“कुछ नहीं कर पाएगी” सुनकर भी नहीं टूटी हिम्मत! तीसरे प्रयास में तुलसी बनी RAS, 48वीं रैंक से बदली किस्मत

Last Updated:April 18, 2026, 22:32 IST
Barmer Hindi News: तुलसी की सफलता की कहानी उन लोगों के लिए प्रेरणा है, जो आलोचनाओं और असफलताओं के कारण अपने सपनों से पीछे हट जाते हैं. उन्हें अक्सर “कुछ नहीं कर पाएगी” जैसे ताने सुनने पड़ते थे, लेकिन उन्होंने इन नकारात्मक बातों को अपनी ताकत बना लिया. पहले दो प्रयासों में असफल रहने के बाद भी तुलसी ने हार नहीं मानी और लगातार मेहनत करती रहीं. तीसरे प्रयास में उन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए RAS परीक्षा में 48वीं रैंक हासिल की. उनकी इस सफलता के पीछे उनकी दृढ़ इच्छाशक्ति, अनुशासन और आत्मविश्वास का बड़ा योगदान है. तुलसी की कहानी यह सिखाती है कि अगर आप खुद पर विश्वास रखें और मेहनत जारी रखें.
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तुलसी ने तीसरे प्रयास में हासिल की 48वीं रैंक, RAS बनकर दिया सबको करारा जवाब
बाड़मेर. शादी करने का दबाव और मुश्किल हालातों के बीच भी तुलसी सारण ने अपने सपनों को जिंदा रखा. हर दिन संघर्ष किया, हर बार खुद को मजबूत बनाया और आखिरकार तीसरे प्रयास में RAS 2024 परीक्षा में 48वीं रैंक हासिल कर अपनी मेहनत को मुकाम तक पहुंचाया है.
कहते हैं अगर हौसला मजबूत हो तो हालात चाहे कितने ही मुश्किल क्यों नही हों मंजिल मिल ही जाती है. शादी करने के दबाव , तानों और सामाजिक दबावों का सामना करने वाली तुलसी ने हार मानने के बजाय संघर्ष को अपनी ताकत बनाया. लगातार मेहनत, आत्मविश्वास और लक्ष्य के प्रति अटूट समर्पण के दम पर उन्होंने तीसरे प्रयास में RAS 2024 भर्ती परीक्षा में 48वीं रैंक हासिल कर सफलता की नई मिसाल कायम की है.
तीसरे प्रयास में हासिल की 48वी रैंकतुलसी ने साबित कर दिया कि हौसला और मेहनत से हर ताना जवाब बन जाता है. तुलसी की प्रारंभिक पढाई राउमावि चौहटन में हुई और फिर नवोदय विद्यालय नागौर से उच्च माध्यमिक परीक्षा पास की. यही से तुलसी ने आरएएस बनने के सपने को पंख दिए और तीसरे प्रयास में उन्हें सफलता हासिल हुई है. आरएएस 2021 में तुलसी जे 1594वी रैंक हासिल की थी वही आरएएस 2023 परीक्षा में 283वी रैंक हासिल की थी और अब आरएएस 2024 में 48वी रैंक हासिल की है.
आईएएस में भी 3 बार आजमा चुकी भाग्य, अब बनी RASबाड़मेर जिले के सेड़वा उपखंड के बोरला जाटान गांव की तुलसी सारण ने समाज और परिवार के तमाम तानों के बावजूद हार नहीं मानी और राजस्थान प्रशासनिक सेवा परीक्षा में तीसरे प्रयास में 48वीं रैंक हासिल की है. तुलसी के पिता हीराराम सारण भू निरीक्षक है जबकि माता मिरगा देवी गृहणी हैं. तुलसी ने आईएएस में 3 बार अपना भाग्य आजमाया लेकिन वह सफल नहीं हो सकी.
शादी करने के दबाव के बावजूद लक्ष्य को किया हासिलशादी करने के दबाव के बावजूद उन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी ताकत से जारी रखी और अब सफलता की नई मिसाल कायम की है. तुलसी बताते है कि लगातार मेहनत और एकाग्रता ही सफलता का मूलमंत्र है. उन्होंने कहा कि सामाजिक तौर पर लड़की को पढ़ाने की बजाय शादी करने के लिए ताने दिए लेकिन परिवार ने सहयोग किया जिसकी बदौलत यह मुकाम हासिल किया है.
About the AuthorJagriti Dubey
With more than 6 years above of experience in Digital Media Journalism. Currently I am working as a Content Editor at News 18 in Rajasthan Team. Here, I am covering lifestyle, health, beauty, fashion, religion…और पढ़ें
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Location :
Barmer,Rajasthan
First Published :
April 18, 2026, 22:32 IST



