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Agriculture News: नागौर मंडी में बड़ा उलटफेर! सौंफ-जीरा के दाम आसमान पर, सरसों-चना ने बढ़ाई किसानों की टेंशन

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सौंफ-जीरा चमके, सरसों-चना फिसले! नागौर मंडी के नए भाव जानकर चौंक जाएंगे आप

Last Updated:April 25, 2026, 13:10 IST

Agriculture News: नागौर मंडी में इन दिनों फसलों के भावों में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है, जिससे किसानों के सामने नई चुनौतियां खड़ी हो गई हैं. खासतौर पर सौंफ और जीरा के दामों में तेज उछाल आया है, जिससे इन फसलों की खेती करने वाले किसानों को राहत मिली है. वहीं दूसरी ओर, सरसों और चना के भावों में गिरावट ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है. बाजार की इस अस्थिरता के कारण किसानों को अपनी फसल बेचने के फैसले में सावधानी बरतनी पड़ रही है. विशेषज्ञों का मानना है कि मांग और आपूर्ति के संतुलन में बदलाव के चलते यह स्थिति बनी है.

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नागौर: नागौर कृषि उपज मंडी में अप्रैल के बीच विभिन्न फसलों के भावों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला है. इस दौरान जहां जीरा और सौंफ जैसी मसाला फसलों में जबरदस्त तेजी दर्ज की गई, वहीं सरसों और चने की कीमतों में गिरावट ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है. मंडी के हालात बताते हैं कि बाजार में मांग और आपूर्ति के साथ-साथ मौसम और अंतरराष्ट्रीय कारकों का भी असर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है.

सबसे ज्यादा चर्चा सौंफ के भावों में आई तेजी को लेकर रही. 1 अप्रैल को सौंफ का अधिकतम भाव करीब 9,000 रुपए प्रति क्विंटल था, जो 10 अप्रैल तक बढ़कर 15,800 रुपए पहुंच गया. इसके बाद 13 अप्रैल को सौंफ ने 19,400 रुपए का रिकॉर्ड स्तर छू लिया. यानी महज दो सप्ताह में इसके भाव दोगुने से भी ज्यादा हो गए. इसी तरह जीरे में भी मजबूती बनी रही. महीने की शुरुआत में इसका भाव 22,500 रुपए था, जो 4 अप्रैल को बढ़कर 26,200 रुपए तक पहुंच गया. हालांकि बाद में यह कुछ स्थिर होकर 24,500 रुपए के आसपास कारोबार करता नजर आया.

अवकाश के कारण नीलामी बंदसौंफ और जीरा के भावों में हर तीसरे साल तेजी देखने को मिलती है. इसका मुख्य कारण किसानों की बुवाई का पैटर्न है. जब किसी फसल के भाव बढ़ते हैं तो किसान अगले दो वर्षों तक उसी फसल की अधिक बुवाई करते हैं, जिससे उत्पादन बढ़ जाता है और कीमतें गिरने लगती हैं. इसके बाद किसान बुवाई कम कर देते हैं, जिससे तीसरे साल अचानक मांग बढ़ने पर कीमतों में उछाल आ जाता है. इसके अलावा 7 और 11 अप्रैल को मौसम और अवकाश के कारण नीलामी बंद रहने से भी आवक प्रभावित हुई, जिससे भावों में तेजी को बल मिला.

सरसों के भावों में गिरावटदूसरी ओर, मूंग और चने के भावों में ज्यादा तेजी नहीं देखी गई. मूंग, जो 1 अप्रैल को 10,000 रुपए प्रति क्विंटल था, अब गिरकर 8,500 से 8,600 रुपए के बीच आ गया है. वहीं चना पूरे पखवाड़े 4,800 से 5,100 रुपए के बीच ही सीमित रहा, जो न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के आसपास है. तिलहन फसलों में सरसों के भावों में गिरावट ने किसानों को चिंता में डाल दिया है. 1 अप्रैल को सरसों का भाव 7,000 रुपए प्रति क्विंटल था, जो 14 अप्रैल तक घटकर लगभग 6,300 रुपए रह गया. यानी दो सप्ताह में करीब 700 रुपए की गिरावट दर्ज की गई.

विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार में बढ़ती आवक और अंतरराष्ट्रीय खाद्य तेलों की कीमतों का दबाव इसका प्रमुख कारण है. वहीं सफेद और काले तिल के भाव 9,500 से 10,500 रुपए के बीच स्थिर बने हुए हैं. अन्य फसलों में इसबगोल के भाव 13,500 से 14,400 रुपए के बीच बने हुए हैं, हालांकि इसमें हल्की मंदी का रुख है. ग्वार के भाव भी लगभग 5,300 रुपए प्रति क्विंटल पर स्थिर हैं.

About the AuthorJagriti Dubey

Hi, I am Jagriti Dubey, a media professional with 6 years of experience in social media and content creation. I started my career with an internship at Gbn 24 news channel in 2019 and have worked with many repu…और पढ़ें

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Location :

Nagaur,Rajasthan

First Published :

April 25, 2026, 13:10 IST

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