भयमुक्त और निष्पक्ष चुनाव संविधान का बेसिक स्ट्रक्चर – सुप्रीम कोर्ट | Free and fair polls part of basic structure Supreme Court

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भयमुक्त और निष्पक्ष चुनाव संविधान का बेसिक स्ट्रक्चर – सुप्रीम कोर्ट
Last Updated:October 21, 2026, 13:22 IST
Supreme Court News: वाईएस जगनमोहन रेड्डी की पार्टी ने पहले हाईकोर्ट का रुख कर पर्याप्त सुरक्षा वाले वैकल्पिक नामांकन केंद्र उपलब्ध कराने की मांग की थी. कोर्ट ने 15 अक्टूबर को व्यापक राहत देने से इनकार करते हुए धमकियों का सामना कर रहे उम्मीदवारों को वैकल्पिक स्थान पर नामांकन की अनुमति के लिए निर्वाचन अधिकारियों से संपर्क करने की छूट दी थी. इसके बाद यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा.सुप्रीम कोर्ट की तरफ से चुनाव को लेकर अहम बात कही गई है. (फाइल फोटो)
Supreme Court News: सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार 21 अक्टूबर 2026 को चुनाव को लेकर अहम बात कही है. आंध्र प्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग (एसईसी) को निर्देश दिया कि वह शहरी स्थानीय निकाय चुनावों में वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) के उम्मीदवारों को नामांकन दाखिल करने से रोकने के आरोपों की जांच करे और गुरुवार तक फैसला करे कि प्रभावित नगरपालिकाओं में नामांकन की समयसीमा बढ़ाई जानी चाहिए या नहीं. जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने निर्वाचन आयोग के फैसले तक चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों की अंतिम सूची 25 अक्टूबर तक जारी नहीं करने का आदेश दिया. पीठ ने कहा कि जहां भी नामांकन की समयसीमा बढ़ाई जाती है, वहां उम्मीदवारों को निर्वाचन आयोग के फैसले के प्रकाशन के बाद नामांकन दाखिल करने के लिए कम से कम 48 घंटे का समय दिया जाना चाहिए. इसके लिए चुनाव अधिसूचना में आवश्यक संशोधन भी करना होगा. शिकायत मिलने और सबूत पेश करने के बाद अदालतें चुप नहीं रह सकती हैं.
सुप्रीम कोर्ट ने राज्य के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को नामांकन केंद्रों पर पर्याप्त सुरक्षा सुनिश्चित करने का निर्देश दिया. इसमें पुलिसकर्मियों की तैनाती और सीसीटीवी कैमरों की व्यवस्था शामिल है. डीजीपी को इस संबंध में अनुपालन रिपोर्ट भी दाखिल करनी होगी. अदालत ने संबंधित जिलों के पुलिस अधीक्षकों को वाईएसआरसीपी उम्मीदवारों को सुरक्षा मुहैया कराने तथा जरूरत पड़ने पर जिला मुख्यालयों में कलेक्टरों के माध्यम से नामांकन पत्र स्वीकार करने के निर्देश भी दिए.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव संविधान की मूल संरचना का हिस्सा हैं. चुनाव लड़ने के लिए नामांकन दाखिल करने का अधिकार चुनावी प्रक्रिया का अभिन्न अंग है. अदालत ने कहा कि जब किसी प्रमुख विपक्षी दल की ओर से नामांकन दाखिल करने में बाधा डालने के आरोप लगाए जाते हैं और चुनाव प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही इस संबंध में शिकायतों के साथ साक्ष्य प्रस्तुत किए जाते हैं, तो संवैधानिक अदालतें पूरी तरह चुप नहीं रह सकतीं.
सुप्रीम कोर्ट ने आगे कहा कि चुनाव प्रक्रिया में विश्वास पैदा करना संवैधानिक लोकतंत्र को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है. अदालत ने निर्वाचन आयोग से वाईएसआरसीपी और अन्य उम्मीदवारों की शिकायतों का दस्तावेजी तथा इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के आधार पर गुण-दोष के अनुसार आकलन करने और पात्र उम्मीदवारों को चुनाव लड़ने का अवसर सुनिश्चित करने के लिए उचित कदम उठाने को कहा. यह निर्देश वाईएसआरसीपी की उस विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) पर दिए गए, जिसमें पार्टी ने आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें नामांकन की समयसीमा बढ़ाने से इनकार कर दिया गया था.
वाईएसआरसीपी ने आरोप लगाया था कि 16 अक्टूबर को नामांकन प्रक्रिया शुरू होने के बाद पुंगनूर, रायचोटी, कडपा और तिरुपति समेत कई क्षेत्रों में उसके उम्मीदवारों को नामांकन दाखिल करने से रोका गया. याचिका के अनुसार, कडपा में एक उम्मीदवार के नामांकन पत्र छीनकर फाड़ दिए गए, जबकि तिरुपति में कई उम्मीदवारों को संबंधित निर्वाचन अधिकारियों के कक्षों में प्रवेश नहीं करने दिया गया. पार्टी ने यह भी आरोप लगाया कि नामांकन दाखिल करने जा रहे उसके कार्यकर्ताओं और सांसद पी.वी. मिधुन रेड्डी पर हमला किया गया.
About the AuthorManish Kumar
बिहार, उत्तर प्रदेश और दिल्ली से प्रारंभिक के साथ उच्च शिक्षा हासिल की. झांसी से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में PG डिप्लोमा किया. Hindustan Times ग्रुप से प्रोफेशनल कॅरियर की शु…
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New Delhi,Delhi
First Published :
October 21, 2026, 13:22 IST
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वाईएसआरसीपी ने आरोप लगाया था कि 16 अक्टूबर को नामांकन प्रक्रिया शुरू होने के बाद पुंगनूर, रायचोटी, कडपा और तिरुपति समेत कई क्षेत्रों में उसके उम्मीदवारों को नामांकन दाखिल करने से रोका गया. याचिका के अनुसार, कडपा में एक उम्मीदवार के नामांकन पत्र छीनकर फाड़ दिए गए, जबकि तिरुपति में कई उम्मीदवारों को संबंधित निर्वाचन अधिकारियों के कक्षों में प्रवेश नहीं करने दिया गया. पार्टी ने यह भी आरोप लगाया कि नामांकन दाखिल करने जा रहे उसके कार्यकर्ताओं और सांसद पी.वी. मिधुन रेड्डी पर हमला किया गया.
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