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अग्निवीर बनने की राह में रोड़ा कौन, कहां हो रहा विरोध? सरकार के सामने रखी डिमांड – indian armed forces Agnipath scheme Former Gorkha soldiers agniveer

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अग्निवीर बनने की राह में रोड़ा कौन, कहां हो रहा विरोध? बड़ी है डिमांड

Last Updated:August 14, 2026, 09:08 IST

Agniveer News: इंडियन आर्म्‍ड फोर्सेज में भर्ती नियमों में बदलाव के तहत अग्निपथ स्‍कीम लॉन्‍च की गई है. यह भारत के साथ ही पड़ोसी देश नेपाल में भी लोकप्रिय है. नेपाल सरकार ने इस स्‍कीम को लेकर ऐसा कदम उठाया है, जिसका वहीं के पूर्व गोरखा सैनिक विरोध कर रहे हैं. इस बाबत सरकार के समक्ष अपनी डिमांड रखी है.अग्निवीर बनने की राह में रोड़ा कौन, कहां हो रहा विरोध? बड़ी है डिमांडZoomनेपाल में पूर्व गोरखा सैनिक इंडियन आर्म्‍ड फोर्सेज में अग्निपथ का हिस्‍सा बनने पर लगी रोक को हटाने की मांग को लेकर विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं. (फाइल फोटो/Reuters)

Agniveer News: अग्निपथ स्‍कीम के तहत भारतीय सेना में नेपाली युवाओं की गोरखा भर्ती फिर से शुरू करने की मांग को लेकर नेपाल के पोखरा में विरोध-प्रदर्शन हो रहा है. पूर्व गोरखा सैनिकों और उनके समर्थकों की ओर से यह प्रदर्शन किया जा रहा है. प्रदर्शनकारियों ने साफ कहा कि नेपाली युवाओं के लिए भारतीय सेना में सेवा का अवसर खाड़ी देशों में कठिन और कम वेतन वाली नौकरियों से बेहतर है. यह विरोध प्रदर्शन ऐसे समय हुआ है, जब भारतीय सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ के पांच दिवसीय नेपाल दौरे का कार्यक्रम 16 अगस्त से प्रस्तावित है.

स्‍थानीय मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, प्रदर्शन का आयोजन बुधवार 12 अगस्त को इंडियन एक्स-सर्विसमेन गोरखा ब्रिगेड नेपाल (पोखरा) ने किया. संगठन ने जिला प्रशासन कार्यालय के माध्यम से नेपाल सरकार को दो सूत्री ज्ञापन सौंपा. इसमें भारतीय सेना में नेपाली युवाओं की भर्ती तत्काल दोबारा शुरू करने और अपने नाम में ‘सोल्जर’ शब्द का इस्तेमाल करने वाले पूर्व सैनिक संगठनों के नवीनीकरण की मांग की गई. ब्रिगेड के अध्यक्ष कर्नल कृष्ण बहादुर खत्री ने कहा कि सुगौली संधि के बाद से नेपाली युवाओं की भारतीय सेना में भर्ती दो शताब्दियों से अधिक समय से चली आ रही है, लेकिन अग्निपथ स्‍कीम लागू होने के बाद यह ऐतिहासिक परंपरा प्रभावित हुई है. उन्होंने कहा कि भर्ती पर रोक से नेपाली युवाओं के रोजगार के अवसर कम हुए हैं और गोरखा सैनिकों से जुड़ी पीढ़ियों पुरानी सैन्य परंपरा भी खतरे में पड़ गई है.

