Rajasthan

बिजली सुधार की दिशा में बड़ा कदम! चौमूं में 63 करोड़ का हाईटेक ट्रांसफॉर्मर टेस्टिंग लैब बनने जा रहा है

Last Updated:May 02, 2026, 14:16 IST

Chomu Transformer Testing Lab: जयपुर के चौमूं क्षेत्र में बिजली व्यवस्था को मजबूत करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया जा रहा है. यहां 63.40 करोड़ रुपये की लागत से ट्रांसफॉर्मर टेस्टिंग लैब और पावर प्लांट का निर्माण किया जाएगा. इस अत्याधुनिक परियोजना का उद्देश्य बिजली उपकरणों की गुणवत्ता जांचना और पावर सप्लाई को अधिक विश्वसनीय बनाना है. यह लैब राज्य में ट्रांसफॉर्मर की टेस्टिंग और मेंटेनेंस को बेहतर बनाएगी, जिससे बिजली कटौती और तकनीकी खराबियों में कमी आने की उम्मीद है. परियोजना को अगले 18 महीनों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. इस पहल से न केवल जयपुर बल्कि पूरे राजस्थान की बिजली व्यवस्था को मजबूती मिलेगी और उपभोक्ताओं को बेहतर सेवा मिल सकेगी.

विद्युत विभाग के अनुसार, इस परियोजना को शुरू करने के आदेश भी जारी किया जा चुका है और अगले एक महीने के भीतर निर्माण कार्य शुरू होने की संभावना है. लगभग 18 महीनों में यह जीएसएस बनकर तैयार हो जाएगा. इसके लिए मंडा क्षेत्र में 36,615 वर्ग मीटर भूमि आवंटित की गई है.

जयपुर ग्रामीण के चौमूं क्षेत्र में विद्युत ढांचे को मजबूत बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया जा रहा है. मंडा रीको औद्योगिक क्षेत्र में जल्द ही 220 केवी ग्रिड सब स्टेशन (जीएसएस) का निर्माण शुरू होगा. करीब 63.40 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाला यह जीएसएस चौमूं और निवाणा के बाद क्षेत्र का तीसरा 220 केवी जीएसएस होगा. इस परियोजना से न केवल औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि हजारों उपभोक्ताओं को भी बेहतर और बिजली आपूर्ति आसन हो जाएगी.

वहीं, ट्रांसफॉर्मर टेस्टिंग लेबोरेट्री के लिए भी तेजी से काम आगे बढ़ रहा है. इस परियोजना के तहत पहले ही 10,000 वर्ग मीटर भूमि आवंटित की जा चुकी थी, जहां बुनियादी निर्माण कार्य पूरा हो चुका है. हाल ही में स्विच यार्ड के लिए अतिरिक्त 5,000 वर्ग मीटर भूमि और दी गई है. यह लैब देश में अपनी तरह की पहली सुविधा होगी, जहां पावर और डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर से जुड़े विभिन्न उपकरणों की जांच एक ही स्थान पर की जा सकेगी.

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इस जीएसएस की सबसे खास बात यह है कि यह भारत सरकार के एक बड़े प्रोजेक्ट से जुड़ा हुआ है. मंडा रीको क्षेत्र में देश की पहली ट्रांसफॉर्मर टेस्टिंग लेबोरेट्री स्थापित की जा रही है, जिसे इस जीएसएस से विद्युत आपूर्ति मिलेगी.

यहां 10 एमवीए क्षमता तक के ट्रांसफॉर्मरों का शॉर्ट सर्किट परीक्षण और 50 एमवीए तक के ट्रांसफॉर्मरों की टेस्टिंग की सुविधा उपलब्ध होगी. साथ ही पावर ट्रांसफॉर्मर, डिस्ट्रीब्यूशन ट्रांसफॉर्मर, करंट ट्रांसफॉर्मर, रेलवे ट्रैक्शन ट्रांसफॉर्मर, एचटी केबल और कंडक्टर जैसे उपकरणों की भी जांच की जाएगी.

जीएसएस के चालू होते ही इस अत्याधुनिक लैब में परीक्षण कार्य भी शुरू हो जाएगा. अधिकारियों के अनुसार, इस नई सुविधा से मंडा और कालाडेरा औद्योगिक क्षेत्रों की सैकड़ों फैक्ट्रियों को सीधा लाभ मिलेगा. कालाडेरा रीको क्षेत्र की लगभग 500 और मंडा क्षेत्र की करीब 125 फैक्ट्रियों को बेहतर बिजली आपूर्ति मिल सकेगी. इसके अलावा, क्षेत्र के 33/11 केवी के 6 जीएसएस से जुड़े करीब 7,000 उपभोक्ताओं को भी राहत मिलेगी. खासतौर पर कम वोल्टेज और अनियमित बिजली आपूर्ति जैसी समस्याओं से निजात मिलने की उम्मीद है.

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