World Camel Day: 50 डिग्री गर्मी में भी सेहत का खजाना! जानिए क्यों ऊंटनी का दूध कहलाता है ‘व्हाइट गोल्ड’

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रेगिस्तान का अमृत है ऊंटनी का दूध! जानिए क्यों कहलाता है ‘व्हाइट गोल्ड’
Last Updated:June 22, 2026, 10:58 IST
White Gold of Rajasthan: थार मरुस्थल में ऊंट केवल परिवहन और आजीविका का साधन नहीं, बल्कि पोषण और आर्थिक मजबूती का आधार भी है.आयुर्वेद विभाग के उपनिदेशक डॉ. रमेश धनदे के अनुसार, ऊंटनी का दूध रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के साथ कई स्वास्थ्य लाभ प्रदान करता है. ऊंटनी के दूध में विटामिन-सी, कैल्शियम, आयरन, पोटेशियम और प्रोटीन जैसे कई पोषक तत्व प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं. कम वसा और उच्च पोषण मूल्य के कारण इसकी मांग लगातार बढ़ रही है.राजस्थान सरकार भी ऊंट संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए विशेष योजनाएं चला रही है. उष्ट विकास योजना के तहत ऊंटनी के बच्चे के जन्म पर पशुपालकों को 20 हजार रुपये की सहायता दी जा रही है. ऊंटों की घटती संख्या को रोकने के लिए राज्य से बाहर इनके परिवहन और खरीद-फरोख्त पर भी प्रतिबंध लगाया गया है.
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बाड़मेर. राजस्थान का “व्हाइट गोल्ड” कहलाने वाला ऊंटनी का दूध सेहत का खजाना कहलाता है. भीषण गर्मी और 50 डिग्री सेल्सियस तापमान में भी ऊंटनी पौष्टिक दूध देती है. दूध में विटामिन-सी, कैल्शियम, आयरन और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाले तत्व प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं. थार के बाड़मेर-जैसलमेर क्षेत्र में सदियों से यह दूध लोगों के जीवन का हिस्सा रहा है. वहीं अब इसकी बढ़ती मांग पशुपालकों के लिए आय का नया स्रोत बन रही है.
राजस्थान के थार मरुस्थल में सदियों से ऊंट केवल परिवहन और आजीविका का साधन नहीं रहा है बल्कि उसका दूध भी स्थानीय लोगों के लिए पोषण का भी काम कर रहा है. आज बदलते दौर में ऊंटनी का दूध “व्हाइट गोल्ड” के रूप में नई पहचान बना रहा है. बाड़मेर, जैसलमेर और पश्चिमी राजस्थान के अन्य रेगिस्तानी क्षेत्रों में मालधारी समुदाय लंबे समय से ऊंट पालन करता आया है. यहां ऊंटनी का दूध पारंपरिक भोजन संस्कृति का हिस्सा रहा है.
राजस्थान में पाई जाती है ऊंट की यह नस्लें
राजस्थान में कई नस्लों के ऊंट पाए जाते हैं. इनमें से मुख्य नाचना और गोमठ ऊंट हैं. नाचना नस्ल के ऊंट सवारी या तेज दौड़ने वाले होते हैं जबकि गोमठ ऊंट कृषि संबंधी या भारवाहक के रूप में काम में लिया जाता है. इसके अलावा अलवरी, बाड़मेरी, बीकानेरी, कच्छी, सिंधु, मेवाड़ी और जैसलमेरी ऊंट की नस्लें भी पाई जाती है.
ऊंटनी के दूध में होते हैं भरपूर पोषक तत्व
बाड़मेर आयुर्वेद विभाग के उपनिदेशक डॉ. रमेश धनदे के मुताबिक, ऊंटनी के दूध में विटामिन-सी, कैल्शियम, आयरन, पोटेशियम और प्रोटीन जैसे कई महत्वपूर्ण पोषक तत्व पाए जाते हैं. इसमें वसा की मात्रा कम होती है, जिससे स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोगों के बीच इसकी लोकप्रियता बढ़ रही है. यही कारण है कि ऊंटनी का दूध डायबिटीज मरीजों के लिए रामबाण है.
ऊंटनी के बच्चे के जन्म पर मिलते हैं 20 हजार रुपये
पश्चिम राजस्थान में ऊंटों की संख्या देश में सर्वाधिक है. जैसलमेर में 35 हजार ऊंट है. सरकार द्वारा ऊंटों के सरक्षंण के लिए “उष्ट विकास योजना” शुरू की थी. अब भाजपा सरकार ने सहायता राशि 10 हजार से बढ़ाकर 20 हजार रुपये कर दी है. पशुपालकों को ऊंटनी के बच्चे के जन्म पर 20 हजार रूपए दी जाती है. ऊंटों की घटती संख्या को रोकने के लिए राज्य से बाहर परिवहन और खरीद-फरोख्त पर रोक लगा दी गई है.About the Authordeep ranjan
दीप रंजन सिंह 2016 से मीडिया में जुड़े हुए हैं. हिंदुस्तान, दैनिक भास्कर, ईटीवी भारत और डेलीहंट में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. 2022 से हिंदी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. एजुकेशन, कृषि, राजनीति, खेल, लाइफस्ट…और पढ़ें
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