200 सालों से भीलवाड़ा के इस मंदिर में निभाई जा रही है परंपरा, जानें भक्त क्यों ले जाते हैं नरसिंह भगवान के केश

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भीलवाड़ा में 200 साल पुरानी परंपरा, जानें भक्त क्यों ले जाते हैं नरसिंह के केश
Last Updated:May 01, 2026, 06:47 IST
Bhilwara Narsingh Temple: भीलवाड़ा की पुरानी धान मंडी स्थित नरसिंह भगवान का प्राचीन मंदिर अपनी अनोखी परंपरा के लिए प्रसिद्ध है. यहां करीब 200 वर्षों से नरसिंह लीला का आयोजन होता आ रहा है, जिसमें हजारों श्रद्धालु शामिल होते हैं. नरसिंह जयंती पर विशेष पूजा और सिंगार के बाद लीला का मंचन किया जाता है. मान्यता है कि भगवान के केश घर ले जाने से सुख समृद्धि और धन की वृद्धि होती है. इसी आस्था के चलते लीला के दौरान भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है.
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भीलवाड़ा. राजस्थान के भीलवाड़ा शहर स्थित पुरानी धान मंडी में नरसिंह भगवान का प्राचीन मंदिर है जो अपनी अनूठी मान्यता को लेकर श्रद्धालुओं के बीच जाना जाता है. यह मंदिर भीलवाड़ा का इकलौता मंदिर है और यह सबसे प्राचीन मंदिर है. इतना ही नहीं, इस मंदिर में 200 सालों से यह परंपरा चली आ रही है. पुराने भीलवाड़ा सहित आस-पास के गांव और कॉलोनियों से बड़ी संख्या में लोग नरसिह लीला देखने के लिए मंदिर पहुंचते हैं.
नरसिंह भगवान के सिर के बल लेकर श्रद्धालु अपने घर जाते हैं, जिससे घर में सुख समृद्धि के साथ धन की आवक होती हैं. नरसिंह लीला को देखने के लिए भक्तों की भारी भीड़ जमा हो जाती है. एक तरह से यहां मेले जैसा माहौल बन जाता है. इतना ही नहीं इस लीला की सबसे बडी खास बात यह है कि जैसे ही भगवान नरसिंह खंभ फाड़कर बाहर अवतार लेते हैं तो सभी भक्त भगवान नरसिंह के केस यानी कि बाल लेने की कोशिश करते हैं. भगवान नरसिंह के केस घर ले जाने से घर परिवार में बरकत होती है.
200 वर्षो से चली आ रही है परंपरा
आयोजक ललित तोषनीवाल ने बताया कि भीलवाड़ा शहर की पुरानी धान मंडी में स्थित नरसिंह भगवान मंदिर में नरसिंह भगवान लीला कार्यक्रम का आयोजन किया गया . विगत 200 वर्षों से इस लीला को यहां पर आयोजित किया जा रहा है. नरसिंह जयंती के अवसर पर सुबह से ही मंदिर में भगवान का जलाभिषेक किया गया और विशेष सिंगार किया गया. इस कार्यक्रम में हजारों की तादाद में लोग शामिल होते हैं और इस लीला को देखते हैं. इस लीला के अंतर्गत नरेश पण्डिया नरसिंह भगवान का रूप धारण करते हैं.
जुड़ी है ये खास मान्यता
स्थानीय लोगों का मानना है कि इस लीला के दौरान मान्यता है कि जब भगवान नरसिंह ख़म्भ फाड़कर बाहर निकलते हैं. भक्त उनके बालों को लेने की कोशिश करते हैं. नरसिंह लीला की सबसे खास बात यह है कि नरसिंह भगवान को जो रूप धारण करवाया जाता है, जिसमें नरसिंह भगवान के केश ( बाल ) आशीर्वाद के रूप में भक्त अपने घर पर लेकर जाते हैं. जिस घर में सुख समृद्धि और धन की वर्षा होती है और घर परिवार में बरकत होती है.
About the Authordeep ranjan
दीप रंजन सिंह 2016 से मीडिया में जुड़े हुए हैं. हिंदुस्तान, दैनिक भास्कर, ईटीवी भारत और डेलीहंट में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. 2022 से हिंदी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. एजुकेशन, कृषि, राजनीति, खेल, लाइफस्ट…और पढ़ें
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Location :
Bhilwara,Rajasthan
Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी, राशि-धर्म और शास्त्रों के आधार पर ज्योतिषाचार्य और आचार्यों से बात करके लिखी गई है. किसी भी घटना-दुर्घटना या लाभ-हानि महज संयोग है. ज्योतिषाचार्यों की जानकारी सर्वहित में है. बताई गई किसी भी बात का Local-18 व्यक्तिगत समर्थन नहीं करता है.



