पीरियड्स बंद होने के बाद क्यों बढ़ जाता है हार्ट अटैक, बीपी जैसी हार्ट डिजीज का खतरा? एक्सपर्ट से जानें 3 बड़े बदलाव

Last Updated:October 06, 2026, 10:11 IST
Menopause And Heart Disease : पीरियड्स बंद होने के बाद महिलाओं के शरीर में कई बदलाव होते हैं, लेकिन क्या इसका असर दिल पर भी पड़ता है? मेनोपॉज के दौरान एस्ट्रोजन कम होने से ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल और पेट की अंदरूनी चर्बी बढ़ सकती है, जिससे हार्ट डिजीज का जोखिम बढ़ सकता है. 25 साल के अनुभवी कार्डियोवस्कुलर सर्जन से जानें मेनोपॉज के दौरान दिल को प्रभावित करने वाले 3 बड़े बदलाव और इससे बचने के आसान तरीके.
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शरीर में होने वाले बदलावों को समझना और समय रहते अपनी सेहत पर ध्यान देना सबसे समझदारी वाला कदम है. (AI Image)
Heart Attack Risk After Menopause : महिलाओं के लिए मेनोपॉज जिंदगी का एक नेचुरल पड़ाव है. आमतौर पर 45 से 55 साल की उम्र के बीच पीरियड्स हमेशा के लिए बंद हो जाते हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि पीरियड्स बंद होने के बाद दिल की सेहत पर भी असर पड़ सकता है? दरअसल, मेनोपॉज के दौरान शरीर में कई हार्मोनल बदलाव होते हैं और इनमें सबसे अहम है एस्ट्रोजन हार्मोन का कम होना. इसका असर सिर्फ पीरियड्स और मूड पर नहीं, बल्कि ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल और शरीर में जमा फैट पर भी पड़ सकता है. यही वजह है कि इस उम्र में महिलाओं को हार्ट हेल्थ को लेकर थोड़ा ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत होती है.
अमेरिका के बोर्ड-सर्टिफाइड कार्डियोवस्कुलर सर्जन डॉ. जेरेमी लंदन ने 5 अक्टूबर को शेयर किए एक वीडियो में मेनोपॉज और महिलाओं के हार्ट हेल्थ के बीच संबंध समझाया. 25 साल से ज्यादा का अनुभव रखने वाले डॉ. लंदन ने बताया कि मेनोपॉज के दौरान महिलाओं में कार्डियोवस्कुलर रिस्क बढ़ सकता है. उन्होंने इसके पीछे तीन प्रमुख बदलाव बताए हैं.
शरीर में होने वाले बदलावों को समझना और समय रहते अपनी सेहत पर ध्यान देना सबसे समझदारी वाला कदम है.
1. बढ़ सकता है ब्लड प्रेशर-उन्होंंने बताया कि मेनोपॉज के बाद कुछ महिलाओं में ब्लड प्रेशर बढ़ने की समस्या देखने को मिल सकती है. इसका एक कारण एस्ट्रोजन का कम होना है. एस्ट्रोजन कम होने के साथ रक्त वाहिकाओं में बनने वाला नाइट्रिक ऑक्साइड भी कम हो सकता है. नाइट्रिक ऑक्साइड रक्त वाहिकाओं को रिलैक्स रखने में मदद करता है. जब इसका स्तर कम होता है तो रक्त वाहिकाएं पहले की तुलना में ज्यादा सख्त हो सकती हैं और ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है. लंबे समय तक हाई BP रहने पर दिल और रक्त वाहिकाओं से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है.
2. कोलेस्ट्रॉल में हो सकता है बदलावमेनोपॉज के दौरान कोलेस्ट्रॉल बढ़ना भी एक महत्वपूर्ण बदलाव है. डॉ. लंदन के अनुसार, एस्ट्रोजन कम होने पर लिवर खून में मौजूद कुछ हानिकारक फैट कणों को पहले की तरह प्रभावी ढंग से साफ नहीं कर पाता. इनमें ApoB वाले एथेरोजेनिक लिपोप्रोटीन भी शामिल हैं. इनका स्तर बढ़ने पर धमनियों में फैट जमा होने का खतरा बढ़ सकता है, जो आगे चलकर हार्ट डिजीज का कारण बन सकता है. इसलिए मेनोपॉज के आसपास सिर्फ वजन ही नहीं, बल्कि कोलेस्ट्रॉल और दूसरे हार्ट रिस्क फैक्टर्स पर भी नजर रखना जरूरी है.
3. पेट के आसपास बढ़ सकती है अंदरूनी चर्बीमेनोपॉज के बाद कई महिलाओं को लगता है कि उनका वजन खासकर पेट के आसपास तेजी से बढ़ रहा है. इसे केवल उम्र बढ़ने का असर मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. इस दौरान विसरल फैट, यानी पेट के अंदर अंगों के आसपास जमा होने वाली चर्बी बढ़ सकती है.
डॉ. लंदन के मुताबिक, यह फैट शरीर के मेटाबॉलिज्म को प्रभावित कर सकता है. इससे इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ने और कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल करने में परेशानी हो सकती है. इसलिए मेनोपॉज के बाद बढ़ती कमर सिर्फ लुक्स का मामला नहीं, बल्कि हेल्थ का संकेत भी हो सकती है.
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