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apple farming | fruit processing business idea

Last Updated:April 19, 2026, 13:27 IST

Fruit Processing Business Idea: उत्तराखंड के पहाड़ों में उगने वाला रसीला सेब अब सिर्फ फल बनकर बाजारों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि एप्पल चिप्स और चटपटे अचार के रूप में साल भर आपके स्वाद का हिस्सा बनेगा. नैनबाग के प्रगतिशील किसान बीरबान सिंह रावत ने एक ऐसा कमाल का बिजनेस आइडिया पेश किया है, जिसने बागवानों की सबसे बड़ी चिंता यानी सेब के सड़ने के डर को खत्म कर दिया है. ए-ग्रेड के सेब बेचने के बाद जो फल बाजार में नहीं बिक पाते थे, उनसे अब मुरब्बा और चिप्स तैयार कर लाखों का मुनाफा कमाया जा रहा है.

देहरादून: हिमाचल और कश्मीर की तरह उत्तराखंड के पहाड़ों में भी सेब की पैदावार खूब होती है. लेकिन यहां के बागवानों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि दुर्गम इलाकों से सेब को सही समय पर बाजार तक कैसे पहुंचाया जाए. सही कोल्ड स्टोरेज और संसाधनों की कमी की वजह से अक्सर ढेर सारा सेब खराब हो जाता था. लेकिन उत्तराखंड के नैनबाग के रहने वाले किसान बीरबान सिंह रावत ने इस समस्या का एक शानदार समाधान ढूंढ निकाला है. उन्होंने सेब को सिर्फ फल के रूप में बेचने के बजाय उसके चिप्स, मुरब्बा और अचार बनाना शुरू कर दिया है.

नुकसान को बनाया मुनाफे का जरिया
बीरबान सिंह रावत बताते हैं कि पहले उनका काफी सेब समय पर बाजार न पहुंच पाने के कारण सड़ जाता था, जिससे मेहनत और पैसा दोनों बर्बाद होते थे. इस नुकसान से बचने के लिए उन्होंने सेब की मैन्युफैक्चरिंग शुरू की. अब वे कच्चे और कम मीठे सेबों का भी पूरा इस्तेमाल कर लेते हैं. इस आईडिया से अब सेब की बर्बादी जीरो हो गई है. वह राज्य के ऐसे पहले किसान हैं जो इस तरह की प्रोसेसिंग पर काम कर रहे हैं. बीरबान सिंह ने अपनी मेहनत और समझदारी से यह साबित कर दिया है कि अगर सही तकनीक का इस्तेमाल किया जाए, तो खेती में नुकसान की गुंजाइश को खत्म किया जा सकता है.
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एप्पल चिप्स से साल भर मिलेगा सेब का स्वादसेब एक मौसमी फल है, लेकिन बीरबान सिंह के बनाए एप्पल चिप्स के जरिए इसका स्वाद साल भर लिया जा सकता है. चिप्स बनाने से सेब की शेल्फ लाइफ यानी खराब न होने की अवधि 6 महीने से लेकर 1 साल तक बढ़ जाती है. प्रोसेसिंग के लिए सबसे पहले ए-ग्रेड के सेब अलग कर लिए जाते हैं और इसके बाद बी-ग्रेड के सेब, जिन पर हल्का दाग हो या जो सीधे बाजार में नहीं बिक सकते, उन्हें चिप्स के लिए छांटा जाता है. मशीन से सेब के पतले गोल टुकड़े किए जाते हैं और बीच का बीज वाला हिस्सा निकाल दिया जाता है. सेब को काला होने से बचाने के लिए एक खास घोल में डुबोया जाता है और फिर सोलर ड्रायर के जरिए इसे सुखाया जाता है.

घर पर ही लगाया प्लांट और विदेशों तक है डिमांडबीरबान सिंह ने इस बिजनेस के लिए अपने घर पर ही एक छोटा मैन्युफैक्चरिंग प्लांट लगाया है. उनके बनाए एप्पल चिप्स, अचार और मुरब्बे की डिमांड अब सिर्फ उत्तराखंड तक सीमित नहीं है. वे अपने उत्पादों को दिल्ली और मुंबई जैसी बड़ी प्रदर्शनियों में बेचते हैं. इतना ही नहीं, जो लोग विदेश जाते हैं, वे भी भारी मात्रा में उनके उत्पाद साथ लेकर जाते हैं. सोलर ड्रायर का उपयोग करके सेब को 55 से 60 डिग्री सेल्सियस के तापमान पर सुखाया जाता है जिससे उसकी नमी खत्म हो जाए लेकिन विटामिन और फाइबर सुरक्षित रहें. इस बिजनेस से बीरबान सिंह अब सालाना लाखों रुपये की कमाई कर रहे हैं.

किसानों के लिए स्वरोजगार की नई राहबीरबान सिंह रावत का यह बिजनेस मॉडल उन सभी बागवानों के लिए एक मिसाल है जो खराब मौसम या संसाधनों की कमी से परेशान रहते हैं. एप्पल चिप्स और मुरब्बा न केवल ताजे सेब से महंगे बिकते हैं, बल्कि यह पहाड़ के युवाओं के लिए रोजगार का एक नया और टिकाऊ रास्ता भी खोल रहे हैं. उनके इस प्रयास से नैनबाग जैसे छोटे इलाकों के किसानों को नई उम्मीद मिली है कि वे भी अपने उत्पादों की प्रोसेसिंग करके उन्हें वैश्विक बाजार तक पहुंचा सकते हैं.

About the AuthorSeema Nath

सीमा नाथ पांच साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. शाह टाइम्स, उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम किया है. वर्तमान में मैं (नेटवर्क18) के साथ जुड़ी हूं, जहां मै…और पढ़ें

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Location :

Dehradun,Uttarakhand

First Published :

April 19, 2026, 13:25 IST

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