माली में तख्तापलट के बाद सबसे बड़ा आतंकी हमला, बमाको समेत कई शहरों में धमाके, रूसी सेना भी नहीं रोक पा रही जंग

होमदुनियाअन्य देश
माली में तख्तापलट के बाद सबसे बड़ा आतंकी हमला, बमाको समेत कई शहरों में धमाके
Last Updated:April 25, 2026, 16:58 IST
माली की राजधानी बमाको समेत कई शहरों में आतंकियों ने एक साथ बड़े हमले किए हैं. सेना और हथियारबंद गुटों के बीच भीषण जंग जारी है. इन हमलों ने देश के सुरक्षा दावों की पोल खोल दी है. रूस की मदद और सैन्य शासन के बावजूद माली में हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही है. हजारों लोग घर छोड़कर भागने को मजबूर हैं.
बिना चुनाव राष्ट्रपति बने गोइता के लिए खतरे की घंटी, माली में आतंकी हमलों ने हिला दी सत्ता. (Photo : Reuters)
माली की राजधानी बमाको शनिवार को धमाकों और गोलियों की तड़तड़ाहट से दहल गई. देश की सेना ने बताया कि वे ‘आतंकवादी गुटों’ के खिलाफ एक बड़ा ऑपरेशन चला रहे हैं. आतंकियों ने राजधानी बमाको और देश के कई दूसरे हिस्सों में सैन्य ठिकानों को एक साथ निशाना बनाया है. सेना के मुताबिक इन हमलावरों की पहचान अभी तक नहीं हो पाई है. चश्मदीदों ने बताया कि बमाको के अलावा गाओ, किदाल और सेवारे जैसे प्रमुख शहरों में भी भारी गोलाबारी हुई है. सेना ने एक आधिकारिक बयान में कहा है कि अज्ञात आतंकी गुटों ने बैरकों और रणनीतिक ठिकानों पर हमला किया है. फिलहाल किसी भी आतंकी संगठन ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है. बमाको के बाहरी इलाके काटी में सबसे भीषण संघर्ष देखा गया है.
काटी में क्यों मची है सबसे ज्यादा अफरातफरी?
काटी वही इलाका है जहां माली के सैन्य नेता जनरल असिमी गोइता का निवास स्थान है. स्थानीय लोगों ने बताया कि यहां घंटों तक दोनों तरफ से भारी फायरिंग हुई है. सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में कई घरों को नुकसान पहुंचते देखा जा सकता है. लोग जान बचाने के लिए घरों में दुबके हुए हैं और सड़कें पूरी तरह सुनसान हैं. राजधानी के आसमान में सेना के हेलीकॉप्टर गश्त लगा रहे हैं. इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास भी सुरक्षा बढ़ा दी गई है क्योंकि आतंकी वहां भी पहुंचने की कोशिश कर रहे थे.
माली में सुरक्षा संकट गहराता जा रहा
माली पिछले एक दशक से भी ज्यादा समय से सुरक्षा संकट से जूझ रहा है. यहां अल-कायदा और इस्लामिक स्टेट जैसे खतरनाक आतंकी संगठनों का जाल फैला हुआ है. इसके अलावा कई अलगाववादी और अपराधी गुट भी सक्रिय हैं. साल 2020 और 2021 में हुए तख्तापलट के बाद से देश की कमान सेना के हाथ में है. वर्तमान सैन्य सरकार ने फ्रांस जैसे पश्चिमी देशों से दूरी बना ली है. अब माली सुरक्षा के लिए रूस के साथ नजदीकी बढ़ा रहा है.
रूसी मदद के बाद भी क्यों नहीं रुक रही हिंसा?
साल 2021 से रूसी वैगनर ग्रुप माली की सेना की मदद कर रहा था. 2025 में इनका मिशन पूरा होने के बाद रूसी रक्षा मंत्रालय के तहत ‘अफ्रीका कॉर्प्स’ ने इसकी जगह ली है. रूस की मौजूदगी के बावजूद जिहादी गुट लगातार बुनियादी ढांचे और रसद मार्गों पर हमले कर रहे हैं. इसके साथ ही देश में राजनीतिक आजादी पर भी पाबंदी लगा दी गई है. राजनीतिक दलों के चुनाव लड़ने पर रोक है और जनरल गोइता ने बिना चुनाव के खुद को 5 साल के लिए राष्ट्रपति घोषित कर दिया है. इस हिंसा ने आम लोगों की कमर तोड़ दी है और हजारों लोग पड़ोसी देशों में शरण लेने को मजबूर हैं.
About the Authorदीपक वर्माDeputy News Editor
दीपक वर्मा हिंदी के डिजिटल न्यूजरूम में डिप्टी न्यूज़ एडिटर के रूप में कार्यरत हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक से भी ज्यादा का अनुभव रखने वाले दीपक मुख्य रूप से विज्ञान, राजनीति और भारत के आंतरिक घ…और पढ़ें
अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज
खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में
सबमिट करें
First Published :
April 25, 2026, 16:58 IST



