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Camel Milk Biscuits Project in Pali Rajasthan

Last Updated:April 17, 2026, 10:46 IST

Camel Milk Biscuits Project in Pali Rajasthan: पाली जिले के युवा उद्यमी निर्मल चौधरी ने ऊंटनी के दूध से बिस्कुट बनाने की पहल शुरू की है, जिससे 35 से अधिक ग्रामीण महिलाओं को घर बैठे रोजगार मिला है. ऊंटनी के दूध के औषधीय गुणों को देखते हुए इसे ‘सुपरफूड’ के रूप में प्रमोट किया जा रहा है. निर्मल इन पशुपालकों से दूध खरीदकर उन्हीं की महिलाओं को ट्रेनिंग देकर बिस्कुट तैयार करवाते हैं, जिससे उन्हें बाजार से बेहतर दाम मिल रहे हैं. यह नवाचार न केवल ऊंटों के संरक्षण में मददगार है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती दे रहा है.

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पाली. राजस्थान के रेगिस्तान का जहाज कहा जाने वाला ‘ऊंट’ अब केवल परिवहन या सफर का साथी मात्र नहीं रह गया है. पाली जिले में एक युवा उद्यमी की सोच ने ऊंटनी के दूध को ‘सफेद सोने’ में तब्दील कर दिया है, जिससे ग्रामीण परिवारों की आय में भारी वृद्धि हो रही है. युवा उद्यमी निर्मल चौधरी ने एक ऐसी प्रेरणादायी शुरुआत की है, जहाँ ऊंटनी के दूध के औषधीय गुणों को न केवल दुनिया तक पहुँचाया जा रहा है, बल्कि घर की चारदीवारी में रहने वाली महिलाओं को सफल ‘उद्यमी’ बनाया जा रहा है. इस पहल के तहत ऊंटनी के दूध से उच्च गुणवत्ता वाले बिस्कुट और अन्य स्वास्थ्यवर्धक उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं. इस परियोजना की सबसे बड़ी विशेषता इसका ‘सोशल मॉडल’ है, जिसके अंतर्गत महिलाओं को अपने घर या ढाणी से बाहर जाने की आवश्यकता नहीं है. वे अपने घरेलू कार्यों के साथ-साथ इस व्यवसाय से जुड़कर सम्मानजनक कमाई कर रही हैं.

निर्मल चौधरी ने लोकल-18 से विशेष बातचीत में बताया कि ऊंटनी का दूध स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी होता है, लेकिन इसका सही बाजार मूल्य न मिल पाना पशुपालकों के लिए बड़ी चिंता थी. चॉकलेट या मिल्क पाउडर जैसे उत्पाद बनाना तकनीकी रूप से कठिन है और इसके लिए बड़ी मशीनों की आवश्यकता होती है, इसलिए उन्होंने बिस्कुट निर्माण को चुना. बिस्कुट एक ऐसा उत्पाद है जिसे ग्रामीण महिलाएं आसानी से प्रशिक्षण लेकर घर पर तैयार कर सकती हैं. निर्मल ने इन महिलाओं को बिस्कुट बनाने की विशेष ट्रेनिंग दी है. इससे वे पशुपालक परिवार, जो अपना दूध शहरों तक नहीं पहुँचा पाते थे, अब गाँव में ही उसे प्रोसेस कर उत्पाद बना रहे हैं. इससे न केवल उनकी आय बढ़ी है, बल्कि वे आर्थिक रूप से स्वतंत्र भी हो रही हैं.

स्वाद में क्रंची और स्वास्थ्य के लिए ‘सुपरफूड’वर्तमान में यहाँ ऊंटनी के दूध से तीन अलग-अलग प्रकार के बिस्कुट तैयार किए जा रहे हैं, जिनमें चॉकलेट फ्लेवर से लेकर शुगर-फ्री (Sugar Free) बिस्कुट तक शामिल हैं. इन बिस्कुटों की सबसे बड़ी खासियत इनका निर्माण तरीका है. इसमें आटे के साथ इस्तेमाल होने वाला दूध और बटर पूरी तरह से ऊंटनी के दूध (Camel Milk) से तैयार होता है. यह पूरी तरह प्राकृतिक उत्पाद है जो बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक के लिए फायदेमंद है. विशेषज्ञों के अनुसार ऊंटनी का दूध मधुमेह, त्वचा संबंधी रोगों और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक होता है. निर्मल चौधरी की इस पहल से तैयार बिस्कुट अब बाजार में अपनी खास पहचान बना रहे हैं, क्योंकि ये स्वाद में क्रंची होने के साथ-साथ औषधीय गुणों से भरपूर हैं.

35 परिवारों के घर में फैली खुशहालीनिर्मल चौधरी का मुख्य उद्देश्य ऐसे उत्पादों को बढ़ावा देना था जो पारंपरिक पशुपालन को आधुनिक व्यापार से जोड़ सकें. आज की तारीख में वे 35 से अधिक ग्रामीण महिलाओं को प्रत्यक्ष रूप से रोजगार प्रदान कर रहे हैं. ये वे महिलाएं हैं जिनके पास अपने ऊंट हैं और वे लंबे समय से पशुपालन से जुड़ी हैं. निर्मल न केवल उन पशुपालकों से ऊंटनी का दूध बाजार भाव से अधिक कीमत पर खरीदते हैं, बल्कि उन्हीं के परिवारों की महिलाओं से उत्पाद बनवाकर उन्हें दोहरा लाभ पहुँचा रहे हैं. इस पहल ने मारवाड़ के रेतीले धोरों में एक नई आर्थिक क्रांति की नींव रखी है, जहाँ ऊंट अब एक लाभकारी आर्थिक संसाधन के रूप में उभर रहा है.

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Location :

Pali,Pali,Rajasthan

First Published :

April 17, 2026, 10:39 IST

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