वाह राजा…गर्मियों में ठंडे-ठंडे पानी की फुहारें और कूलर की मस्त हवा, वहीं साथ में हाथियों की भी हुई मोज!

Last Updated:April 24, 2026, 12:43 IST
Jaipur Nahargarh and Elephant Village Heat Protection News: जयपुर के नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क और आमेर के हाथी गाँव में वन्यजीवों को भीषण गर्मी से बचाने के लिए विशेष उपाय किए गए हैं. नाहरगढ़ में बाघ और शेरों के लिए कूलर, स्प्रिंकलर और रेन गन लगाए गए हैं, वहीं हाथी गाँव में हाथियों को दिन में तीन बार नहलाने के साथ-साथ उनकी आयुर्वेदिक तेल से मालिश की जा रही है. पशु चिकित्सकों की देखरेख में जानवरों की डाइट में खीरा-तरबूज जैसे ठंडे फल शामिल किए गए हैं ताकि उन्हें हीटवेव के खतरों से बचाया जा सके.
जयपुर. राजस्थान की राजधानी जयपुर और आसपास के इलाकों में पड़ रही भीषण गर्मी ने इंसानों के साथ-साथ वन्यजीवों की भी मुश्किलें बढ़ा दी हैं. इस चिलचिलाती धूप और लू के थपेड़ों से बेजुबानों को बचाने के लिए वन विभाग ने नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क और आमेर के प्रसिद्ध ‘हाथी गाँव’ में विशेष पुख्ता इंतजाम किए हैं. जयपुर के सीनियर वाइल्डलाइफ़ वेटरिनेरियन डॉ. अरविंद माथुर के अनुसार, वन्यजीवों के स्वास्थ्य और उनके व्यवहार को सामान्य बनाए रखने के लिए तकनीकी और प्राकृतिक, दोनों तरह के उपाय अपनाए जा रहे हैं.
नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में बाघ, शेर, तेंदुए और भालू जैसे बड़े जानवरों के लिए विशेष व्यवस्था की गई है. डॉ. अरविंद माथुर ने बताया कि इन जानवरों को पर्यटकों के सामने लाने से पहले प्रतिदिन नहलाया जाता है ताकि उनके शरीर का तापमान स्थिर रहे. डिस्प्ले एरिया और रात के ठिकानों (Night Shelters) में बड़े जंबो कूलर, पानी के स्प्रिंकलर और ‘रेन गन’ लगाए गए हैं, जो कृत्रिम बारिश का अहसास कराते हैं. इससे वन्यजीवों को बाड़ों के भीतर भी जंगल जैसा ठंडा वातावरण मिल रहा है.
हाथी गाँव में शाही ठाठ: आयुर्वेदिक मालिश और ठंडी डाइटआमेर के पास स्थित ‘हाथी गाँव’ में भी हाथियों के लिए खास रूटीन तैयार किया गया है. हाथियों को गर्मी से बचाने के लिए दिन में तीन बार स्नान कराया जा रहा है. हाथियों के रहने वाले स्थानों (थानों) में बड़े कूलर और पंखे लगाए गए हैं. सबसे खास बात यह है कि हाथियों के पैरों को फटने से बचाने और उन्हें ठंडक देने के लिए आयुर्वेदिक तेल से विशेष मालिश की जा रही है. हाथियों की डाइट में अब गन्ना और सूखे चारे के बजाय खीरा, तरबूज और ठंडी तासीर वाले फल शामिल किए गए हैं ताकि उनका पाचन तंत्र सही रहे.
विशेषज्ञों की पैनी नजर और मेडिकल मॉनिटरिंगदोनों ही स्थानों पर पशु चिकित्सकों की टीमें 24 घंटे निगरानी रख रही हैं. जानवरों के खान-पान में ग्लूकोज और इलेक्ट्रोल पाउडर का उपयोग बढ़ाया गया है ताकि डिहाइड्रेशन का खतरा न रहे. डॉ. माथुर के अनुसार, गर्मी के इन महीनों में जानवरों के खान-पान और रूटीन में किए गए ये बदलाव उनके जीवन की सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं. प्रशासन के इन प्रयासों की स्थानीय लोग और पर्यटक भी सराहना कर रहे हैं.
About the Authorvicky Rathore
Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…और पढ़ें
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Location :
Jaipur,Jaipur,Rajasthan
First Published :
April 24, 2026, 12:36 IST



