Rajasthan

154 साल पुराना पन्ना सागर तालाब, यहां लगी है 500 साल पुरानी भगवान विष्णु के विभिन्न स्वरूपों की 2 दर्जन प्रतिमाएं

Last Updated:December 28, 2025, 12:39 IST

Patrasagar pond : झुंझुनूं के खेतड़ी कस्बे के बीचों-बीच स्थित पत्रासागर तालाब आज भी पारंपरिक जल संरक्षण और स्थापत्य कला की मिसाल है. करीब 154 साल पुराना यह तालाब न सिर्फ वर्षा जल संचयन का सशक्त माध्यम रहा, बल्कि धार्मिक आस्था, वास्तुकला और दूरदर्शी शासकों की सोच को भी दर्शाता है.तालाब

सीकर : झुंझुनूं जिले के खेतड़ी कस्बे के बीचों-बीच स्थित पत्रासागर तालाब आज भी वर्षा जल संरक्षण और पारंपरिक जल संचयन प्रणाली का बेहतरीन उदाहरण है. यह तालाब सैकड़ों साल पुराना है. यह तालाब न केवल खेतड़ी की पहचान है, बल्कि तत्कालीन शासकों और दूरदर्शिता का नमूना है. वर्षा के पानी को सहेजने और उसका उपयोग करने के लिए इसे बनाया गया था. इस तालाब ने क्षेत्र की जल जरूरतों को लंबे समय तक पूरा किया है.

तालाब

खेतड़ी के तत्कालीन शासक राजा अजीत सिंह के शासनकाल में इस ऐतिहासिक तालाब का निर्माण कराया गया था. सेठ पन्नालाल शाह की पहल पर वर्ष 1871 में बने इस तालाब को आज लगभग 154 वर्ष पूरे हो चुके हैं. उस दौर में जब आधुनिक तकनीक उपलब्ध नहीं थी, तब भी इतने सुव्यवस्थित इसे बनाया गया था. इस बावड़ी की बनावट भी बहुत सुंदर है. यह खेतड़ी के पर्यटक स्थलों में से एक है.

तालाब

केवल जल प्रबंधन के लिए ही नहीं बल्कि पत्रासागर तालाब अपनी अनूठी वास्तुकला और धार्मिक महत्व के लिए भी प्रसिद्ध है. तालाब के पीलरों और दीवारों पर भगवान विष्णु के विभिन्न स्वरूपों में लगभग दो दर्जन प्रतिमाएं स्थापित हैं. ये प्रतिमाएं तालाब की सुंदरता को बढ़ाने के साथ-साथ इसे एक धार्मिक और सांस्कृतिक स्थल का रूप भी प्रदान करती हैं, जिससे लोगों की आस्था इस जल संरचना से जुड़ी हुई है.

Add as Preferred Source on Google

तालाब

बताया जाता है कि तालाब में लगी ये सभी प्रतिमाएं लगभग 500 वर्ष पुरानी हैं, जो खुदाई के दौरान प्राप्त हुई थीं. इतनी प्राचीन प्रतिमाओं का जल संरचना के साथ समन्वय इस बात का प्रमाण है कि उस समय धार्मिक आस्था और उपयोगी निर्माण कार्यों को एक साथ जोड़ा जाता था, ताकि समाज को आध्यात्मिक और भौतिक दोनों तरह का लाभ मिल सके.

तालाब

तालाब के चारों ओर ऊंची और मजबूत दीवारें बनाई गई हैं, जिससे जल का संरक्षण बेहतर तरीके से हो सके. महिलाओं और पुरुषों के लिए अलग-अलग घाटों का निर्माण किया गया था. आज भी यह दीवारें और घाटों की स्थिति पहले के जैसी है. जब इस तालाब में भराव क्षमता से अधिक पानी आता था, तो उसे नहरों के माध्यम से आसपास के कुओं तक पहुंचाया जाता था.

तालाब

इस तकनीक के कारण पत्रासागर तालाब से आसपास के कई कुएं भी रिचार्ज होते थे, जिससे पूरे क्षेत्र में जल संकट की स्थिति कम रहती थी. पाटन गांव के पास खुदाई में निकली इन प्रतिमाओं को पहले पहाड़ी पर स्थित भोपालगढ़ में रखा गया था, लेकिन बाद में राजा अजीत सिंह के निर्देश पर इन्हें तालाब की दीवारों, घाटों और छतरियों के आधार स्तंभों पर स्थापित किया गया, जो आज भी इतिहास की कहानी कहते हैं.

First Published :

December 28, 2025, 12:39 IST

homerajasthan

पत्रासागर तालाब खेतड़ी जल संरक्षण और वास्तुकला का ऐतिहासिक उदाहरण

Source link

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button

Uh oh. Looks like you're using an ad blocker.

We charge advertisers instead of our audience. Please whitelist our site to show your support for Nirala Samaj