिए एक मजबूत लाठी और सहारा साबित हो रही है. यह संस्था ग्रामीण अंचल की महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों (SHG) के धागे में पिरोकर उन्हें न सिर्फ संगठित कर रही है, बल्कि उन्हें स्वरोजगार और आर्थिक आजादी का नया मार्ग भी दिखा रही है. करीब 35 वर्षों के लंबे संघर्ष और सेवाकाल के दौरान इस संस्था ने हजारों परिवारों के चूल्हे को बुझने से बचाया है. वर्तमान आंकड़ों की बात करें तो इस सखी समिति के बैनर तले 200 से अधिक स्वयं सहायता समूह एक्टिव हैं, जिनसे लगभग 2,000 ग्रामीण और मेवात क्षेत्र की महिलाएं सीधे तौर पर जुड़ी हुई हैं.

सखी समिति की कर्मठ सदस्य सीता देवी ने अपने अनुभवों की इनसाइड स्टोरी साझा करते हुए बताया कि जब वह महज 12वीं कक्षा की छात्रा थीं, तभी से वह किशनगढ़ बास की इस संस्था के साथ जुड़ गई थीं. उन्होंने महिलाओं के हक की लड़ाई और उनके उत्थान के लिए काम करते-करते ही अपनी ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की. सीता देवी को इस संस्था में सेवा देते हुए आज पूरे 32 साल का लंबा वक्त बीत चुका है. उन्होंने बताया कि शहर की चकाचौंध से दूर सुदूर ग्रामीण अंचलों और मेवात की घनी बस्तियों में रहने वाली रूढ़िवादी महिलाओं को समझाना और उन्हें आत्मनिर्भरता का पाठ पढ़ाना एक बड़ी चुनौती थी. समिति ने इन महिलाओं को सबसे पहले घरेलू खर्चों में से छोटी-छोटी किश्तों में पैसों की बचत करने का हुनर सिखाया, जिसने आज एक बड़े आंदोलन का रूप ले लिया है.

चूड़ी की दुकान से लेकर ब्यूटी पार्लर तक, बैंक लोन दिलाकर संवार दी जिंदगीसंस्था ने केवल कागजों पर नहीं बल्कि ग्राउंड जीरो पर काम करते हुए सैकड़ों महिलाओं को बैंकों से आसान किश्तों पर ऋण (Loan) मुहैया कराया है. समिति की इस आर्थिक मदद की बदौलत मेवात की कई गरीब महिलाओं ने चूड़ी की दुकानें, किराना स्टोर, सिलाई केंद्र और ब्यूटी पार्लर जैसे स्वरोजगार शुरू किए हैं. आज ये महिलाएं किसी के आगे हाथ फैलाने के बजाय सम्मान के साथ अपने पूरे परिवार का पालन-पोषण कर रही हैं. इतना ही नहीं, जब गरीब परिवारों के सामने अपनी बेटियों के हाथ पीले करने या विवाह का संकट खड़ा हुआ, तो इस समिति ने आगे बढ़कर आसान पुनर्भुगतान अवधि और बेहद लचीली किश्तों पर लोन उपलब्ध कराया ताकि गरीब माता-पिता के सिर पर कर्ज का भारी बोझ न आए. घर बैठे आटा चक्की या सिलाई मशीन जैसी छोटी मशीनें लगाने के लिए भी संस्था वित्तीय बैकअप दे रही है.

100 रुपये की बचत से खड़ा हुआ करोड़ों का हौसला, मासिक बैठकों से मिल रही ताकतसमिति की कोषाध्यक्ष अनीता ने न्यूज़18 को बताया कि उनकी संस्था का मुख्य फोकस उन दिहाड़ी मजदूर और गरीब महिलाओं पर है जो रोज कमाती हैं और रोज खाती हैं. ऐसी कामकाजी महिलाओं को स्वयं सहायता समूह से जोड़कर उनमें बचत की एक अच्छी आदत विकसित की जा रही है. समूह की सदस्य महिलाएं अपनी रोजाना की आय के अनुसार हर 15 दिन या एक महीने में 100 रुपये से लेकर 500 रुपये तक की छोटी राशि गुल्लक के रूप में जमा करती हैं. समिति द्वारा हर महीने एक नियमित बैठक बुलाई जाती है, जिसमें ऋण लेने वाली महिलाएं अपनी मासिक किश्तें जमा करती हैं. इसके बाद इस जमा पूंजी को फिर से किसी दूसरी जरूरतमंद महिला को नया बिजनेस शुरू करने या पारिवारिक इमरजेंसी के लिए दे दिया जाता है. इस पारदर्शी और जमीनी व्यवस्था से ग्रामीण महिलाओं को साहूकारों के चंगुल से हमेशा के लिए आजादी मिल गई है.

About the Authorvicky Rathore

Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…और पढ़ें

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