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क्या सिर्फ फील्डिंग से हार गई महिला टीम, बल्लेबाजों के एप्रोच पर सवाल क्यों नहीं, फटाफट फॉर्मेट के लिए फार्मूला बदलना जरूरी

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क्या सिर्फ फील्डिंग से हार गई टीम, बल्लेबाजों के एप्रोच पर सवाल क्यों नहीं?

Last Updated:June 22, 2026, 14:55 IST

खेल का यही स्वभाव है यह क्रूर और अप्रत्याशित होता है. हमेशा यह समझ पाना आसान नहीं होता कि इतनी बेहतरीन खिलाड़ी लगातार दो आसान कैच कैसे छोड़ सकती है. किसी और दिन, वह ऐसे 100 में से 99 कैच पकड़ लेतीं, जिनमें कई इससे भी ज्यादा मुश्किल होते लेकिन उस दिन उन्होंने कैच छोड़े, और भारत हार गया खेल में ऐसा होता है यह पहली बार नहीं है, और आखिरी बार भी नहीं होगा.क्या सिर्फ फील्डिंग से हार गई टीम, बल्लेबाजों के एप्रोच पर सवाल क्यों नहीं?Zoomभारतीय टीम के महिला वर्ल्ड कप में खराब प्रदर्शन का कारण फील्डिंग के साथ खराब बल्लेबाजी भी

नई दिल्ली. मैनचेस्टर में मिली हार का दर्द अभी भी फैंस के बीच बना हुआ है. मैच के कई मौकों पर भारत खेल पर पकड़ बनाता दिखा,लेकिन हर बार चीजें हाथ से फिसलती चली गई. इसकी एक बड़ी वजह फील्डिंग में हुई गलतियां थीं, या और स्पष्ट कहें तो छूटे हुए कैच. तीन में से दो मौके राधा यादव ने छोड़े, जो कि भारतीय टीम की सबसे बेहतरीन फील्डरों में से एक मानी जाती हैं. सिर्फ भारत ही नहीं, राधा दुनिया की सर्वश्रेष्ठ फील्डरों में गिनी जाती हैं. फिर भी ऐसा हुआ गेंद उनके हाथों में नहीं टिक पाई,और दूसरा मौका तो बिल्कुल आसान था.

भारतीय टीम का जितना भी प्रैक्टिस सेशन देखेंगे तो इस दौरान सबसे बेहतरीन फील्डर राधा ही नजर आएगी.फिर भी मैच में ऐसा हो गयाउन्हें लॉन्ग-ऑन पर खड़ा किया गया था,क्योंकि उस पोजीशन के लिए वही सबसे उपयुक्त हैं मारीज़ाने कैप का कैच मैच का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ, और इस बात का दुख राधा को लंबे समय तक रहेगा लेकिन खेल का यही स्वभाव है यह क्रूर और अप्रत्याशित होता है. हमेशा यह समझ पाना आसान नहीं होता कि इतनी बेहतरीन खिलाड़ी लगातार दो आसान कैच कैसे छोड़ सकती है. किसी और दिन, वह ऐसे 100 में से 99 कैच पकड़ लेतीं, जिनमें कई इससे भी ज्यादा मुश्किल होते लेकिन उस दिन उन्होंने कैच छोड़े, और भारत हार गया खेल में ऐसा होता है यह पहली बार नहीं है, और आखिरी बार भी नहीं होगा.

राधा को क्रिमनल मत बनाओ 

अभी दो मैच वर्ल्ड कप में बचे है और इसलिए राधा को ट्रोल नहीं करना चाहिए, क्योंकि सबसे ज्यादा दर्द उन्हें ही हो रहा है. यह सोचकर ही बोझ बढ़ जाता है कि उनके कारण टीम टी20 वर्ल्ड कप से बाहर हो सकती है. उनके मानसिक स्वास्थ्य के बारे में सोचें और उन्हें उबरने का समय दें. यह घाव गहरे होंगे और भरने में समय लगेगा. ऐसे समय में खिलाड़ी को समर्थन की जरूरत होती है. उनके साथ खड़े रहें. एक खराब मैच उन्हें खराब फील्डर नहीं बना देता.जैसा कि अमोल मजूमदार ने कहा, राधा जल्द ही शानदार कैच पकड़कर भारत को मैच जिताएंगी. उम्मीद है कि वह दिन 28 जून को लॉर्ड्स में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ आए. फिलहाल, राधा और टीम को एक दिन का ब्रेक लेना चाहिए खेल से थोड़ा दूर रहकर खुद को तरोताजा करना चाहिए. फिर वापसी कर बांग्लादेश को हराना है और ऑस्ट्रेलिया के लिए तैयारी करनी है. खेल में कभी कुछ खत्म नहीं होता, जब तक सच में खत्म न हो जाए, और भारत यह बात 2025 के घरेलू वर्ल्ड कप से अच्छी तरह जानता है. शायद राधा के लिए सबसे बुरा दौर अब गुजर चुका है, और यहां से चीजें बेहतर ही होंगी.

सोच बदलें बल्लेबाज

भारतीय बल्लेबाजों के कुछ शॉट्स काफी खराब थे. स्मृति मंधाना को मारीज़ाने कैप के खिलाफ पैडल शॉट खेलने की कोई जरूरत नहीं थी, खासकर जब इससे उनके स्टंप्स खुल रहे थे. भारत ने तेज शुरुआत की थी और तीन ओवर में 30 रन बना लिए थे. शेफाली वर्मा को उम्मीद के मुताबिक शबनिम इस्माइल की शॉर्ट गेंद मिली, लेकिन वह समय पर बल्ला नहीं घुमा सकीं. यास्तिका भाटिया अच्छी लय में दिख रही थीं, लेकिन लेग स्टंप पर पिच हुई गेंद को मिस कर गईं. जेमिमा रोड्रिग्स ने एक्स्ट्रा कवर के ऊपर शानदार शॉट खेलने के बाद लीडिंग एज दे दिया. साफ है अब बाकी बचे हुए 2 मैचों में फील्डिंग और बैटिंग में बहुत ज्यादा मेहनत करने की दरकार होगी

About the AuthorRajeev MishraAssociate editor

मैं, राजीव मिश्रा, वर्तमान में नेटवर्क 18 में एसोसिएट स्पोर्ट्स एडिटर के रूप में कार्यरत हूँ. इस भूमिका में मैं डिजिटल स्पोर्ट्स कंटेंट की योजना, संपादकीय रणनीति और एंकरिंग की जिम्मेदारी निभाता हूँ. खेल पत्रका…और पढ़ें

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