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बॉलीवुड से क्यों अलग है साउथ इंडस्ट्री? मुंबई छोड़ चुके अनुराग कश्यप ने खोली पोल, बताया सबसे बड़ा फर्क

Last Updated:August 16, 2026, 06:53 IST

Anurag Kashyap- बॉलीवुड की राजनीति से तंग आकर अनुराग कश्यप इंडस्ट्री से किनारा कर चुके हैं. उन्होंने मुंबई छोड़ दिया है और इसके पीछे उन्होंने टॉक्सिक कल्चर को बताया था. अब एक बार फिर डारेक्टर ने साउथ और बॉलीवुड के बीच का फर्क बताते हुए रीजनल सिनेमा की खूबी गिनवाई हैं. बॉलीवुड से क्यों अलग है साउथ इंडस्ट्री? अनुराग कश्यप ने खोली पोलZoomअनुराग कश्यप ने बताया बॉलीवुड और साउथ में क्या है फर्क.

नई दिल्ली. अनुराग कश्यप फिल्म इंडस्ट्री में बेबाकी से अपनी राय रखने के लिए जाने-जाते हैं. वो हर मुद्दे पर खुलकर बात करते हैं. फिल्म डायरेक्टर ने बताया था कि वो बॉलीवुड की पॉलिटिक्स से तंग आ गए हैं और इसी वजह से इंडस्ट्री छोड़ रहे हैं. वो अब मुंबई से दूर हो चुके हैं. लेटेस्ट इंटरव्यू में अनुराग कश्यप ने बॉलीवुड और साउथ फिल्म इंडस्ट्री के बीच का फर्क बताया. वो कहते हैं कि बॉलीवुड में लोग झुक जाते हैं जबकि साउथ में ऐसा कम देखने को मिलता है.

उन्होंने बॉलीवुड और सत्ता के बीच के रिश्ते पर अपनी सोच साझा की है. उनका कहना है कि इंडस्ट्री में कुछ लोग परिस्थितियों के चलते व्यवस्था के साथ समझौता कर लेते हैं, लेकिन एक बार ऐसा करने के बाद उनके लिए पीछे हटना आसान नहीं रहता. खासकर तब, जब इन फैसलों के बदले उन्हें मिलने वाले फायदे वे स्वीकार कर चुके हों.

अनुराग कश्यप का दावा बॉलीवुड के लोग करते हैं समझौता

जेनिस सिक्वेरा के साथ बातचीत में अनुराग कश्यप ने इस पूरे मुद्दे पर विस्तार से अपनी राय रखी. उन्होंने यह भी बताया कि उन्हें नहीं लगता कि फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े लोग हमेशा अपनी इच्छा से इस तरह के समझौते करते हैं. उनके मुताबिक, कई बार परिस्थितियां इंसान को ऐसा कदम उठाने के लिए मजबूर करती हैं. लेकिन परेशानी तब शुरू होती है, जब पहला कदम उठाने के बाद उस रास्ते से वापस लौटने का विकल्प मुश्किल होता जाता है.

फिल्ममेकर ने अपनी बात रखते हुए कहा कि उन्हें नहीं लगता कि कोई भी व्यक्ति जानबूझकर हमेशा के लिए झुकने का फैसला करता है. लेकिन एक बार जब वह समझौता कर लेता है, तो आगे उसी स्थिति से बाहर निकलना कठिन हो सकता है. उनके मुताबिक, पहली ‘हां’ के साथ मिलने वाले फायदे बाद में उस फैसले से दूरी बनाने की राह में सबसे बड़ी बाधा बन जाते हैं.

रीजनल सिनेमा की गिनाई ताकत

अनुराग कश्यप ने बॉलीवुड और साउथ फिल्म इंडस्ट्री के बीच भी अंतर की ओर इशारा किया. उनका मानना है कि रीजनल सिनेमा कुछ मामलों में ऐसे दबावों के प्रति कम संवेदनशील दिखाई देता है. वो बताते हैं कि रीजनल सिनेमा की जड़ें इतनी मजबूत हैं कि वो पूरी तरह हिंदी ऑडियंस पर निर्भर नहीं करते हैं. हालांकि, उन्होंने इसे किसी एक व्यक्ति या पूरी इंडस्ट्री पर लागू होने वाले नियम के तौर पर पेश नहीं किया, बल्कि अपने अनुभव और नजरिए के आधार पर बात रखी.

About the AuthorPranjul SinghSub-Editor

From the precision of chemistry labs to the vibrant chaos of a newsroom, my journey has been about finding the perfect formula for a great story. A graduate in Chemistry Honours from the historic Scottish Churc…

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New Delhi,Delhi

First Published :

August 16, 2026, 06:53 IST

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