जीवनसंगिनी बनी जीवनदायिनी! ट्रेनिंग के दौरान कांस्टेबल पति की फेल हो गई थी किडनी, पत्नी ने ऐसे बचाई जान

Last Updated:May 07, 2026, 10:16 IST
Motivational Story: जयपुर के कालवाड़ क्षेत्र के मुंडोता गांव में प्रेम और समर्पण की मिसाल देखने को मिली. राजस्थान पुलिस कांस्टेबल हनुमान सहाय सैनी की दोनों किडनियां खराब होने के बाद डॉक्टरों ने ट्रांसप्लांट को आखिरी विकल्प बताया. लंबे समय तक डायलिसिस के बीच परिवार डोनर की तलाश में जुटा रहा, लेकिन सफलता नहीं मिली. ऐसे कठिन समय में पत्नी ज्योति सैनी ने अपनी एक किडनी दान कर पति को नई जिंदगी दी. सफल ट्रांसप्लांट के बाद दोनों स्वस्थ हैं और पूरे इलाके में ज्योति के साहस व त्याग की चर्चा हो रही है.
“सात फेरों में लिया गया साथ निभाने का वादा, जब जिंदगी और मौत के बीच खड़ा हो जाए, तब ही रिश्तों की असली ताकत सामने आती है.” ऐसा ही एक उदाहरण जयपुर के कालवाड़ इलाके के मुंडोता गांव में देखने को मिला, जहां एक पत्नी ने अपने पति के लिए ऐसा त्याग किया, जिसने हर किसी की आंखें नम कर दीं. राजस्थान पुलिस में कांस्टेबल हनुमान सहाय सैनी की दोनों किडनियां फेल होने के बाद जब डॉक्टरों ने ट्रांसप्लांट को ही आखिरी उम्मीद बताया, तब उनकी पत्नी ज्योति सैनी उम्मीद का अंतिम चिराग बनकर सामने आईं. ज्योति ने बिना एक पल सोचे अपनी एक किडनी दान कर पति को नई जिंदगी दे दी. उनके इस साहस, प्रेम और समर्पण ने पूरे समाज के सामने रिश्तों की सच्ची मिसाल पेश की है.
हनुमान सहाय सैनी और ज्योति की शादी वर्ष 2020 में हुई थी. शादी के बाद दोनों ने मिलकर बेहतर भविष्य के सपने देखे थे. परिवार में उस समय खुशी का माहौल बन गया जब वर्ष 2023 में हनुमान का चयन राजस्थान पुलिस में कांस्टेबल पद पर हुआ. किसान परिवार से आने वाले हनुमान ने कठिन मेहनत और संघर्ष के बाद यह सफलता हासिल की थी. पुलिस की नौकरी लगने के बाद पूरे परिवार को उम्मीद थी कि अब घर की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और परिवार का नाम रोशन होगा. हनुमान भी देश सेवा का सपना लेकर पूरी लगन से ट्रेनिंग कर रहे थे, लेकिन किस्मत ने उनके सामने एक कठिन परीक्षा खड़ी कर दी.
पिछले करीब 15 महीनों से हनुमान लगातार डायलिसिस पर थे. हर सप्ताह अस्पताल जाना, इलाज कराना और बढ़ते खर्च ने परिवार की परेशानियां और बढ़ा दीं. डायलिसिस के बावजूद उनकी सेहत लगातार गिरती जा रही थी. आखिरकार डॉक्टरों ने साफ कह दिया कि अब केवल किडनी ट्रांसप्लांट ही उनकी जान बचा सकता है. इसके बाद परिवार ने डोनर की तलाश शुरू की, लेकिन समय तेजी से निकलता जा रहा था. हनुमान के पिता चंदालाल सैनी, जो एक साधारण किसान हैं, बेटे की हालत देखकर टूट चुके थे. वहीं ज्योति का परिवार भी लगातार हनुमान के इलाज में साथ खड़ा रहा. पूरे परिवार की उम्मीदें अब किसी चमत्कार पर टिकी हुई थीं.
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इसी मुश्किल समय में ज्योति सैनी ने ऐसा फैसला लिया, जिसने सभी को भावुक कर दिया. जब परिवार डोनर नहीं मिलने से निराश हो रहा था, तब ज्योति ने खुद अपनी किडनी दान करने की इच्छा जताई. डॉक्टरों ने जरूरी जांच की, जिसमें ज्योति की किडनी हनुमान के लिए पूरी तरह उपयुक्त पाई गई. इसके बाद परिवार की सहमति से ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया शुरू हुई. ज्योति ने कहा कि शादी के सात फेरों में उन्होंने हर परिस्थिति में पति का साथ निभाने का वादा किया था और अब वही वादा निभाने का समय था. उन्होंने बताया कि उनके लिए सबसे बड़ी खुशी यही है कि उनके पति स्वस्थ होकर सामान्य जीवन जी सकें. उनके इस साहस की हर कोई प्रशंसा कर रहा है.
डॉक्टरों के अनुसार, सफल ट्रांसप्लांट के बाद अब हनुमान सहाय और ज्योति दोनों पूरी तरह स्वस्थ और स्थिर हैं. हनुमान को नई जिंदगी मिलने के बाद परिवार में फिर से खुशियां लौट आई हैं. गांव मुंडोता सहित पूरे कालवाड़ क्षेत्र में इस दंपती की चर्चा हो रही है. लोग ज्योति के त्याग और समर्पण को सच्चे जीवनसाथी की मिसाल बता रहे हैं. यह कहानी केवल एक परिवार की नहीं, बल्कि प्रेम, विश्वास और रिश्तों की मजबूती की प्रेरणादायक कहानी बन गई है. आज हर कोई यही कह रहा है कि यदि रिश्तों में सच्चा साथ और विश्वास हो, तो सबसे बड़ी मुश्किल भी आसानी से पार की जा सकती है.
बीकानेर में ट्रेनिंग के दौरान अचानक हनुमान की तबीयत बिगड़ने लगी. शुरुआत में सामान्य कमजोरी समझकर इलाज कराया गया, लेकिन लगातार हालत खराब होने पर डॉक्टरों ने विस्तृत जांच की. जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद परिवार वालों की चिंता बढ़ गई, क्योंकि डॉक्टरों ने बताया कि हनुमान की दोनों किडनियां पूरी तरह खराब हो चुकी हैं. यह खबर सुनकर परिवार गहरे सदमे में चला गया. जिस युवक ने हाल ही में पुलिस की वर्दी पहनकर देश सेवा का सपना देखा था, अब वही जिंदगी बचाने के लिए अस्पतालों के चक्कर लगाने को मजबूर हो गया.
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