Pali News | बिंजा गांव में जल संकट और गौ सेवा

Last Updated:May 07, 2026, 10:07 IST
Pali News: पाली के बिंजा गांव में जलदाय विभाग की लापरवाही के कारण भीषण जल संकट है. नल सूखे होने के कारण ग्रामीणों को खुद के लिए पानी खरीदना पड़ रहा है, लेकिन इसके बावजूद ‘गौ माता युवा टीम’ और स्थानीय भामाशाहों ने बेजुबान पशुओं के लिए अनूठी मिसाल पेश की है. ग्रामीण अपने स्तर पर हर महीने 1.20 लाख रुपए खर्च कर रोजाना 5 टैंकर पानी मवेशियों को पिला रहे हैं. प्रशासन की अनदेखी के बीच ग्रामीणों का यह सेवा कार्य पूरे जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है.
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Pali News: कहते हैं कि प्यासे को पानी पिलाना सबसे बड़ा पुण्य है, लेकिन जब जिम्मेदार प्रशासन अपनी आंखें मूंद ले, तो जनता को खुद ही ‘सिस्टम’ बनना पड़ता है. कुछ ऐसी ही प्रेरक तस्वीर सामने आई है पाली जिले के रोहट क्षेत्र के बिंजा गांव से. भीषण गर्मी के इस मौसम में जहां इंसान पानी के लिए त्राहि-त्राहि कर रहा है, वहीं बेजुबान पशुओं की सुध लेने वाला कोई नहीं है. गांव में जलदाय विभाग के कनेक्शन तो हैं, लेकिन नल सूखे पड़े हैं. हालात ये हैं कि ग्रामीणों को अपने निजी उपयोग के लिए भी पानी खरीदना पड़ रहा है, फिर भी उन्होंने बेजुबानों का साथ नहीं छोड़ा.
इस जल संकट के बीच बैंगलोर निवासी नरपत पटेल और गांव के भामाशाहों ने मिलकर ‘गौ माता युवा टीम’ का गठन किया है. जो काम सरकार को करना चाहिए था, वह ये ग्रामीण पिछले 3 अप्रैल से बखूबी कर रहे हैं. टीम रोजाना 5 पानी के टैंकर मवेशियों के लिए मंगवा रही है ताकि गांव के अवालों (पशुओं के पानी पीने का स्थान) में पानी कम न पड़े. इस नेक कार्य में रामलाल चौधरी, भंवरलाल, केवल भाई, भीमाराम सहित कई ग्रामीण तन-मन-धन से जुटे हुए हैं.
लाखों का खर्च, पर सेवा का जज्बा अडिगहैरानी की बात यह है कि बेजुबान पशुओं की प्यास बुझाने के लिए ये ग्रामीण अपने स्तर पर हर महीने करीब 1 लाख 20 हजार रुपए खर्च कर रहे हैं. एक टैंकर की कीमत 800 रुपए है और रोजाना 5 टैंकर खाली किए जाते हैं. इस प्रकार रोजाना 4 हजार रुपए का पानी सिर्फ मवेशियों के लिए मंगाया जा रहा है. ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन भले ही उनकी सुध न ले, लेकिन वे इन मूक पशुओं को प्यासा मरते नहीं देख सकते.
जलदाय विभाग के दावों की खुली पोलगांव के सोनाराम और अन्य निवासियों ने विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं. गांव में पाइपलाइन बिछी है, कनेक्शन भी हैं, लेकिन जीएलआर (Ground Level Reservoir) में सप्ताह में केवल एक या दो बार ही पानी सप्लाई दी जाती है, जो पूरे गांव के लिए नाकाफी है. ग्रामीणों को मजबूरी में पीने और नहाने के लिए भी निजी टैंकरों के भरोसे रहना पड़ता है. यह स्थिति दर्शाती है कि सरकारी योजनाएं कागजों पर तो सफल हैं, लेकिन धरातल पर बिंजा जैसे गांव आज भी प्यासे हैं.
About the Authorvicky Rathore
Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…और पढ़ें
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Location :
Pali,Pali,Rajasthan



