Murrah Buffalo Milk Production in Jalore

Last Updated:April 17, 2026, 11:08 IST
Murrah Buffalo Milk Production in Jalore: जालौर जिले में मुर्रा भैंस डेयरी व्यवसाय के लिए ‘काला सोना’ साबित हो रही है. भीषण गर्मी और शुष्क जलवायु को सहन करने वाली यह नस्ल प्रतिदिन 15 लीटर तक दूध देती है. इसकी जलेबी जैसे घुमावदार सींग और जेट ब्लैक रंग इसकी मुख्य पहचान हैं. 80 हजार से लेकर 3 लाख रुपए तक की कीमत वाली यह भैंस जालौर के किसानों को आत्मनिर्भर बना रही है और कम संसाधन में अधिक मुनाफा दे रही है.
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जालौर. पश्चिमी राजस्थान के जालौर जिले में पशुपालन अब केवल एक पारंपरिक आजीविका मात्र नहीं रह गया है, बल्कि यह क्षेत्र के किसानों के लिए आय का एक सशक्त और आधुनिक जरिया बनता जा रहा है. इस बदलाव के पीछे सबसे बड़ी भूमिका ‘मुर्रा भैंस’ निभा रही है, जिसे इसकी उपयोगिता और मुनाफे के कारण “काला सोना” कहा जाता है. जालौर के डेयरी संचालकों और प्रगतिशील किसानों के लिए यह नस्ल सबसे भरोसेमंद विकल्प बनकर उभरी है. भारत की सबसे अधिक दूध देने वाली श्रेणियों में शुमार मुर्रा भैंस की सबसे बड़ी खासियत इसकी अनुकूलन क्षमता है. यह भैंस शुष्क और गर्म जलवायु वाले क्षेत्रों में भी खुद को आसानी से ढाल लेती है, यही मुख्य कारण है कि जालौर जैसे रेतीले और कठिन परिस्थितियों वाले इलाके में भी इसका पालन बहुत तेजी से बढ़ रहा है. हरियाणा और पंजाब से शुरू हुआ इस नस्ल का सफर अब पश्चिमी राजस्थान की पहचान बन चुका है.
मुर्रा भैंस को अन्य नस्लों से अलग पहचानना काफी आसान है क्योंकि इसकी शारीरिक विशेषताएं अत्यंत विशिष्ट होती हैं. इस भैंस का रंग गहरा जेट काला (Jet Black) होता है, जो इसकी शुद्धता का प्रतीक माना जाता है. इसके सींग जलेबी की तरह अंदर की ओर मजबूती से घुमावदार होते हैं, जो इसे अन्य देसी नस्लों से अलग और आकर्षक बनाते हैं. इसका सिर छोटा और हल्का होता है, जबकि कान पतले और छोटे होते हैं. इसकी पूंछ लंबी होती है, जो हॉक जोड़ के नीचे तक लटकती है. डेयरी संचालक मोईन खान का कहना है कि मुर्रा भैंस की इन्हीं शारीरिक विशेषताओं और यहाँ के गर्म माहौल में ढल जाने की शक्ति के कारण इसे पालना काफी फायदेमंद रहता है, क्योंकि यह कम पानी और सीमित चारे में भी बेहतर परिणाम देती है.
दूध उत्पादन और आर्थिक लाभडेयरी व्यवसाय में मुर्रा भैंस की मांग इसके भारी दूध उत्पादन के कारण सबसे अधिक रहती है. एक स्वस्थ मुर्रा भैंस प्रतिदिन औसतन 12 से 15 लीटर तक दूध देती है. यदि इसके पूरे लेक्टेशन पीरियड (दूध देने की अवधि) की बात करें, तो यह लगभग 1680 से 2000 किलोग्राम तक दूध उत्पादन करने की क्षमता रखती है. इसके दूध में फैट की मात्रा भी काफी अच्छी होती है, जिससे पशुपालकों को डेयरी में बेहतर दाम मिलते हैं. बाजार में इसकी कीमत भी इसकी नस्ल और दूध देने की क्षमता पर निर्भर करती है. एक सामान्य मुर्रा भैंस जहाँ 50 हजार से 1.5 लाख रुपए के बीच मिल जाती है, वहीं शुद्ध और उच्च नस्ल की भैंस की कीमत 3 लाख रुपए तक पहुँच सकती है.
जालौर की डेयरी क्रांति का आधारजालौर के किसानों के लिए मुर्रा भैंस अब केवल एक पशु नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता का एक मज़बूत आधार बन चुकी है. कठिन परिस्थितियों और जल संकट के बावजूद यह नस्ल पशुपालकों को नियमित और मज़बूत आय प्रदान कर रही है. डेयरी संचालकों के अनुसार, पश्चिमी राजस्थान में चारे की समस्या आम है, लेकिन मुर्रा भैंस की सहनशक्ति इस बाधा को पार कर लेती है. इसी कारण अब जिले के युवा भी डेयरी कारोबार से जुड़ रहे हैं और मुर्रा भैंस का पालन कर रहे हैं. आने वाले समय में यह नस्ल पूरे पश्चिमी राजस्थान की डेयरी क्रांति का सबसे अहम हिस्सा बनकर उभरेगी और यहाँ के ग्रामीण परिवेश को आर्थिक रूप से और भी समृद्ध करेगी.
About the Authorvicky Rathore
Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a seasoned multimedia journalist and digital content specialist with 8 years of experience across digital media, social media management, video production, editing, content…और पढ़ें
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Location :
Jalor,Jalor,Rajasthan
First Published :
April 17, 2026, 11:08 IST



