भानगढ़ किला भूतिया रहस्य | Bhangarh Fort Haunted History Alwar News

Last Updated:April 18, 2026, 11:00 IST
Bhangarh Fort Haunted History Alwar News: अलवर जिले में स्थित भानगढ़ का किला अपनी ऐतिहासिक भव्यता और ‘भूतिया’ रहस्यों के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है. अरावली की पहाड़ियों में स्थित इस किले का निर्माण 1573 में हुआ था. लोक मान्यताओं के अनुसार, राजकुमारी रत्नावती और तांत्रिक सिंधु सेवड़ा के श्राप के कारण यह पूरा शहर खंडहर में तब्दील हो गया. आज भी यहाँ सूर्यास्त के बाद ASI द्वारा प्रवेश वर्जित है, क्योंकि रात में रूहों के भटकने का दावा किया जाता है. दिन में यहाँ हजारों पर्यटक घूमने आते हैं, लेकिन शाम 6 बजते ही सन्नाटा पसर जाता है. रोमांच और इतिहास का यह अद्भुत मेल भानगढ़ को भारत की सबसे रहस्यमयी जगहों में से एक बनाता है, जहाँ विज्ञान और अंधविश्वास के बीच की लकीर आज भी धुंधली है.
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Alwar News: राजस्थान के अलवर जिले में स्थित भानगढ़ का किला दुनिया के उन चुनिंदा स्थानों में शुमार है, जहाँ रोमांच और खौफ का एक साथ अनुभव होता है. दिल्ली से नजदीकी होने के कारण यह किला पर्यटकों के लिए छुट्टियों का पसंदीदा केंद्र है, लेकिन इसकी ख्याति उत्तर भारत के सबसे बड़े ‘भूतिया किले’ के रूप में अधिक है. अरावली की पर्वत श्रृंखलाओं के बीच बसा यह किला अपनी बेहतरीन वास्तुकला और नक्काशीदार मंदिरों के लिए जाना जाता है. यहाँ भगवान सोमेश्वर, गोपीनाथ, मंगला देवी और केशव राय के प्राचीन मंदिर आज भी अपनी भव्यता की गवाही देते हैं. दिन के उजाले में यहाँ हजारों सैलानियों की चहल-पहल रहती है, लेकिन जैसे ही सूरज ढलता है, इस किले की फिजा बदल जाती है और चारों ओर एक रहस्यमयी सन्नाटा पसर जाता है.
भानगढ़ किले का निर्माण साल 1573 में आमेर के राजा भगवंत दास ने करवाया था. करीब 300 सालों तक यह किला एक खुशहाल शहर की तरह आबाद रहा. लोक कथाओं के अनुसार, भानगढ़ की राजकुमारी रत्नावती अपनी अद्भुत सुंदरता के लिए पूरे आर्यावर्त में प्रसिद्ध थीं. उनकी सुंदरता पर सिंधु सेवड़ा नाम का एक तांत्रिक मोहित हो गया, जो काले जादू में निपुण था. राजकुमारी को पाने के लिए उसने एक इत्र की शीशी पर वशीकरण मंत्र पढ़ दिया, लेकिन राजकुमारी ने उसे पहचान लिया और इत्र को एक पत्थर पर फेंक दिया. काले जादू के प्रभाव से वह पत्थर तांत्रिक के ऊपर गिर गया और उसकी मृत्यु हो गई. मरते समय तांत्रिक ने श्राप दिया कि यह किला और यहाँ रहने वाले लोग जल्द ही तबाह हो जाएंगे और उनकी आत्माएं हमेशा यहीं भटकती रहेंगी.
पुरातत्व विभाग की सख्त पाबंदी और अनसुलझे रहस्यहैरानी की बात यह है कि आज 21वीं सदी के वैज्ञानिक युग में भी भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने यहाँ सूर्यास्त के बाद रुकने पर कानूनी प्रतिबंध लगा रखा है. किले के बाहर लगे आधिकारिक बोर्ड पर स्पष्ट लिखा है कि शाम 6 बजे के बाद और सूर्योदय से पहले किले के भीतर प्रवेश वर्जित है. स्थानीय लोगों और यहाँ आने वाले पर्यटकों का दावा है कि रात के समय खंडहरों से अजीबोगरीब आवाजें, चीखें और संगीत सुनाई देता है. कई पर्यटक यहाँ ‘नेगेटिव एनर्जी’ महसूस होने की बात करते हैं. पर्यटक वीरेंद्र सिंह रावत के अनुसार, ऐसी मान्यता है कि जो कोई रात में यहाँ रुकने का साहस करता है, वह कभी वापस नहीं लौटता. इसी डर और रोमांच के कारण यहाँ साल भर पर्यटकों का तांता लगा रहता है.
पर्यटन और ऐतिहासिक धरोहर का संगमभानगढ़ का किला भले ही डरावनी कहानियों के लिए मशहूर हो, लेकिन ऐतिहासिक दृष्टि से यह एक बेजोड़ धरोहर है. यहाँ का प्राचीन बाजार, नर्तकियों की हवेली और शाही महल खंडहर होने के बावजूद अपनी प्राचीन भव्यता की झलक दिखाते हैं. उत्तर प्रदेश और दिल्ली से आए पर्यटकों का कहना है कि इंटरनेट पर भूतिया कहानियाँ पढ़कर वे यहाँ आए, लेकिन यहाँ का प्राकृतिक वातावरण और शांत पहाड़ उन्हें काफी सुकून देते हैं. हालांकि, रात का रहस्य आज भी बरकरार है. पुरातत्व विभाग की टीम और स्थानीय सुरक्षा गार्ड यह सुनिश्चित करते हैं कि अंधेरा होने से पहले हर पर्यटक किले की चारदीवारी से बाहर निकल जाए, ताकि किसी भी अप्रिय घटना या अनहोनी से बचा जा सके.
About the Authorvicky Rathore
Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a seasoned multimedia journalist and digital content specialist with 8 years of experience across digital media, social media management, video production, editing, content…और पढ़ें
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Location :
Alwar,Alwar,Rajasthan
First Published :
April 18, 2026, 11:00 IST



