जापान के सबसे घातक टाइप-10 टैंक के भीतर फटा गोला, मिलिट्री ड्रिल के दौरान तीन सैनिकों के चीथड़े उड़े

टोक्यो: जापान के दक्षिणी हिस्से में स्थित एक मिलिट्री ट्रेनिंग एरिया में मंगलवार को दिल दहला देने वाला हादसा हुआ. यहां सेना के अभ्यास के दौरान एक टैंक के अंदर अचानक गोला फट गया. इस भीषण ब्लास्ट की चपेट में आने से तीन जापानी सैनिकों की मौके पर ही मौत हो गई. ग्राउंड सेल्फ-डिफेंस फोर्स के अधिकारियों ने पुष्टि की है कि यह हादसा ओइता प्रांत के हिजुदाई ट्रेनिंग एरिया में हुआ है. घटना के वक्त सैनिक लाइव-फायर एक्सरसाइज कर रहे थे. इस धमाके ने जापान के सबसे आधुनिक टैंकों की सुरक्षा और तकनीक पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. सरकार ने मामले की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दे दिए हैं.
टैंक के अंदर धमाका कैसे हुआ और कौन थे इसके शिकार?
जापानी सेना के मुताबिक यह ब्लास्ट टाइप-10 मेन बैटल टैंक के गन बुर्ज (टारगेट साधने वाला हिस्सा) के अंदर हुआ. उस वक्त टैंक के भीतर चार लोग सवार थे. इनमें एक टैंक कमांडर, एक गनर, एक सेफ्टी ऑफिसर और एक ड्राइवर शामिल था. ब्लास्ट इतना जोरदार था कि कमांडर, गनर और सेफ्टी ऑफिसर को संभलने का मौका भी नहीं मिला. इन तीनों की इस हादसे में जान चली गई.
गनीमत रही कि टैंक का ड्राइवर इस धमाके में बच गया, हालांकि उसे भी गंभीर चोटें आई हैं. अस्पताल में उसका इलाज चल रहा है और उसकी हालत स्थिर बताई जा रही है.
जापान ग्राउंड सेल्फ-डिफेंस फोर्स के चीफ ऑफ स्टाफ मासादोशी अराई ने इस घटना पर गहरा दुख जताया है. उन्होंने तुरंत एक्शन लेते हुए टाइप-10 और टाइप-90 टैंकों के लाइव-फायर अभ्यास पर रोक लगा दी है. दरअसल ये दोनों टैंक एक ही तरह के गोलों का इस्तेमाल करते हैं.
अराई ने कहा, ‘हम जल्द से जल्द इस हादसे के असली कारण का पता लगाएंगे ताकि भविष्य में ऐसे खतरों को रोका जा सके.’ टाइप-10 जापान का सबसे लेटेस्ट और आधुनिक टैंक है. इसे साल 2011 में सेना में शामिल किया गया था. अब इसकी सुरक्षा को लेकर पूरी जांच की जा रही है.
हथियारों के निर्यात पर फैसले का इस हादसे से क्या कनेक्शन है?
यह हादसा ठीक उसी दिन हुआ जब प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची की कैबिनेट ने एक बड़ा फैसला लिया. जापान ने घातक हथियारों के निर्यात पर लगे दशकों पुराने बैन को हटा दिया है. दूसरे विश्व युद्ध के बाद से जापान की शांतिवादी नीति रही है, लेकिन अब वह अपना डिफेंस सेक्टर मजबूत करना चाहता है.
चीन और उत्तर कोरिया की बढ़ती आक्रामकता को देखते हुए जापान अब लड़ाकू ड्रोन और युद्धपोत जैसे हथियार दूसरे देशों को बेचना चाहता है. इस नई पॉलिसी का मकसद जापान की सुरक्षा को मजबूत करना और क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखना है.
चीन ने जापान की नई डिफेंस पॉलिसी पर क्या प्रतिक्रिया दी?
जापान के इस फैसले की चीन ने कड़ी आलोचना की है. चीन का मानना है कि इससे क्षेत्र में तनाव बढ़ेगा. वहीं दूसरी तरफ ऑस्ट्रेलिया जैसे सहयोगियों ने जापान के इस कदम का स्वागत किया है. दक्षिण-पूर्व एशिया और यूरोप के कई देशों ने भी जापान के हथियारों में दिलचस्पी दिखाई है.
हालांकि जापान के अंदर भी इस फैसले का विरोध हो रहा है. विरोधियों का कहना है कि यह संविधान का उल्लंघन है और इससे जापानी लोगों की सुरक्षा को खतरा हो सकता है. इसी बीच टैंक धमाके जैसी घटना ने सरकार के लिए स्थिति को और संवेदनशील बना दिया है.