‘खाड़ी देशों की नौकरी से बेहतर भारतीय सेना में सेवा’

‘इंडिया टुडे’ की रिपोर्ट के अनुसार, प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि अग्निपथ स्‍कीम नेपाली युवाओं को विदेशों में रोजगार के लिए पलायन करने के बजाय सैन्य सेवा का बेहतर विकल्प दे सकती है. ज्ञापन में कहा गया कि अग्निवीर के रूप में 4 साल की सेवा के दौरान युवाओं को विभिन्न सुविधाओं के साथ लगभग 45 से 50 लाख नेपाली रुपये तक की आय हो सकती है. इसमें खाड़ी देशों में काम करने की कठिन परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए कहा गया कि भारतीय सेना में नौकरी 50 डिग्री सेल्सियस तक तापमान में न्यूनतम वेतन पर काम करने की तुलना में कहीं बेहतर विकल्प है. प्रदर्शनकारियों ने कहा कि भर्ती बंद रहने से बड़ी संख्या में नेपाली युवाओं के लिए रोजगार का एक महत्वपूर्ण माध्यम प्रभावित हुआ है.

अग्निपथ स्‍कीम के तहत 4 साल के लिए भर्ती की जाती है.(फाइल फोटो/Reuters)

साल 2022 में अग्निपथ स्‍कीम

भारत ने 2022 में सशस्त्र बलों में भर्ती के लिए अग्निपथ स्‍कीम शुरू की थी. इसके तहत भर्ती होने वाले युवाओं को ‘अग्निवीर’ कहा जाता है और उनकी सेवा अवधि चार वर्ष निर्धारित है. चार साल बाद अधिकतम 25 प्रतिशत अग्निवीरों को नियमित सैन्य सेवा के लिए बनाए रखने का प्रावधान है. हालांकि, भारतीय सशस्त्र बलों में अग्निवीरों की हिस्‍सेदारी बढ़ाने की मांग भी सामने आती रही है.

अग्निपथ बना गोरखा भर्ती में गतिरोध की वजह

नेपाली गोरखाओं की भारतीय सेना में भर्ती कोरोना महामारी के दौरान करीब 2020 से ही बाधित थी. वर्ष 2022 में नेपाल ने अग्निपथ योजना के तहत गोरखा युवाओं की भर्ती को फिलहाल रोकने का अनुरोध किया था. नेपाल में इस बात को लेकर चिंता जताई गई थी कि चार साल की सेवा के बाद सैनिकों के भविष्य को लेकर पर्याप्त स्पष्टता नहीं है और नई व्यवस्था लंबे समय से चले आ रहे गोरखा भर्ती प्रबंधों के अनुरूप है या नहीं.

1947 का वो समझौता

भारत, नेपाल और ब्रिटेन के बीच 1947 के त्रिपक्षीय समझौते के तहत ब्रिटिश भारतीय सेना में सेवा देने वाले गोरखाओं की भर्ती की व्यवस्था जारी रही थी. गोरखा सैनिकों की भर्ती की परंपरा इससे भी पुरानी है. ईस्ट इंडिया कंपनी ने एंग्लो-नेपाली युद्ध के बाद 1815 से गोरखाओं की भर्ती शुरू की थी. स्वतंत्रता के बाद ब्रिटिश भारतीय सेना की छह गोरखा रेजिमेंट भारतीय सेना का हिस्सा बनीं. पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान ने 3 अगस्त को कहा था कि अब यह फैसला काठमांडू को करना है कि वह अग्निपथ योजना के तहत अपने युवाओं को भारतीय सेना में सेवा के लिए भेजना चाहता है या नहीं. उन्होंने यह भी कहा था कि नेपाल के नागरिकों के लिए अलग और भारतीय नागरिकों के लिए अलग भर्ती व्यवस्था नहीं हो सकती.

About the AuthorManish Kumar

बिहार, उत्‍तर प्रदेश और दिल्‍ली से प्रारंभिक के साथ उच्‍च शिक्षा हासिल की. झांसी से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्‍ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में PG डिप्‍लोमा किया. Hindustan Times ग्रुप से प्रोफेशनल कॅरियर की शु…

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New Delhi,Delhi

First Published :

August 14, 2026, 09:08 IST

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