खांसी, जुकाम, अस्थमा और पाचन… एक पौधे में छिपे हैं कई औषधीय गुण, जानिए कटेरी की खासियत

Last Updated:June 19, 2026, 20:01 IST
खेतों की मेड़ों, सड़क किनारे और खाली पड़ी जमीन पर आसानी से उगने वाला कटेरी या भटकटैया का पौधा देखने में भले ही साधारण लगे, लेकिन आयुर्वेद में इसे बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. वैद्य विष्णुदत्त प्रजापति के अनुसार इसके फल, पत्तियां, जड़ और बीज कई पारंपरिक उपचारों में उपयोग किए जाते हैं और इसे श्वसन, पाचन तथा अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं में लाभकारी माना जाता है.
गोंडा: हमारे आसपास कई ऐसे पौधे पाए जाते हैं, जिनके बारे में लोगों को ज्यादा जानकारी नहीं होती, लेकिन उनमें औषधीय गुणों का खजाना छिपा होता है. ऐसा ही एक पौधा है कटेरी, जिसे कई जगहों पर भटकटैया के नाम से भी जाना जाता है. यह पौधा आमतौर पर खेतों की मेड़ों, सड़क किनारे, बगीचों और खाली पड़ी जमीन पर आसानी से उग जाता है. देखने में साधारण लगने वाला यह पौधा आयुर्वेद में काफी महत्वपूर्ण माना जाता है और वर्षों से विभिन्न रोगों के उपचार में उपयोग किया जाता रहा है.
लोकल 18 से बातचीत के दौरान वैद्य विष्णुदत्त प्रजापति बताते हैं कि कटेरी एक कांटेदार पौधा होता है, जिसके छोटे-छोटे फल और फूल होते हैं. इसके फल, पत्तियां, जड़ और बीज सभी औषधीय गुणों से भरपूर माने जाते हैं. आयुर्वेदिक चिकित्सा में इसका उपयोग कई प्रकार की दवाएं बनाने में किया जाता है. ग्रामीण क्षेत्रों में भी लोग पारंपरिक रूप से इसका इस्तेमाल स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं में करते हैं.
विष्णुदत्त प्रजापति ने बताया कि कटेरी का सबसे अधिक उपयोग श्वसन तंत्र से जुड़ी समस्याओं में किया जाता है. खांसी, जुकाम, अस्थमा और गले की खराश जैसी परेशानियों में यह उपयोगी मानी जाती है. माना जाता है कि इसमें मौजूद प्राकृतिक तत्व कफ को बाहर निकालने में मदद करते हैं, जिससे सांस लेने में राहत मिलती है. यही वजह है कि कई आयुर्वेदिक दवाओं में कटेरी का उपयोग किया जाता है.
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कटेरी को बुखार और कुछ प्रकार के संक्रमणों में भी उपयोगी माना जाता है. आयुर्वेद में इसकी पत्तियों और जड़ों से तैयार किए गए कुछ मिश्रणों का उपयोग शरीर को संक्रमण से लड़ने में मदद के लिए किया जाता है. इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट गुण शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने में सहायक माने जाते हैं.
बढ़ती उम्र के साथ कई लोगों को जोड़ों के दर्द और सूजन की समस्या होने लगती है. आयुर्वेद में कटेरी को दर्द और सूजन कम करने वाले पौधों में गिना जाता है. विशेषज्ञ वैद्य विष्णुदत्त प्रजापति का कहना है कि इसका उपयोग पारंपरिक रूप से जोड़ों के दर्द और शरीर की सूजन को कम करने के लिए किया जाता रहा है.
कटेरी त्वचा से जुड़ी कुछ समस्याओं में भी लाभकारी मानी जाती है. ग्रामीण क्षेत्रों में लोग इसकी पत्तियों का उपयोग त्वचा की सामान्य समस्याओं में करते हैं. आयुर्वेद के अनुसार इसमें ऐसे गुण पाए जाते हैं जो त्वचा को स्वस्थ रखने में मदद कर सकते हैं.
आयुर्वेद में कटेरी को पाचन तंत्र के लिए भी उपयोगी माना गया है. कुछ पारंपरिक उपचारों में इसका उपयोग पेट से जुड़ी सामान्य समस्याओं को दूर करने के लिए किया जाता है. माना जाता है कि यह पाचन क्रिया को बेहतर बनाने में मदद कर सकती है.
विशेषज्ञ वैद्य विष्णुदत्त प्रजापति के अनुसार कटेरी में कई प्रकार के प्राकृतिक तत्व मौजूद होते हैं, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाने में मदद कर सकते हैं. नियमित रूप से संतुलित आहार के साथ आयुर्वेदिक सलाह के अनुसार इसका उपयोग शरीर को स्वस्थ रखने में सहायक माना जाता है. कटेरी एक महत्वपूर्ण औषधीय पौधा है, लेकिन इसका उपयोग हमेशा विशेषज्ञ की सलाह से ही करना चाहिए. किसी भी औषधीय पौधे का गलत मात्रा में या गलत तरीके से सेवन स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है. इसलिए बिना चिकित्सकीय सलाह के इसका सेवन नहीं करना चाहिए.
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