Tips and Tricks: घर के गमलों में लगे पौधों को सर्दी से कैसे बचाएं? अपनाएं ये उपाय

Last Updated:November 07, 2025, 18:10 IST
Tips and Tricks : ठंड का मौसम शुरू होते ही गमलों और किचन गार्डन में लगे पौधों पर कीटों और फफूंद का हमला बढ़ जाता है. मिट्टी की नमी इन कीटों को तेजी से पनपने का मौका देती है. लेकिन चिंता की बात नहीं! गार्डेनिंग एक्सपर्ट्स के ये घरेलू उपाय आपके पौधों को कीटों से बचाकर उन्हें फिर से हरा-भरा बना देंगे.
मौसम में बदलाव के साथ ही गमले या किचन गार्डन में लगे पौधों में कीट, फफूंद और बैक्टीरिया तेजी से पनपने लगते हैं. खासतौर पर ठंड के समय मिट्टी में नमी बढ़ने से कीटों की संख्या अधिक हो जाती है. चींटियां, मिलीपीड, सफेद कीड़े और छोटे-छोटे कीट मिट्टी की उर्वरता को प्रभावित कर पौधे की जड़ों को कमजोर कर देते हैं. ऐसे में पौधों की देखभाल के साथ-साथ उनकी मिट्टी की सेहत का ध्यान रखना जरूरी हो जाता है.

गार्डेनिंग एक्सपर्ट स्वरूप सिंह ने बताया कि नीम पौधों के लिए सबसे अच्छा प्राकृतिक कीटनाशक माना जाता है. इसके लिए नीम की पत्तियों को 15 से 20 मिनट तक पानी में उबालें और फिर उसे ठंडा होने दें. इस पानी को स्प्रे बोतल में भरकर मिट्टी और पौधों की जड़ों के पास छिड़कें. यह फंगस, सफेद कीड़ों और हानिकारक बैक्टीरिया को खत्म करता है. हर 7 से 10 दिन में इस प्रक्रिया को दोहराने से पौधे स्वस्थ बने रहते हैं और मिट्टी में कीटों की संख्या नियंत्रित रहती है.

इसके अलावा हल्दी पाउडर भी पौधों को रोगों से बचाने का एक कारगर घरेलू उपाय है. इसे अपनाने के लिए मिट्टी की ऊपरी परत पर हल्का सा हल्दी पाउडर छिड़कने से फफूंद और कीड़ों की वृद्धि रुक जाती है. हल्दी में मौजूद एंटीबैक्टीरियल और एंटिफंगल गुण मिट्टी को संक्रमणमुक्त बनाए रखते हैं. साथ ही दालचीनी के पाउडर की थोड़ी मात्रा मिट्टी में डालने से कीटों के अंडे फूटने से पहले ही नष्ट हो जाते है. यह मिट्टी की गुणवत्ता को बनाए रखता है और पौधों की जड़ों को सड़ने से बचाता है.

गार्डेनिंग एक्सपर्ट के अनुसार, लहसुन का स्प्रे पौधों के लिए बेहद असरदार प्राकृतिक कीटनाशक है. इसके लिए 10 से 12 लहसुन की कलियों को पानी में पीसकर 6 से 7 घंटे तक छोड़ दें. फिर इस घोल को छानकर मिट्टी और पौधों पर स्प्रे करें. लहसुन की गंध और उसमें मौजूद सल्फर युक्त तत्व मिट्टी में पनपे फंगस, कीड़ों और बैक्टीरिया को खत्म कर देते हैं. यह न सिर्फ कीटों से सुरक्षा देता है बल्कि पौधे की जड़ों को भी मजबूती प्रदान करता है.

वहीं, सरसों की खली भी पौधों के लिए पौष्टिक कीटनाशक का काम करती है. इसे 2 से 3 दिन पानी में भिगोकर उसका घोल तैयार करें और मिट्टी में डालें. इस घोल में प्राकृतिक नाइट्रोजन और अन्य सूक्ष्म पोषक तत्व होते हैं जो पौधे की वृद्धि को बढ़ाते हैं. साथ ही इसमें मौजूद तीव्र गंध वाले तत्त्व मिट्टी के भीतर मौजूद कीड़ों को मार देते हैं. यह उपाय पौधे को पोषण देने के साथ मिट्टी की उर्वरता भी बढ़ाता है.

लकड़ी की राख मिट्टी के लिए एक अच्छा फफूंदनाशक और कीटरोधी तत्व है. मिट्टी पर हल्की परत के रूप में राख डालने से चींटियां, सफेद कीड़े और फफूंद दूर रहते हैं. राख में पोटेशियम और कैल्शियम जैसे पोषक तत्व होते हैं जो पौधे की जड़ों को मजबूत बनाते हैं. यह मिट्टी का पीएच स्तर संतुलित रखती है और पौधों को प्राकृतिक रूप से स्वस्थ बनाती है.

गार्डेनिंग एक्सपर्ट के अनुसार, मेथी और अजवाइन का पानी भी एक प्राकृतिक कीटनाशक घोल है. इसके लिए थोड़ी-सी मेथी या अजवाइन को पानी में उबालें, ठंडा होने पर उसे मिट्टी में डालें. इसकी तेज गंध कीड़ों, फफूंद और बैक्टीरिया को दूर करती है. यह उपाय पर्यावरण के अनुकूल होने के साथ पौधों को किसी भी रासायनिक दुष्प्रभाव से भी बचाता है. इस नुस्खे को नियमित रूप से इन घरेलू उपायों का उपयोग करने से आपके पौधे लंबे समय तक हरे-भरे और रोगमुक्त बने रहेंगे.
First Published :
November 07, 2025, 18:10 IST
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ठंड में कीटों का हमला! नीम-लहसुन-हल्दी से करें पौधों की रक्षा



