Country that sells oil but not uses: Green country depends on Oil Economy|वो देश जो तेल बेचकर कमाता है अरबों डॉलर पर खुद नहीं करता इस्तेमाल

Last Updated:May 05, 2026, 12:59 IST
Green Norway Depends on Oil Economy: इस वक्त पूरी दुनिया में तेल और गैस के लिए हाहाकार मचा हुआ है लेकिन एक ऐसा भी देश है, जो तेल बेचकर कमाता तो अरबों डॉलर है लेकिन वहां के नागरिक इसे इस्तेमाल नहीं करते. यहां के लोग साइकिल से चलते हैं पर गाड़ी नहीं निकालते और निकालते भी हैं तो इलेक्ट्रॉनिक व्हीकल. चलिए जानते हैं कि ऐसा क्यों है?
ग्रीन नॉर्वे तेल बेचकर कमाता है पैसे. (रॉयटर्स)
Norway Oil Economy: नॉर्वे को दुनिया के सबसे हरे-भरे और पर्यावरण के प्रति जागरूक देशों में गिना जाता है. यहां के शहर साइकिलों से भरे रहते हैं, 98% बिजली पानी और अन्य नवीकरणीय स्रोतों से आती है और 2024 में बिकने वाली हर दस नई कारों में से नौ इलेक्ट्रिक थीं. इसी देश की अर्थव्यवस्था का सबसे बड़ा सहारा तेल और गैस का निर्यात है. यही नॉर्वे का सबसे बड़ा विरोधाभास है, जिसे ‘नॉर्वेजियन पैराडॉक्स’ कहा जाता है. यहां पैसा जिस तेल से कमाया जाता है, उसी के बुरे प्रभावों से लड़ने के लिए ये देश सीना ताने खड़ा है.
घरेलू स्तर पर हरित क्रांति से नॉर्वे ने जलवायु परिवर्तन से लड़ने में दुनिया को नेतृत्व किया है. 1991 में इसने दुनिया के सबसे पहले देशों में कार्बन टैक्स लगाया. इलेक्ट्रिक गाड़ियों को बढ़ावा देने में यह देश नंबर-1 है. यहां की सरकार ने 2030 तक कार्बन उत्सर्जन में 50% कमी का कानून भी बना रखा है. नॉर्वे में बिजली की खपत का बड़ा हिस्सा हाइड्रोपावर से आता है, इसलिए घरेलू स्तर पर प्रदूषण बहुत कम है. हालांकि तस्वीर का दूसरा पहलू काफी अलग है.
तेल-गैस पर टिकी अर्थव्यवस्था
नॉर्वे दुनिया का बड़ा तेल और गैस निर्यातक देश है. इसके कुल निर्यात में तेल-गैस क्षेत्र की हिस्सेदारी 60 फीसदी से भी ज्यादा है. सकल घरेलू उत्पाद में इसकी भागीदारी 20 फीसदी से अधिक है. देश की सबसे बड़ी कंपनी इक्वीनॉर में सरकार की बहुमत वाली हिस्सेदारी है. इस कंपनी से जो मुनाफा होता है, उसे ‘ऑयल फंड’ में डाला जाता है. 2025 के अंत तक यह फंड 1.9 ट्रिलियन डॉलर के करीब पहुंच गया था. सीधे शब्दों में कहें तो हर नॉर्वेजियन नागरिक के नाम पर औसतन 3.5 लाख डॉलर की बचत. यह फंड नॉर्वे की उदार पेंशन व्यवस्था, शिक्षा, स्वास्थ्य और कल्याणकारी योजनाओं को चलाने का मुख्य स्रोत है.
नॉर्वे में लोग नहीं इस्तेमाल करते डीजल-पेट्रोल की कार. (रॉयटर्स)
मिडिल ईस्ट की लड़ाई से फायदा
फरवरी, 2026 में शुरू हुए ईरान-इजरायल-अमेरिका युद्ध और होर्मुज स्ट्रेट की नाकाबंदी ने वैश्विक तेल कीमतों को बढ़ा दिया. नॉर्वे को इस स्थिति से भारी फायदा हुआ. सरकार को अतिरिक्त 5 अरब डॉलर की आमदनी हुई और ओस्लो शेयर बाजार ने रिकॉर्ड तोड़ दिए. यूक्रेन युद्ध के बाद भी नॉर्वे यूरोप के लिए भरोसेमंद ऊर्जा आपूर्तिकर्ता बना. आज यूरोप में खपत होने वाली गैस का करीब 30 फीसदी और तेल का 15 फीसदी नॉर्वे से आता है.
नॉर्वे के अंदर हो रहा विरोध
नॉर्वे में पर्यावरण कार्यकर्ता और युवा इस स्थिति को शर्मनाक मानते हैं. बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक फ्रेंड्स ऑफ द अर्थ नॉर्वे के अध्यक्ष ट्रुल्स गुलोवसेन कहते हैं, हम दुनिया को साफ-सुथरा रहने की सलाह देते हैं, लेकिन खुद तेल बेचकर कमाते हैं.
वित्त मंत्री जेन्स स्टोल्टेनबर्ग भी ये मानते हैं कि यह एक विरोधाभास है. नोबेल शांति पुरस्कार देने वाला देश युद्ध की वजह से अमीर हो रहा है. यह तस्वीर कई लोगों को परेशान करती है.
नॉर्वे के प्रधानमंत्री योनास गार स्टोरे की सरकार नया तेल-गैस क्षेत्र खोलने के पक्ष में है। हाल ही में 57 नए लाइसेंस जारी किए गए हैं. सरकार बारेंट्स सागर जैसे संवेदनशील इलाकों में और खुदाई करना चाहती है.
वहीं पर्यावरणवादियों की मांग है कि नॉर्वे को तेल उत्पादन घटाने की समय सीमा तय करनी चाहिए. सरकार कहती है कि यूरोप की ऊर्जा सुरक्षा के लिए यह जरूरी बुराई है. औद्योगिक यूनियन के नेता कहते हैं कि इस क्षेत्र में 2 लाख से ज्यादा नौकरियां हैं. अचानक इसे बंद करना संभव नहीं है.
कुल मिलाकर नॉर्वे एक अनोखा उदाहरण है, जहां घरेलू स्तर पर तेल-गैस का इस्तेमाल बहुत कम होता है, लेकिन अर्थव्यवस्था पूरी तरह तेल बेचने पर टिकी हुई है. मध्य पूर्व में युद्ध और ऊर्जा संकट ने इस विरोधाभास को और उजागर कर दिया है. नॉर्वे को अब फैसला करना होगा कि क्या वह पर्यावरण के प्रति अपनी छवि बनाए रखते हुए तेल उद्योग को धीरे-धीरे कम करेगा या वैश्विक मांग के आगे झुककर और ज्यादा तेल निकालता रहेगा?
About the AuthorPrateeti Pandey
में इंटरनेशनल डेस्क पर कार्यरत हैं. टीवी पत्रकारिता का भी अनुभव है और इससे पहले Zee Media Ltd. में कार्य किया. डिजिटल वीडियो प्रोडक्शन की जानकारी है. टीवी पत्रकारिता के दौरान कला-साहित्य के साथ-साथ अंतरर…और पढ़ें
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