जब उंगलियों पर होती थी ग्रहों की गणना! देखिए 100 साल पुराना महाराजा गंगा सिंह का शाही पंचांग

Last Updated:April 23, 2026, 11:13 IST
100 Year Old Handwritten Panchang Bikaner Heritage: बीकानेर के संग्रहकर्ता किशन सोनी के पास महाराजा गंगा सिंह के काल का लगभग 100 वर्ष पुराना हस्तलिखित पंचांग सुरक्षित है. यह पंचांग दुर्लभ ‘मोड़िया’ लिपि में लिखा गया है और इसमें ग्रहों की सटीक गणनाएं हाथ से दर्ज की गई हैं. उस समय यह पंचांग राजदरबार के महत्वपूर्ण कार्यों और शुभ मुहूर्त तय करने का मुख्य आधार था. 20 पृष्ठों का यह दस्तावेज बीकानेर की समृद्ध ज्योतिषीय और भाषाई विरासत का प्रतीक है. आज के कंप्यूटर युग में यह हस्तलिखित पंचांग प्राचीन विद्वत्ता और मेहनत का एक बेमिसाल उदाहरण पेश करता है.
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100 Year Old Handwritten Panchang Bikaner Heritage: आज के डिजिटल और सॉफ्टवेयर आधारित युग में जहां कुंडलियां और पंचांग कुछ ही मिनटों में कंप्यूटर पर तैयार हो जाते हैं, वहीं बीकानेर की ऐतिहासिक धरोहरों के बीच एक ऐसा दस्तावेज सामने आया है जो हमें 100 साल पुराने अतीत की गहराई से रूबरू कराता है. महाराजा गंगा सिंह के शासनकाल का यह हस्तलिखित पंचांग इन दिनों शहर में चर्चा और आकर्षण का केंद्र बना हुआ है. यह पंचांग उस दौर की याद दिलाता है जब तकनीक का अभाव था लेकिन विद्वानों की बुद्धि और ज्योतिष विद्या की जड़ें अत्यंत गहरी थीं. वर्तमान में यह अनमोल दस्तावेज शहर के प्रसिद्ध संग्रहकर्ता किशन सोनी के पास सुरक्षित है.
संग्रहकर्ता किशन सोनी ने बताया कि इस पंचांग को उस समय के विद्वान ब्राह्मणों ने अपने हाथों से तैयार किया था. उस दौर में आज की तरह कोई सॉफ्टवेयर उपलब्ध नहीं थे. ज्योतिषी और गणितज्ञ ग्रहों की चाल और नक्षत्रों की गणना उंगलियों पर किया करते थे. इसके बाद अत्यंत सावधानी के साथ हर तिथि और मुहूर्त को कागज़ पर उतारा जाता था. यह कार्य न केवल श्रमसाध्य था बल्कि इसमें महीनों का समय लगता था. इस पंचांग का हर पृष्ठ उस समय के विद्वानों की मेहनत और उनकी ज्योतिषीय सटीकता की कहानी बयां करता है.
महाराजा गंगा सिंह के लिए खास तैयारीयह पंचांग विशेष रूप से बीकानेर के तत्कालीन शासक महाराजा गंगा सिंह के लिए तैयार किया गया था. उस समय राजदरबार में ज्योतिषियों का स्थान सर्वोपरि होता था. राजा के दैनिक निर्णयों, युद्ध की योजनाओं, महत्वपूर्ण यात्राओं और राजकीय उत्सवों के शुभ मुहूर्त इसी पंचांग के आधार पर तय किए जाते थे. करीब 7×8 इंच के आकार वाले इस 20 पृष्ठों के पंचांग का उपयोग प्रशासनिक और धार्मिक दोनों कार्यों में समान रूप से किया जाता था. यह उस समय की राजकीय कार्यप्रणाली का एक अनिवार्य हिस्सा था.
लुप्त होती ‘मोड़िया’ लिपि और भाषाई महत्वइस पंचांग की सबसे बड़ी विशेषता इसकी भाषा है. यह पूरी तरह से ‘मोड़िया’ लिपि में लिखा गया है जो अब लगभग लुप्तप्राय हो चुकी है. इस लिपि को पढ़ना और समझना आज के दौर में विशेषज्ञों के लिए भी एक बड़ी चुनौती है. जानकारों का मानना है कि यह पंचांग केवल ज्योतिषीय गणनाओं का स्रोत नहीं है बल्कि यह उस समय की सामाजिक, भाषाई और सांस्कृतिक परंपराओं का भी एक ऐतिहासिक दस्तावेज है. किशन सोनी जैसे संग्रहकर्ताओं के प्रयासों के कारण ही बीकानेर की यह अमूल्य जड़ें आज भी सुरक्षित हैं जो आने वाली पीढ़ियों को अपनी परंपराओं पर गर्व करने का अवसर प्रदान करती हैं.
About the Authorvicky Rathore
Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…और पढ़ें
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Location :
Bikaner,Bikaner,Rajasthan
First Published :
April 23, 2026, 11:13 IST



