Chittorgarh News: जर्जर स्कूल में डर के साए में पढ़ रहे मासूम, कभी भी गिर सकता है छत का प्लास्टर

Last Updated:August 11, 2026, 17:19 IST
चित्तौड़गढ़ के कोजूँदा गांव के सरकारी स्कूल में 12 में से 10 कमरे जर्जर हो चुके हैं. कहीं प्लास्टर उखड़ रहा है तो कहीं छत से सरिए बाहर झांक रहे हैं. बारिश में कमरों से पानी टपकता है और हादसे का खतरा बना हुआ है. मजबूरी में बच्चे बरामदों और खुले आसमान के नीचे पढ़ने को मजबूर हैं.
चित्तौड़गढ़. जिले के गंगरार उपखंड की शादी ग्राम पंचायत के कोजूंदा गांव स्थित सरकारी विद्यालय में इन दिनों विद्यार्थी शिक्षा से ज्यादा अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित नजर आ रहे हैं. विद्यालय भवन की हालत इतनी जर्जर हो चुकी है कि यहां पढ़ने वाले मासूम बच्चे हर दिन डर के साए में पढ़ाई करने को मजबूर हैं. विद्यालय में कुल 12 कमरे हैं, जिनमें से करीब 10 कमरे जर्जर हालत में पहुंच चुके हैं. विद्यालय के जर्जर कमरों में जगह-जगह से प्लास्टर उखड़ चुका है. कई स्थानों पर छत से सरिए बाहर निकल आए हैं, एक कमरे की बीम में भी क्रेक दिखाई दे रहे हैं, जबकि कमरों की दीवारों में गहरी दरारें पड़ चुकी हैं. बारिश के दौरान स्थिति और भी गंभीर हो जाती है, कमरों की छत से पानी टपकने लगता है और कभी भी प्लास्टर का हिस्सा टूटकर नीचे गिरने का खतरा बना रहता है.
जर्जर कमरों के चलते विद्यालय प्रबंधन के सामने बच्चों को सुरक्षित बैठाने की बड़ी समस्या खड़ी हो गई है. मजबूरी में छात्र-छात्राओं को बरामदों में और कई बार खुले आसमान के नीचे बैठाकर पढ़ाना पड़ रहा है. बारिश या खराब मौसम के दौरान बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होने के साथ-साथ उनकी सुरक्षा पर भी सवाल खड़े हो जाते हैं.
एक कमरे में कई कक्षाओं की पढ़ाई
विद्यालय में कमरों की कमी और जर्जर भवन के कारण पढ़ाई की व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है. स्थिति यह है कि एक ही कमरे में कक्षा 1 से 5 तक के विद्यार्थियों को बैठाकर पढ़ाया जा रहा है. वहीं दूसरे कमरे में कक्षा 10 से 12वीं तक के विद्यार्थियों को पढ़ाने की व्यवस्था की गई है, इससे विद्यार्थियों की पढ़ाई का माहौल भी प्रभावित हो रहा है. ग्रामीणों और अभिभावकों के लिए सबसे बड़ा सवाल बच्चों की सुरक्षा का है. जर्जर भवन के बीच विद्यार्थियों को पढ़ाना किसी बड़े हादसे को न्योता देने जैसा साबित हो सकता है. ऐसे में जरूरत है कि जिम्मेदार विभाग विद्यालय भवन का जल्द निरीक्षण कर जर्जर कमरों की मरम्मत या नए भवन निर्माण की दिशा में ठोस कदम उठाए, ताकि कोजूंदा गांव के बच्चों को डर के साए में नहीं, बल्कि सुरक्षित माहौल में शिक्षा मिल सके.
About the AuthorMonali Paul
नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…
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Chittaurgarh,Chittaurgarh,Rajasthan
First Published :
August 11, 2026, 17:19 IST



