बच्चों को संभालना अब आसान! ऑनलाइन ‘परवरिश की पाठशाला’ में लाखों माता-पिता सीख रहे नए तरीके, NRI भी जुड़े

Last Updated:May 02, 2026, 15:07 IST
Parvarish Ki Pathshala: ‘परवरिश की पाठशाला’ नामक ऑनलाइन पेरेंटिंग पहल तेजी से लोकप्रिय हो रही है, जिसमें अब तक 3 लाख से अधिक परिवार जुड़ चुके हैं. इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से माता-पिता को बच्चों की बेहतर परवरिश, व्यवहार समझने और आधुनिक चुनौतियों से निपटने के तरीके सिखाए जा रहे हैं. खास बात यह है कि इस कार्यक्रम से केवल भारत ही नहीं, बल्कि विदेशों में रहने वाले NRI परिवार भी बड़ी संख्या में जुड़ रहे हैं. डिजिटल माध्यम से संचालित यह पहल परिवारों को सकारात्मक और प्रभावी पेरेंटिंग के लिए प्रशिक्षित कर रही है. इसमें विशेषज्ञों द्वारा गाइडेंस, सेशंस और इंटरैक्टिव क्लासेस के जरिए बच्चों के मानसिक, भावनात्मक और सामाजिक विकास पर फोकस किया जाता है. बदलते समय में यह पहल माता-पिता के लिए एक उपयोगी मार्गदर्शक बनकर उभर रही है, जो नई पीढ़ी को बेहतर दिशा देने में मदद कर रही है.
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बाड़मेर. डिजिटल दौर में जहां बच्चों की परवरिश माता-पिता के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है वहीं ‘परवरिश की पाठशाला’ एक नई उम्मीद बनकर सामने आई है. मोबाइल की लत, पढ़ाई में रुचि की कमी और जिद्दी व्यवहार जैसी समस्याओं से जूझ रहे परिवारों को यह पहल ऑनलाइन क्लास के जरिए समाधान दे रही है.
बदलती जीवनशैली और डिजिटल एक्सपोजर ने बच्चों के व्यवहार को काफी प्रभावित किया है जिससे अभिभावकों के सामने नई चुनौतियां खड़ी हो गई हैं. आज के समय में हर घर की एक आम समस्या बन चुकी है बच्चों का मोबाइल में ज्यादा समय बिताना, पढ़ाई से दूरी बनाना और छोटी-छोटी बातों पर जिद करना. ऐसे में इनका हल अब “परवरिश की पाठशाला” में देखने को मिल रहा है. खास बात यह है कि अब तक करीब 3 लाख परिवार इससे जुड़ चुके हैं जिनमें विदेशों के परिवार भी शामिल हैं.
ऑनलाइन चलती है ‘परवरिश की पाठशाला’इस पहल के माध्यम से निःशुल्क ऑनलाइन क्लासेज आयोजित की जाती हैं जहां अभिभावकों को बच्चों की मनोविज्ञान समझने और सही तरीके से उन्हें मार्गदर्शन देने की ट्रेनिंग दी जाती है. ‘परवरिश की पाठशाला’, जिसकी शुरुआत ड़ॉ अनिल योगी ने की है और वे फेसबुक,इंस्टाग्राम और यूट्यूब से जरिए समस्या का समाधान कर रहे है.
3 लाख परिवार ‘परवरिश की पाठशाला’ से जुड़ेड़ॉ अनिल योगी के मुताबिक बच्चों के लिए भी विशेष मोटिवेशनल सेशन आयोजित किए जाते हैं जिनमें उन्हें लक्ष्य तय करने, समय प्रबंधन और आत्मविश्वास बढ़ाने के तरीके सिखाए जाते हैं. इससे बच्चे न केवल पढ़ाई में रुचि लेने लगते हैं बल्कि उनका व्यवहार भी संतुलित होने लगता है. परवरिश की पाठशाला’ से अब तक करीब 3 लाख परिवार जुड़ चुके हैं. इनमें भारत के अलावा विदेशों के परिवार भी शामिल हैं जो इस प्लेटफॉर्म के जरिए अपने बच्चों की परवरिश में सुधार ला रहे हैं.
बच्चे घंटों मोबाइल में लगे रहतेजहां पहले बच्चे घंटों मोबाइल में लगे रहते थे वहीं अब वे पढ़ाई और अन्य गतिविधियों में समय देने लगे हैं. साथ ही बच्चों और माता-पिता के बीच संवाद भी बेहतर हुआ है. परवरिश की पाठशाला में बच्चों को डांट-फटकार से नहीं बल्कि समझदारी और संवाद के जरिए कैसे संभाला जाए, बच्चों की जिद को कैसे सकारात्मक दिशा दी जाए,उनकी ऊर्जा को पढ़ाई और रचनात्मक गतिविधियों में कैसे लगाया जाए इन सभी विषयों पर विस्तार से जानकारी दी जाती है.
About the AuthorJagriti Dubey
Hi, I am Jagriti Dubey, a media professional with 6 years of experience in social media and content creation. I started my career with an internship at Gbn 24 news channel in 2019 and have worked with many repu…और पढ़ें
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