सुपरहिट मूवी देने के बाद बेले पापड़, 1 रोमांटिक ड्रामा ने खत्म किया 5 साल का वनवास, स्ट्रगलर से रातोंरात बन गई स्टार

Last Updated:May 10, 2026, 23:23 IST
एक्ट्रेस ने अपने करियर के शुरुआती स्ट्रगल पर खुलकर बात की, जिससे यह साफ होता है कि बॉलीवुड में ‘रातों-रात सफलता’ मिलना महज एक मिथक है. 2014 में फिल्म ‘फगली’ से डेब्यू करने के बाद उन्हें लंबे समय तक काम की कमी, बार-बार रिजेक्शन का सामना करना पड़ा. ‘एमएस धोनी’ की सफलता के बाद भी उनकी राह आसान नहीं हुई. साल 2019 में आई एक ब्लॉकबस्टर के बाद उनका पांच साल का वनवास खत्म हुआ. उन्होंने इन असफलताओं को अपना सबसे बड़ा गुरु माना.
नई दिल्ली: एंटरटेनमेंट की दुनिया में अपनी जगह बनाना कोई बच्चों का खेल नहीं है. अक्सर हमें लगता है कि कोई सितारा रातों-रात मशहूर हो गया, लेकिन असलियत में इसके पीछे सालों की मेहनत और कड़ा स्ट्रगल छिपा होता है. कियारा आडवाणी की कहानी भी कुछ ऐसी ही है. बहुत से लोग मानते हैं कि उनकी शुरुआत ‘एमएस धोनी’ से हुई, लेकिन सच तो यह है कि उन्होंने साल 2014 में फिल्म ‘फगली’ से बॉलीवुड में कदम रखा था, जो बॉक्स ऑफिस पर कुछ खास कमाल नहीं दिखा पाई थी.
कियारा ने एक पॉडकास्ट में अपनी पुरानी यादों को ताजा करते हुए बताया कि उनका करियर हमेशा ऊंचाइयों पर नहीं रहा. इंडस्ट्री में कई बार ऐसे दौर आए जब उनके पास काम नहीं था और भविष्य को लेकर दुविधा बनी हुई थी. खासकर तब, जब उनकी फिल्में फ्लॉप हो रही थीं. लेकिन कियारा ने हार मानने के बजाय हर असफलता को एक सबक की तरह लिया. उनका मानना है कि इन मुश्किल समय ने ही उन्हें एक बेहतर कलाकार के रूप में खुद को ढालने में मदद की.
कियारा ने बड़ी ईमानदारी से स्वीकार किया कि अपनी पहली फिल्म ‘फगली’ के पिटने के बाद उन्हें काम मिलना लगभग बंद हो गया था. हालांकि समीक्षकों ने उनके अभिनय की तारीफ की थी, लेकिन फिल्म के फ्लॉप होने का असर यह हुआ कि बड़े ऑफर्स नहीं आए. वे फिर से उसी दौर में पहुंच गईं जहां घंटों ऑडिशन देना, रिजेक्शन झेलना और फिर से कॉल आने का इंतजार करना ही उनकी जिंदगी बन गई थी. शुरुआत में जब आपकी फिल्म नहीं चलती, तो मौके बहुत कम हो जाते हैं.
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कियारा ने बताया, ‘फगली के बाद करियर एकदम रुक सा गया था क्योंकि फिल्म की ओपनिंग अच्छी नहीं थी. भले ही मेरी एक्टिंग को सराहा गया, लेकिन वह तारीफ काम में नहीं बदली. मुझे फिर से ऑडिशन के लिए कतारों में खड़ा होना पड़ा. जब आप नए होते हैं और आपकी फिल्में पैसा नहीं कमातीं, तो आपके पास चुनाव करने के विकल्प बहुत सीमित हो जाते हैं. उस वक्त सही मौका पाने का रास्ता बहुत लंबा और थका देने वाला होता है.’
कियारा ने इन सब बाधाओं के बावजूद अपनी हिम्मत नहीं टूटने दी. उन्होंने अपने जुनून को ठंडा नहीं होने दिया और हर निराशा से कुछ न कुछ नया सीखा. आज जब वे पीछे मुड़कर देखती हैं, तो उन कठिन दिनों के लिए शुक्रगुजार महसूस करती हैं. कियारा का कहना है कि उनके करियर के वे ‘लो फेज’ ही उनके सबसे बड़े शिक्षक रहे हैं. उन्हीं अनुभवों ने उन्हें मानसिक रूप से मजबूत और किसी भी स्थिति से लड़ने के लिए तैयार बनाया.
हैरानी की बात तो यह है कि ‘एमएस धोनी: द अनटोल्ड स्टोरी’ जैसी हिट फिल्म देने के बाद भी कियारा के लिए राहें आसान नहीं हुई थीं. उन्हें लगा था कि अब तो काम खुद चलकर आएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. वे बताती हैं कि धोनी के बाद भी कहानी वही थी—वही स्ट्रगल, वही ऑडिशन और वही भागदौड़. फिल्म हिट होने के बावजूद उन्हें अपनी पहचान बनाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाना पड़ रहा था और अच्छे रोल के लिए जद्दोजहद जारी थी.
कियारा के करियर ने रफ्तार पकड़ी 2019 में आई फिल्म ‘कबीर सिंह’ के बाद. उस ब्लॉकबस्टर सफलता के बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा. हालांकि उस मुकाम तक पहुंचने में उन्हें पूरे पांच साल लगे. इन पांच सालों में उन्होंने अनगिनत ऑडिशन दिए और कई बार रिजेक्शन का कड़वा घूंट पिया. कियारा का कहना है कि उस समय उनकी बस एक ही सोच थी कि ‘काम ही काम को लाएगा’ और उन्होंने पूरी शिद्दत से मेहनत करना जारी रखा.
कियारा आडवाणी आज बॉलीवुड की सबसे सफल अभिनेत्रियों में से एक हैं, लेकिन इसके पीछे रिजेक्शन की एक लंबी लिस्ट और सालों का धैर्य है. उनकी कहानी उन सभी लोगों के लिए प्रेरणा है जो स्ट्रगल कर रहे हैं. कियारा की ये बातें साबित करती हैं कि अगर आपमें अपनी असफलताओं से सीखने का जज्बा है, तो एक दिन दुनिया आपके कदम चूमेगी.
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