राजस्थान HC का फैसला! शादी की उम्र से पहले भी लिव-इन में रह सकते हैं बालिग जोड़े, कोटा के जोड़े को मिली राहत

Last Updated:December 05, 2025, 09:17 IST
राजस्थान हाईकोर्ट के जयपुर बैंच ने लाइव-इन रिलेशनशिप के लिए एक अहम फैसला सुनाया. कोर्ट ने कहा कि शादी की कानूनी उम्र न होने के बावजूद, दो व्यस्क आपसी सहमति से साथ रह सकते हैं और इसे उनके मौलिक अधिकारों से वंचित नहीं किया जा सकता. मामला कोटा के 18 वर्षीय युवती और 19 वर्षीय युवक का था, जिनकी सुरक्षा की मांग खारिज हो रही थी. न्यायमूर्ति अनूप धंद ने पब्लिक प्रॉसिक्यूटर के तर्क को खारिज करते हुए कहा कि अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है.
राजस्थान हाईकोर्ट के जयपुर बैंच से लिव-इन में रह रहे कोटा के युवा जोड़े को मिली राहत
जयपुर. राजस्थान हाईकोर्ट के जयपुर बैंच ने व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार को सर्वोपरि मानते हुए एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है. कोर्ट ने कहा है कि अगर दो व्यस्क आपसी सहमति से लिव-इन रिलेशनशिप में रहना चाहते हैं, तो उन्हें शादी की कानूनी उम्र न होने की वजह से इस अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता. भारत में लड़कियों की शादी की न्यूनतम उम्र 18 साल और लड़कों की 21 साल है, लेकिन 18 साल की उम्र में दोनों को व्यस्क माना जाता है. ऐसे में व्यस्क होने के बावजूद शादी की उम्र न होने पर भी लिव-इन वैध है.
यह फैसला राजस्थान हाईकोर्ट के जयपुर बैंच के जस्टिस अनूप धंद की सिंगल बेंच ने सोमवार को सुनाया, जिसकी कॉपी गुरुवार को अपलोड हुई. मामला कोटा के एक 18 साल की युवती और 19 साल के युवक का था. दोनों ने आपसी सहमति से 27 अक्टूबर 2025 को लिव-इन एग्रीमेंट किया और साथ रहने लगे. लेकिन लड़की के परिवार ने इसका विरोध किया और दोनों को जान से मारने की धमकी दी. जोड़े ने कोटा पुलिस से सुरक्षा की गुहार लगाई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई. आखिरकार दोनों हाईकोर्ट पहुंचे और सुरक्षा की मांग की.
पब्लिक प्रॉसिक्यूटर के दलील को किया खारिज
राज्य की ओर से पब्लिक प्रॉसिक्यूटर विवेक चौधरी ने तर्क दिया कि चूंकि लड़का 21 साल का नहीं हुआ है, इसलिए वह कानूनी रूप से शादी नहीं कर सकता. ऐसे में लिव-इन रिलेशनशिप की इजाजत नहीं दी जानी चाहिए. लेकिन कोर्ट ने इस दलील को खारिज कर दिया. जस्टिस धंद ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार हर नागरिक को मिला हुआ है. किसी को भी धमकी मिलना संवैधानिक उल्लंघन है. राज्य का कर्तव्य है कि वह हर नागरिक की जान-माल की रक्षा करे.
भारत में लिव-इन रिलेशनशिप न तो अवैध और न ही कोई अपराध
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल इसलिए कि याचिकाकर्ता कानूनी रूप से शादी के योग्य नहीं हैं, उन्हें उनके मौलिक अधिकारों से वंचित नहीं किया जा सकता. अदालत ने यह भी दोहराया कि भारत में लिव-इन रिलेशनशिप न तो अवैध है और न ही कोई अपराध है. सुप्रीम कोर्ट भी कई फैसलों में इसे मान्यता दे चुका है. अदालत ने भीलवाड़ा और जोधपुर (ग्रामीण) के पुलिस अधीक्षकों को निर्देश दिया कि वे याचिका में बताए खतरे की जांच करें और जरूरत पड़ी तो जोड़े को सुरक्षा मुहैया कराएं. यह फैसला युवाओं के लिए राहत की बात है, जो पारंपरिक शादी से पहले साथ रहना चाहते हैं लेकिन परिवार या समाज के दबाव का शिकार होते हैं. हालांकि समाज में लिव-इन को लेकर अभी भी बहस जारी है.About the Authordeep ranjan
दीप रंजन सिंह 2016 से मीडिया में जुड़े हुए हैं. हिंदुस्तान, दैनिक भास्कर, ईटीवी भारत और डेलीहंट में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. 2022 से हिंदी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. एजुकेशन, कृषि, राजनीति, खेल, लाइफस्ट…और पढ़ें
Location :
Jaipur,Rajasthan
First Published :
December 05, 2025, 08:24 IST
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राजस्थान HC का फैसला! शादी की उम्र से पहले भी लिव-इन में रह सकते हैं बालिग



