मौसम का असर सिर्फ शरीर नहीं, दिमाग पर भी पड़ता है! जानिए क्यों बढ़ने लगता है गुस्सा और उदासी

दिल्ली: बारिश, तेज धूप, उमस या अचानक बदलता मौसम इन दिनों कई लोग बिना किसी बड़ी वजह के चिड़चिड़ापन, आलस, उदासी या काम में मन न लगने जैसी परेशानियां महसूस करते हैं. कई बार लोग इसे सामान्य मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन अगर ये बदलाव लंबे समय तक बने रहे तो मानसिक स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है. लाइफस्माइल की काउंसलिंग साइकोलॉजिस्ट रिया के मुताबिक, मौसम में बदलाव का असर सिर्फ शरीर पर ही नहीं, बल्कि हमारे मूड और सोच पर भी पड़ता है. आइये जानते हैं इसके क्या हैं उपाय.
जानें क्या है मूड स्विंग
मूड स्विंग यानी कुछ समय के लिए भावनाओं में अचानक बदलाव आना. कभी बिना वजह खुशी महसूस होना तो कभी उदासी, गुस्सा, चिड़चिड़ापन या किसी भी काम में मन न लगना. कई बार इंसान खुद भी समझ नहीं पाता कि आखिर ऐसा क्यों हो रहा है.
जानें मौसम का मूड से क्या है कनेक्शन
एक्सपर्ट रिया बताती हैं कि हमारे दिमाग में कई तरह के हार्मोन बनते हैं, जो हमारी भावनाओं को नियंत्रित करते हैं. जब मौसम बार-बार बदलता है, धूप कम होती है या अंधेरा ज्यादा रहता है, तो शरीर में सेरोटोनिन मतलब हैप्पी हार्मोनका लेवल प्रभावित हो सकता है. इसका असर हमारे मूड पर दिखने लगता है. इसी वजह से आलस, थकान, उदासी और मोटिवेशन की कमी महसूस हो सकती है.
रोज की दिनचर्या बिगड़ने से भी पड़ता है असर
बारिश या खराब मौसम की वजह से लोग घरों में ज्यादा समय बिताते हैं. बाहर निकलना कम हो जाता है, ऑफिस, वॉक या दूसरी गतिविधियां प्रभावित होती हैं. जब रोज की दिनचर्या बदलती है तो उसका असर भी मानसिक स्थिति पर पड़ता है और मूड बार-बार बदलने लगता है.
लोगों से कम मिलना भी बन सकता है वजह
अगर मौसम की वजह से दोस्तों, परिवार या सहकर्मियों से मिलना-जुलना कम हो जाए तो अकेलापन बढ़ सकता है. सोशल इंटरैक्शन कम होने से भी कई लोगों में उदासी, तनाव और चिड़चिड़ापन देखने को मिलता है.
जानें कब न करें नजरअंदाज
अगर लगातार दो हफ्ते या उससे ज्यादा समय तक उदासी बनी रहे, छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा आए, नींद का समय बिगड़ जाए, किसी काम में मन न लगे या रोजमर्रा के काम प्रभावित होने लगे तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए. ऐसे मामलों में मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है.
मूड बेहतर रखने के आसान तरीके
एक्सपर्ट के मुताबिक, हर दिन 10 से 20 मिनट तक दिन की रोशनी में समय बिताने की कोशिश करें. बालकनी, छत या खुले स्थान पर बैठकर कुछ समय नेचर के साथ बिताएं. इसके अलावा रोजाना गहरी सांस लेने की एक्सरसाइज या बॉक्स ब्रीदिंग करें, अपनी नींद का समय तय रखें और संतुलित भोजन लें. ये छोटी-छोटी आदतें मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में मदद कर सकती हैं.



