Rajasthan

Kota News : 13 किलोमीटर भटक कर आए, पर स्वाद ने दिल जीत लिया… कोटा की इस कचौड़ी का हर कोई दीवाना, सीएम भी मुरीद

Last Updated:July 09, 2026, 19:24 IST

Kota Ki Famous Kachori : कोटा की जय अंबे कचौड़ी अपने लाजवाब स्वाद के लिए मशहूर है. ग्राहक और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा भी इसकी तारीफ कर चुके हैं. 40 साल से यह दुकान पारंपरिक स्वाद बनाए हुए है. गुना से ही आईं मंजू तोमर ने कहा- यहां की कचौड़ी बहुत ही बेहतरीन है. हमने यहां बैठकर खाई भी है और घर ले जाने के लिए पैक भी करवाई है.

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कोटा. कोटा शहर सिर्फ कोचिंग स्टूडेंट्स ही नहीं, बल्कि अपने लाजवाब खान-पान के लिए भी मशहूर है. यहां की कोटा कचौड़ी का स्वाद ऐसा है कि जो एक बार चख ले, वह इसका मुरीद हो जाता है. लोकल 18 की टीम ने कोटा की एक प्रतिष्ठित कचौड़ी की दुकान पर पहुंचकर दुकान संचालक और दूर-दूर से आए ग्राहकों से बातचीत की. सभी ने इसके स्वाद की जमकर तारीफ की.

दुकान पर कचौड़ी का स्वाद ले रहे मध्य प्रदेश के गुना जिले के निवासी संदीप सिंह तोमर ने बताया, “मैं गुना से अपनी बेटी को अस्पताल में दिखाने के लिए कोटा आया था. वहां लोगों के बीच चर्चा हो रही थी कि जय अंबे की कचौड़ी बहुत स्वादिष्ट होती है. हम करीब 12 से 13 किलोमीटर घूमकर और थोड़ा रास्ता भटककर यहां पहुंचे. लेकिन यहां कचौड़ी और समोसा खाने के बाद जो स्वाद मिला, उससे हमारी पूरी थकान दूर हो गई. मैं पूरे देश में घूमता हूं. हमारे शहर में भी अच्छी कचौड़ी मिलती है, लेकिन यहां की बात वाकई अलग है. यहां तक आना पूरी तरह सफल रहा.”

कचौड़ी के स्वाद पर लोगों ने क्या कहा?गुना से ही आईं मंजू तोमर ने कहा, “यहां की कचौड़ी बहुत ही बेहतरीन है. हमने यहां बैठकर खाई भी है और घर ले जाने के लिए पैक भी करवाई है.” वहीं जयपुर से आए आशीष ने बताया, “जब भी हम इस रास्ते से गुजरते हैं, तो हवा में फैलती कचौड़ी की खुशबू हमें यहां आने के लिए मजबूर कर देती है. इसकी महक ऐसी है कि बिना खाए आगे बढ़ना मुश्किल हो जाता है.”

क्या है कोटा की कचौड़ी की खासियत?दुकान संचालक शैलेंद्र जैन बताते हैं कि कोटा की कचौड़ी यहां के लोगों की दिनचर्या का अहम हिस्सा है. लोग इसे सुबह के नाश्ते से लेकर दोपहर के भोजन और रात के खाने तक पसंद करते हैं. उनका कहना है कि यहां के पानी और पारंपरिक तरीके से बनने के कारण इस कचौड़ी का स्वाद सबसे अलग होता है. साथ ही इसकी शुद्धता और बेहतरीन क्वालिटी से कभी समझौता नहीं किया जाता. उन्होंने बताया कि इसमें कुछ खास मसालों का इस्तेमाल किया जाता है, जो इसका स्वाद और बढ़ा देते हैं. कचौड़ी के भीतर मूंग की दाल का मसाला भरा जाता है, जिसमें बेसन, चुनिंदा गरम मसाले और हींग का भरपूर उपयोग होता है. हींग और मसालों का यही संतुलन इसे तीखा और लाजवाब स्वाद देता है.

मुख्यमंत्री भी कर चुके हैं तारीफशैलेंद्र जैन ने बताया कि आम लोगों और पर्यटकों के अलावा कई बड़े नेता भी उनकी कचौड़ी के स्वाद के मुरीद हैं. कुछ समय पहले राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का काफिला यहां से गुजर रहा था. दुकान पर लगी भीड़ देखकर वह भी रुक गए. उन्होंने यहां की कचौड़ी का स्वाद लिया और इसकी जमकर सराहना की.

40 साल से बरकरार है वही स्वादशैलेंद्र जैन ने बताया कि जय अंबे कचौड़ी की शुरुआत साल 1985 में हुई थी. इस पारंपरिक व्यवसाय को अब करीब 40 साल पूरे हो चुके हैं. दादाजी के समय से शुरू हुए इस कारोबार को अब तीसरी पीढ़ी आगे बढ़ा रही है. उनके पिता, शैलेंद्र जैन और उनके बड़े भाई आज भी उसी पारंपरिक स्वाद और गुणवत्ता को बनाए हुए हैं. उन्होंने बताया कि पहले उनका परिवार गुलाब बाड़ी क्षेत्र में नमकीन का कारोबार करता था, लेकिन पिछले 40 वर्षों से इसी स्थान पर अपनी कचौड़ी के स्वाद से लोगों का दिल जीत रहा है.

About the AuthorAnand Pandey

आनंद पाण्डेय वर्तमान में हिंदी (राजस्थान डिजिटल) में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले 5 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाते हुए उन्होंने राजनीति, अपराध और लाइफ…और पढ़ें

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