Rajasthan

धौलपुर का वो महल जहां कभी नहीं पहुंच सका शाहजहां! 400 साल पुराना तालाब-ए-शाही फिर चर्चा में

Last Updated:May 12, 2026, 21:57 IST

Dhaulpur News: धौलपुर का तालाब-ए-शाही इतिहास, प्राकृतिक सुंदरता और मुगलकालीन स्थापत्य कला का अद्भुत उदाहरण माना जाता है. जहांगीर काल में बने इस ऐतिहासिक महल और झील का संबंध शाहजहां से भी जुड़ा हुआ है, जबकि आज भी यहां की शाम और प्रवासी पक्षी लोगों को आकर्षित करते हैं.

धौलपुर. राजस्थान के धौलपुर जिले के बाड़ी उपखंड में स्थित तालाब-ए-शाही इतिहास, प्राकृतिक सुंदरता और स्थापत्य कला का अनोखा संगम माना जाता है. लाल और सफेद बलुआ पत्थरों से बना यह ऐतिहासिक महल करीब 350 से 400 साल पुराना बताया जाता है. मुगल काल में वर्ष 1617 में सम्राट जहांगीर ने अपने मनसबदार सालेह खान के जरिए इसका निर्माण करवाया था. अपनी खूबसूरत झील और ऐतिहासिक महल की वजह से यह स्थान आज भी लोगों को खास तौर पर आकर्षित करता है.

तालाब-ए-शाही को खानपुर महल के नाम से भी जाना जाता है. यह जगह केवल एक महल नहीं, बल्कि प्राकृतिक सौंदर्य का अद्भुत खजाना मानी जाती है. चारों ओर फैली हरियाली, शांत वातावरण और झील का मनमोहक दृश्य यहां आने वाले पर्यटकों को अलग अनुभव देता है. महल की छत से दिखाई देने वाला झील का नजारा, पक्षियों की आवाज और आसपास की प्राकृतिक सुंदरता लोगों को मंत्रमुग्ध कर देती है.

इतिहास और स्थापत्य कला का अनोखा मेलइतिहासकार अरविंद शर्मा बताते हैं कि इस ऐतिहासिक इमारत को देखकर ऐसा महसूस होता है जैसे यहां प्रकृति और स्थापत्य कला का अद्भुत मेल दिखाई देता है. उन्होंने बताया कि धौलपुर रियासत के महाराज राणा उदयभान सिंह ने अपने शासनकाल में इस महल का जीर्णोद्धार करवाया था. उस दौर में यहां आने वाले यूरोपीय मेहमानों और पर्यटकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए महल में यूरोपीय शैली की वास्तुकला का भी प्रयोग किया गया था.

इतिहासकार अरविंद शर्मा का कहना है कि तालाब-ए-शाही को देखकर हर इतिहास प्रेमी भावुक हो उठता है. उन्होंने बताया कि एक शाम जब वह इस महल से गुजर रहे थे, तब उन्हें ऐसा लगा मानो पत्थरों पर इतिहास की कोई शायरी लिखी हो. शाम के समय तालाब-ए-शाही की खूबसूरती और भी ज्यादा निखर जाती है. सिंदूरी आसमान, झील का शांत पानी और महल की भव्यता लोगों को पुराने दौर की याद दिला देती है.

शाहजहां के लिए बनवाया गया था महलइतिहासकार अरविंद शर्मा बताते हैं कि मुगल सम्राट जहांगीर ने अपने पुत्र शाहजहां के आराम और आनंद के लिए इस महल का निर्माण करवाया था, लेकिन राजनीतिक परिस्थितियों के कारण शाहजहां यहां कभी नहीं आ सका. इसके बावजूद यह महल आज भी मुगलकालीन वैभव और धौलपुर की ऐतिहासिक पहचान को जीवित रखे हुए है.

वर्तमान समय में तालाब-ए-शाही झील बाड़ी उपखंड के कई गांवों को पानी की आपूर्ति भी करती है. सर्दियों के मौसम में यहां बड़ी संख्या में प्रवासी पक्षी पहुंचते हैं, जिनमें पिंटेल, कॉमन पोचार्ड और कॉमन टील प्रमुख हैं. विदेशी पक्षियों की चहचहाहट और झील का प्राकृतिक सौंदर्य इस स्थान को और भी खास बना देता है. आज इस ऐतिहासिक परिसर में बाड़ी उपखंड का पुलिस थाना भी संचालित हो रहा है.

इतिहासकार अरविंद शर्मा तालाब-ए-शाही पर लिखी अपनी पंक्तियों में कहते हैं. पत्थर पर लिखी मानो शायर की रुबाई है, ये खूबसूरत तालाब तालाब-ए-शाही है. शाहजहां को अब तक यह याद करता है, एक बार उसके आने की फरियाद करता है. शाम यहां सिंदूरी, रात का आलम शाही है, यह मस्त-मस्त तालाब तालाब-ए-शाही है.

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Dhaulpur,Dhaulpur,Rajasthan

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