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‘हम आतंकवादी नहीं…’ एक्स पर इस शख्स ने ऐसा क्या लिख दिया, जो कांग्रेस की सरकार ने ठोक दिया UAPA

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एक्स पर इस शख्स ने ऐसा क्या लिख दिया, जो कांग्रेस की सरकार ने ठोक दिया UAPA

Last Updated:April 28, 2026, 14:56 IST

क्या किसी के लिखने भर से उस पर बेहद सख्त आतंक रोधी कानून यूएपीए लगाया जा सकता है. यह सवाल सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर छाया हुआ है. कांग्रेस सरकार की इस कार्रवाई की लोग खूब आलोचना कर रहे हैं. वहीं इस पुलिसिया कार्रवाई पर ‘तेलुगु स्क्राइब’ ने जवाब दिया है.एक्स पर इस शख्स ने ऐसा क्या लिख दिया, जो कांग्रेस की सरकार ने ठोक दिया UAPAZoomतेलंगाना पुलिस ने ‘तेलुगु स्क्राइब’ नाम के एक्स हैंडल के खिलाफ बेहद सख्त कानून यूएपीए ठोंक दिया है.

तेलंगाना में एक सोशल मीडिया अकाउंट के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई ने सियासी और मीडिया हलकों में बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है. तेलंगाना पुलिस ने ‘तेलुगु स्क्राइब’ नाम के एक्स हैंडल के खिलाफ बेहद सख्त आतंक रोधी कानून यूएपीए ठोक दिया है, जिसे लेकर विपक्ष और पत्रकारों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 18 अप्रैल को काउंटर इंटेलिजेंस (CI) सेल के डीआईजी आर भास्करन ने एक्स कॉर्पोरेशन को नोटिस भेजा. इस नोटिस में BNSS की धारा 94 के साथ-साथ यूएपीए की धारा 43F का हवाला देते हुए ‘तेलुगु स्क्राइब’ हैंडल से जुड़ी जानकारी मांगी गई है. यही कदम विवाद की जड़ बन गया है, क्योंकि यूएपीए आमतौर पर आतंकवाद और देश की सुरक्षा से जुड़े मामलों में इस्तेमाल किया जाता है.

इस कार्रवाई के खिलाफ विपक्षी दल बीआरएस ने सरकार पर निशाना साधा है. पार्टी नेता और पूर्व आईपीएस अधिकारी आरपी प्रवीण कुमार ने सीधे मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी Revanth Reddy से सवाल किया कि क्या अब पत्रकार भी आतंकवादी नजर आने लगे हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार आलोचनात्मक आवाजों को दबाने के लिए कठोर कानूनों का इस्तेमाल कर रही है.

पत्रकारों की तरफ से भी इस मुद्दे पर नाराजगी सामने आई है. वरिष्ठ पत्रकार आवेश तिवारी ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि किसी के लिखने भर से उस पर यूएपीए लगाने की बात करना बेहद चिंताजनक है. वहीं खुद को पत्रकार बताने वाली अनुशा रवि सूद ने भी इस कदम को कानून के दुरुपयोग का उदाहरण बताया. उन्होंने कहा कि अगर पहले ‘तेलुगु स्क्राइब’ के कुछ कंटेंट पर आपत्ति थी, तो भी इस तरह के कड़े कानून का इस्तेमाल उचित नहीं है.

सोशल मीडिया पर भी इस कार्रवाई को लेकर बहस तेज हो गई है. कई यूजर्स ने इसे अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला बताया, तो कुछ ने सरकार के समर्थन में तर्क दिए. समर्थकों का कहना है कि ‘तेलुगु स्क्राइब’ एक अनाम प्लेटफॉर्म है, जिस पर आपत्तिजनक, भ्रामक और भड़काऊ सामग्री पोस्ट करने के आरोप पहले से हैं. ऐसे में पुलिस द्वारा पहचान से जुड़ी जानकारी मांगना एक सामान्य कानूनी प्रक्रिया हो सकती है.

इस बीच ‘तेलुगु स्क्राइब’ ने खुद भी इस नोटिस पर प्रतिक्रिया दी है. हैंडल ने पोस्ट कर कहा, ‘हम आतंकवादी नहीं हैं.’ साथ ही पुलिस की कार्रवाई को ‘सत्ता का दुरुपयोग’ बताते हुए कहा कि उनके सभी कंटेंट सार्वजनिक और कानूनी दायरे में हैं. हैंडल ने यह भी कहा कि वह लोगों की आवाज उठाने का काम जारी रखेगा और सरकार से सवाल पूछता रहेगा.

फिलहाल पुलिस की ओर से इस मामले में कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन यह साफ है कि यूएपीए जैसी सख्त धारा के इस्तेमाल को लेकर बहस अब और तेज होने वाली है. मामला सिर्फ एक सोशल मीडिया अकाउंट तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह अभिव्यक्ति की आजादी, कानून के इस्तेमाल और सत्ता बनाम मीडिया के रिश्ते पर भी बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है.

About the AuthorSaad Omar

An accomplished digital Journalist with more than 13 years of experience in Journalism. Done Post Graduate in Journalism from Indian Institute of Mass Comunication, Delhi. After Working with PTI, NDTV and Aaj T…और पढ़ें

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Location :

Hyderabad,Telangana

First Published :

April 28, 2026, 14:56 IST

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